Archive for March 17th, 2006

छुटटी पर

मैं एक महीने की छुटटी पर अपने घर बंगलौर जा रहा हूं। यहां सम्मर शुरू हो चुका है और यहां भारती इतने हैं कि बाकी लोग चार-पांच दिखाई देते हैं, यहां इनडियन स्कूलों में सम्मर की छुट्टियां शुरू होचुके और यहां पढने वाले बच्चे भारत में अपने नाना-नानी से मिलने एक महीना पहले ही हवाई जहाज़ की टिकटें बुक करवा चुके, पूरे १५ दिनों तक के लिये बंगलौर, मुम्बई और दिल्ली सभी हवाई जहाज़ फुल हैं। थोडी भाग दौड करने के बाद आखिर मुझे ऐर अराबिया का टिकट मिला। ऐप्रल १० को मुझे अपने घर पहुंचना है, घर से बार बार फोन आने लगे कि ये चाहिये वो चाहिये, अभी से मांगें शुरू करदीं। सबसे हां कहा मगर मैं तो वही ले जऊँगा जितनी मेरी हैसियत है। चंद लोग दुबई को जन्नत समझते हैं कि यहां पैसों की बारिश होती है। यहां लोग मुम्बई कि तरह रात दिन पसीना बहाते हैं तब जाकर थोडे पैसे मिलते हैं।

2 comments March 17, 2006


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