चैनीस
July 5, 2006
मां के हाथ का बना हुवा खाना मेरा मन पसंद खाना है, वैसे सभी भारती खाने बहुत मज़ेदार होते हैं। यहां इमारात मे भारती होटल का मतलब मलबारी होटल है और इन होटलों मे वही पकाया जाता है जो मलबारी अपने गाऊँ मे खाते हैं और तो और अंग्रेज़ी, भारती और चैनीस खानों को मिला कर उसकी खिचडी भी बनाते हैं जिसे आम भाषा मे “घटिया खाना” कहा जाता है। दुबई मे मलबारियों के अलावा चंद उत्तरी भारत के रेसटुरंट्स भी हैं जैसे दिल्ली, मुम्बई, बेंगलौर और हैदराबादी वगैरह जहां पर शुध भारती खानों का सवाद तो नहीं मगर कुछ अच्छा खाने को मिल जाता है मगर ऐसे रेसटुरंट्स कहीं कहीं पर ही दिखाई देते और जहां भी नज़र डालो हर तरफ मलबारी होटल नज़र आते हैं। उनके अलावा बाकी दुनिया भर के रेसटुरंट्स भी हैं जो हैं तो बहुत महंगे पर वहां हर क़िस्म के मज़ेदार और बेहतरीन पकवान खाने को मिलते हैं। यहां हम बेचलर्स की नसीब मे घर जैसा खाना कहां मिलता है, मैं खुद पिछले तीन वर्षों से मुखतलिफ होटलों मे खाता आरहा हूं और यहां मुझे चैनीस रेसटुरंट्स का खाना बहुत पसंद आया जो मेरे फ़्लैट के बिलकुल करीब ही है। हफ्ते मे दो-तीन बार इसी रेसटुरंट से रात का खाना खाता था मगर— पिछले महीने उस रेसटुरंट के किचन का सिलेंडर बलास्ट होगया जिसकी वजे से पूरा रेसटुरंट ढेर होचुका। आज कल चैनीस खाने के लिए टैक्सी मे बैठ कर थोडा दूर जाना पड रहा है।
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1.
e-shadow | July 5, 2006 at 11:55 am
शोएब भाई,
खुदा करे आपको जल्द घर का खाना बनाने वाली मिल जाये।
वक्त आ गया है, हलाल हो जाइये, अम्मी अब्बा की बात मान लीजिये।
2.
Pratik | July 6, 2006 at 8:36 am
लगता है मलाबारियों ने दुबई पर कब्ज़ा कर लिया है। ज़्यादा चाइनीज़ खाना मत खाएँ, क्या मालूम चीनियों की ही तरह आपकी भी नाक और आँखें छोटी-छोटी हो जाएँ। वैसे, मैं भी ई-शैडो जी की बात से इत्तफ़ाक रखता हूँ। तो फिर आप हम लोगों को बंगलौर में दावत का मौक़ा कब दे रहे हैं?
3.
SHUAIB | July 6, 2006 at 10:16 am
E-shadow जी और Pratik जीः
बेंगलौर मे जब मैं आऊँगा तब आपको दावत भी दूँगा पर छाया जी कहीं और तव्जजा दलाई है, भाई कौन है वो जो इस कम-बकत को खाना बनाके खिलाए सिवाए मां के