डिब्बों का मसला
May 20, 2006
भारत में सिर्फ दो बार नेट यूज़ किया जब पिछले महीने मैं छुटटी पर घर गया था। वहां आज भी अक्सर वेब सेन्टरों में क्म्प्यूटर पर Win98 इन्सटाल है और जब अपना ये ब्लॉग देखा तो मेरे सभी लेख डिब्बे बन गए, दूसरे हिन्दी ब्लॉग्स और नारद की साईट भी देखा वहां भी हिन्दी text डिब्बे बने हुवे थे। मुझे ये यूनीकोड के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है। भारत में रहने तक मैं ने एक दो बार कोशिश की के साथी ब्लॉगर्स के लेख पढ लूँ पर शायद win98 कि वजा से और शायद मेरी कम स्मझी की वजा से सभी चिटठों में सिर्फ डिब्बे देखने को मिले।
वापस दुबई आया तो नारद जी के पन्ने इतने भरे हुवे हैं कि समझ में नहीं आ रहा कहां से शुरू करूं? और रमण कौल जी का ब्लॉग तो कई दिनों से खुलता ही नहीं पता नहीं क्यों? भारत जाने से दो महीना पहले ये हिन्दी ब्लॉग शुरू किया और तभी हिन्दी में टेपिंग सीखा था शुक्र है वापस आने के बाद किबोर्ड पर उँगलियॉ सही जगा चल रही हैं।
अभी तक मेरी समझ में ये नहीं आया कि ब्लॉग्स पर text की जगा डिब्बे क्यों नज़र आते हैं और हिन्दी का फाँट डाउनलोड करके इन्सटाल करने के बावजूद भी! यहां मेरे कमरे में अपना कम्प्यूटर है जिसमें कोई मसला नहीं पर जब नेट यूज़ करने के लिए किसी साईबर सेन्टर जाता हूं तो ये डिब्बे वाला मसला हमेशा मेरे साथ रहता है। और यहां पर नेट कनेक्शन लेना उससे भी बडा मसला है इस लिए आज तक मैं ने अपने कमरे में नेट कनेकशन नहीं लिया। फिलहाल ऐसा करता हूं के नेट यूज़ करने के लिए साईबर सेन्टर जाऊँ तो अपनी USB Drive भी साथ लेकर जाऊँगा और चिटठे copy करके अपने घर मेरे कम्प्यूटर पर पढ लूँगा क्यों के मेरे कम्प्यूटर पर हिन्दी फाँट और यूनिकोड का कोई मसला नहीं सब सही है जिसमें Win2000 इन्सटाल है।
Entry Filed under: टैम पास. .
9 Comments Add your own
Leave a Comment
Some HTML allowed:
<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <pre> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>
Trackback this post | Subscribe to the comments via RSS Feed

1.
मिर्ची से&hellip | May 20, 2006 at 1:26 pm
आप की तकलीफ के बारे में परिचर्चा पर कुछ लिखा है, देखिए कोई तो जवाब देगा.
http://akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?pid=461
पंकज
2.
Hindi Blogger | May 20, 2006 at 3:46 pm
मुझे जो एक उपाय पता है, वो है:
बीबीसी-हिंदी की साइट से(bbchindi.com के होमपेज पर ऊपर दाहिनी तरफ़ नारंगी बक्से कोने में मौजूद)फ़ोंट डाउनलोड करें. कंप्यूटर को एक बार रिस्टार्ट करें. यूनीकोडेड हिंदी डब्बे से बाहर आ जानी चाहिए. मैंने कई साइबर कैफ़े में ये आजमाया है.(हमेशा फ़ोंट डाउनलोड करने के बाद कंप्यूटर बिना कैफ़े वाले की अनुमति के रिस्टार्ट किया. कैफ़े वाले को झूठ बोलना पड़ा कि कंप्यूटर ख़ुद शट-डाउन हो गया था.)
3.
संजय बेंग&hellip | May 20, 2006 at 9:57 pm
इसके बाद भी मात्रा सम्बन्धी गङबङी हो सकती हैं. एम इ का प्रयोग करते समय कोई युनिकोड फोंट डाले तथा एरियलयुनि नामक फोंट हटा दे तो मात्रा कि समस्या हल हो जाती हैं (सिर्फ एक्ष्प्लोरर पर)
98 के लिए विश्वास के साथ नहीं कह सकता.
कमाल हैं अभी भी सावरकैफे में 98 प्रयोग में आ रहा हैं.
4.
Pratik | May 21, 2006 at 12:35 am
शुऐब भाई, ‘हिन्दी ब्लॉगर’ जी की बात सही है। बस बीबीसी हिन्दी से फ़ॉण्ट डाउनलोड करके कम्प्यूटर रीस्टार्ट कीजिए और हो गया काम। डिब्बों की जगह फिर वही पुराने प्यारे अक्षर नज़र आने लगेंगे।
5.
मनीष...Manish | May 21, 2006 at 1:25 am
Shuaib Bhai is masle se main saal bhar joojh chuka hoon. mere paas bhi WIN 98 hai. Maine Takhti ke sath Raghu download kiya aur use install karne ke baad in dibbon ka masla
khatma hua. Mere hindi blog abhi bhi WIN 98 ke platform pe hi hai.
6.
सागर चन्द&hellip | May 21, 2006 at 3:39 am
जैसा कि आप सब जानते हैं मैं हैदराबाद में साईबर कॉफ़े चलाता हुँ,मुझे Win98 ही ज्यादा उपयुक्त लगता है क्यों कि इसे कोई भी गड़बड़ होने पर फ़ॉरमेट करने के बाद आसानी से और बहुत कम समय में इन्स्टाल किया जा सकता है, इसीलिये भारत के साईबर कॉफ़े में Win98 ही ज्यादा प्रयोग किया जाता है।
रही बात सुहैब भाई के डिब्बों की तो मैं भी हिन्दी ब्लॉगर जी की तरह बी बी सी की साईट से फ़ॉन्ट डाऊनलोड और इन्स्टाल करता हुँ, मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हुई।
7.
Jitendra Chaudhary | May 21, 2006 at 4:12 am
सबकी बात सुनी, लेकिन भैया समस्या यह है कि इन्टरनैट कैफ़े वाला आपको कोई फोन्ट इन्सटाल नही करने देगा। बीबीसी हिन्दी वाली EXE जलाने का अधिकार भी नही होगा शायद।
मै जब पिछली बार गया था परेशान हो गया था, तो कैफ़े वाले को पचास गालियां सुनाकर आया था, बीबीसी हिन्दी तो क्या, गूगलमेल तक नही खुलती यार।कुछ भी इन्स्टाल करने के नाम पर कैफ़े वाले के कान खड़े हो जाते है, वैसे भी जो बन्दे वहाँ बैठते है, उनकी जानकारी का अल्लाह ही मालिक है।
8.
SHUAIB | May 21, 2006 at 7:54 am
Jitendra Bhaiya:
आपने बिलकुल ठीक कहा, यहां दुबाई के सभी साईबर सन्टर्स में Download और instillation बलोक कर दिया गया है और तो और यहां की Government ने बहुत सारी वेब साईट भी बलोक करदी है। मेरे कमपयूटर पर win2000 है जिसमें कोई प्रोबलम नहीं पर अकसर साईबर सन्टर्स में win98 ही है।
सागर भाई और प्रातिक भाईः
मुझे कुछ बताइए के win98 में हिन्दी पढने के लिए किया करना होगा, बहुत मुशकिल पेश आती जब हिन्दी अक्षर की बजाए डिब्बे नज़र आते हैं।
मनीष जी और Hindi Blogger जी
मसला ये है कि यहां के साईबर सन्टर्स में Download और Instillation बलोक किया है। एक जगा मैं ने बीबीसी का फाँट Download लतो करलिया पर जब Install करने की कोशीष की तो नाकाम हो गाया।
संजय बेंगनी जीः
क्रिपया आप एम इ का link भी दें तो बडी महरबानी।
सेठ जीः
लिंक देने का बाहुत शुक्रिया।
आखिर में बात ये है कि यहां मेरे एक दोस्त ने कहा कि यूनिकोड win98 में काम नहीं करता। मेरे कमप्यूटर पर तो win2000 है जिसमें हिन्दी अक्षर ठीक नज़र आते हैं पर जब साईबर सेन्टर में नारद और आप दोसतों के ब्लॉग देखों तो डिब्बे नज़र आते हैं और मुझे ये यूनिकोड की किया तकनीक है नहीं मलूम फिर भी आज कल मैं यही कर रहा हूं के अपनी USB drive में आप सब के लेख copy करके अपने घर के कमप्यूटर में पढलेता हूं और टिप्पणियाँ भी अपने कमप्यूटर में टैप करके साईबर सन्टर आकर पोस्ट कर देता हुं।
9.
पंकज वर्म&hellip | July 8, 2006 at 3:39 pm
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम पर शुरू में तो मुझे भी बहुत मुश्किल पड़ी लेकिन अब जब साइट ठीक से नज़र आने लगी है तो हाल यह हो गया है कि सुबह आँख खुलते ही और रात को सोने से पहले यह साइट देखना मेरी दिनचर्या में शामिल हो गया है.