जापानी कवाली
हमारे पडोस की बिलडिंग मे एक अपने मित्र से मिलने गया तो उसके सामने वाले फ़्लैट से नुसरत फतेह अली खान की चीखें सुनाई दे रही थीं, मेरा मतलब है Classical राग की आवाज़ें। जब उनका दरवाज़ा खुला तो चार जापानी बाहर निकले, मैं इन्हें जानता हूं वो सब एक जापानी रेसटुरंट मे काम करते हैं जो करीब ही है। दूसरे दिन भी मुझे अपने उस मित्र के फ़्लैट पर जाना हुवा तो तब भी उन जापानियों के फ़्लैट से नुसरत की चीखें सुनाई दी और उस फ़्लैट मे सिर्फ जापानी लोग ही रहते हैं उनके अलावा दूसरा कोई पाकिस्तानी या भारती नहीं है। उन जापानियों को अपनी जापानी और अंग्रेज़ी भाषा के सिवा दूसरी कोई भाषा नहीं मालूम। मुझे याद आया एक बार नुसरत फतेह अली खान अपनी कवाली गाने के लिए बेंगलौर आऐ तब एक उर्दू अखबार ने लिखा थाः नुसरत ने चार बार जापान जाकर जापानियों को भी अपनी कवाली सुनाई थी और जापानी लोग नुसरत की कवाली सुनने के लिए अपने जूते उतार कर अदब से बैठते थे।
4 comments July 3, 2006
