Archive for July, 2006
ग्रीन चाय
हम भारती चाय के शौकीन हैं ही मगर चाय ऐसी जिस मे दूध, चीनी और इलाईची हो जिसे हम स्पेशल चाय कहते हैं। यहां अरब देशों मे लोग बगैर दूध की चाय पीते हैं यानी काली चाय । हम भारतियों को देख कर कुछ अरबी लोग दूध वाली चाय भी पी जाते हैं। यूरोप से हमारी एक मित्र ने चेटिंग पर बताया कि उनके यहां पोलैंड मे लोग ग्रीन टी (हरी पत्ती) पीना पसंद करते हैं। हमारी मित्र ज़ोशिय खुद कहती है कि ग्रीन टी पीने से सहत अच्छी बनी रहती है और उससे मोटापा भी नही आता। उसी के मशवरे पर हम ने भी सुपर मार्केट से लिपटन का ग्रीन टी उठा लाया और आज पूरा एक महीना बीत गया हमने सिर्फ एक टी बेग यूज़ की —- इतनी कडुवा कि मैं बता नही सकता, मगर वो कहती है सहत के लिए बहुत अच्छा है — ऐसी चाय उसी को मुबारक।
6 comments July 30, 2006
टॉप ब्लॉगर
ब्लॉगिंग एक ऐसा नशा जैसे चंद लोगों को खाने के फोरन बाद सिगरेट पीना होता है और ब्लॉगर का नशा ऐसा कि अभी अपना लेख पोस्ट किया तो जल्दी से पन्ने को रि-फ्रेश कर के भी देख लिया कि शायद कोई टिप्पणी आगई हो :p चंद ब्लॉगर हमारी तरह भी होते हैं जो साइबर केफे जा कर पोस्ट करते हैं, आज पोस्ट किया तो अपने ब्लॉग का मुंह देखने के लिए दूसरे दिन का इनतेज़ार करना पडता है कि कब दफतर से छुटटी हो और साइबर केफे की तरफ डोड लगाएं
मानो आज हम भी टॉप के ब्लॉगर बन गए
अरे भाई पिछले तीन वर्षों से ब्लॉगिंग कर रहे हैं तो टॉप ब्लॉगर ही कहलाएंगे ना :p ये बात अलग है कि ब्लॉगिंग की ए बी सी डी नही मालूम मगर कुछ ना कुछ लिख कर पोस्ट तो करते हैं। तीन वर्ष पहले जब हमें ब्लॉग किया चीज़ पता ही नही था, तब हम साइबर केफे मे बैठ कर नेट की रंगीन दुनिया मे खोजाते थे और जब साइबर केफे वाला आकर कहता “और बैठना है आपको?” तब हम अपनी घडी देख कर कुर्सी से उछल पडते कि “अरे बापरे – पिछले चार घंटे से हम इन्टरनेट मे ऐसे खो गए कि वकत का पता ही नही और आए थे सिर्फ इ-मेल चेक करने और लिंक से लिंक मिलाते कहीं और निकल जाते। आआह —- वोह दिन और आज का दिन बहुत फरक है क्योंकि पहले हम नेट पर बेकार ही अनजानों से चैट करते थे या फिर रंगीन वैब साईट्स की रंगीनियों मे खोजाते थे। दोसतों की इ-मेल का जवाब लिखने के लिए फुरसत नही थी और अब लम्बी लम्बी पोस्ट लिखने मे चैम्पिन बन गए। अभी वाशिंग मशीन मे कपडे पडे हैं जिसे दुबारा घुमाने के लिए 8वीं फलोर (अपने फ्लैट) जाना था मगर हम तो अपनी बिलडिंग के करीब से गुज़रते हुए सीधा साइबर केफे पहुंच गए (ब्लॉगिंग का नशा) – दफतर मे हमारा बॉस इधर उधर निकल जाता है तब हम इन्टरनेट खोल लेते हैं मगर यहां हमारा नशा और भी बढ जाता है क्योंकि ब्लॉगर तो किया हम किसी का भी ब्लॉग खोल नही सकते तो हमारा ब्लॉग कैसे देखे? सिर्फ शाम के 7 बजने का इनतेज़ार रहता है और दफतर से सीधा साइबर केफे :D अच्छा किया जो इन्टरनेट पर ब्लॉगिंग का सिलसिला चालू हुवा वरना हम अभी तक इन्टरनेट की दूसरी रंगीनियों मे खोए रहते :P
9 comments July 27, 2006
अब हम भी वर्डप्रेस पर
हम टकनीकल इनसान तो नही और ना ही प्रोग्रामिंग की ए बी सी डी मालूम है इसके बावजूद दिल पे हाथ रख कर wordpress मे अपना ब्लॉगर वाला ब्लॉग इम्पोर्ट करने मे शायद कामयाब रहे (‘शायद‘ इसलिए कि हमें खुद नही मालूम कहां तक कामयाब रहे?) अब जनाब ब्लॉगस्पाट साहब इतने मसरूफ रहते हैं कि कई बार हमें बगैर लॉग-आफ किए भगा दिया जबकि हम पिछले तीन वर्षों से इस पर मौज मसती करते रहे और मनमानी भी आखिरकार ब्लॉगर ने हमें खैरबाद कहने पे मजबूर कर दिया।
हम वर्डप्रेस पर अजनबी हैं, सब कुछ नया नया – पूरे दो घनटों तक हमारी हैरानी परेशानी देखने लाइक थी क्योंकि पहले ही लिख दिया था कि हम कोई टकनीकलर नही बस यूं ही हाथ पैर मारते मारते किनारे तक पहुंचने की कोशिश करते हैं या फिर डूबने को तरजीह देते हैं। बस जितना समझ आया कर दिया दांतों से तक पसीने छूट गए। अब बाकी भाई दोसतों के मशवरे या उनकी मदद से आगे बढ सकते हैं वरना वहीं के वही
14 comments July 26, 2006
इन्टरनेट का सही इस्तेमाल
इमिरेट्स मे सेक्स और गन्दी वेब साईट्स को यहां की सरकार ने ब्लॉक कर रखा है ताकि लोग इन्टरनेट का सही इस्तेमाल करें और यहां इन्टरनेट का गलत इस्तेमाल जुर्म है और सज़ा भी। अगर कोई इ-मेल से भी गन्दी तसवीर भेजे या वसूल करे तो फोरन पकडा जाता है। वोह इस लिए कि यहां सेक्स खुले आम दिखता और बिकता है, नेट पर सर खपाने की ज़रूरत ही नही।
देखा आपने? यहां UAE मे इन्टरनेट का बिलकुल सही इस्तेमाल हो रहा है।
Add comment July 25, 2006
इनसे मिलो – 24
ये खुदा है
हिज़बुल्लाह आतंकवादीयों ने इज़राईल के सिर्फ दो दांत किया तोडे कि वोह पलट कर लेबनान के मुंह मे अपना पूरा हाथ डाल दिया, खुदा भी इसी इन्तेज़ार मे है कि कब ईरान और सीरिया कुछ बोले तो उनके मुंह मे भी हाथ ठूँसदे। पीछे से सौदी आरब ने भी फुसफुसाया कि शान्ती काइम रखो। खुदा ने आरबियों को डांटाः खामोश वोरना तुमहारी पुल खोलदें और तुम्हें अपना मुंह छुपाने के लिए खुदा का आश्रम भी नसीब ना हो। दूर से नार्थ कोरिया को उंगली नचाते देख कर खुदा ने ठानली मौका मिलते ही उसे भी किस्तें मे नचाना है। G 8 की बैठक मे जहां अमीर देशों ने पूजा की मगर इस बार प्रसाद गरीब देशों मे बांटने कि बजाए इज़राईल पर खर्च करने का फैसला किया है। सभी देशों की तरह आज भारत ने भी लेबनान को अफसोस लिख भेजा क्योंकि लेबनान को मिलने वाली हमदर्दियाँ और अफसोस खुदा की नज़रों से सनसर होकर गुज़र रही हैं। पहली बार खुदा ने नहाने का प्रोग्राम बनाया हालांकि वोह जानता है अगर ना भी नहाए तो पाक है, दुनिया मे आने के बाद यहां की रीत रिवाज और अमेरिका के उकसाने पर आखिरकार खुदा ने नहाने का इरादा करलिया और समुद्र मे इतनी ज़ोर से छलांग मारी कि दो से तीन मीटर ऊंची लहरें खडी होगई और गरीब इनडोनेशिया के कई लोगों ने आखिरी बार नहाया। दुनिया इतनी बडी है और खुदा को इसी गरीब देश के दामन मे डुबकी लगाना था कि जावा शहर मे हलचल मच गई। गरीब इनडोनेशिया के लोग उनके पास पहले से इतनी सारी मुसीबतें और ऊपर से एक और?? नहाने धोने के बाद खुदा वापस काम पर लौटा, इज़राईल पहुंचते ही लेबनान पर दुबारा तोप बाज़ी शुरू करदी। अब तो वोह निशाना बाज़ी मे इतना पक्का होगया सारी दुनिया खुदा के गीत गा रही है इसके बावजूद खुदा को हैरत होई कि अभी तक यूरोपियन युनिन चुप है — जारी
बाकी फिर कभी
Add comment July 23, 2006
