टॉप ब्लॉगर
July 27, 2006
ब्लॉगिंग एक ऐसा नशा जैसे चंद लोगों को खाने के फोरन बाद सिगरेट पीना होता है और ब्लॉगर का नशा ऐसा कि अभी अपना लेख पोस्ट किया तो जल्दी से पन्ने को रि-फ्रेश कर के भी देख लिया कि शायद कोई टिप्पणी आगई हो :p चंद ब्लॉगर हमारी तरह भी होते हैं जो साइबर केफे जा कर पोस्ट करते हैं, आज पोस्ट किया तो अपने ब्लॉग का मुंह देखने के लिए दूसरे दिन का इनतेज़ार करना पडता है कि कब दफतर से छुटटी हो और साइबर केफे की तरफ डोड लगाएं
मानो आज हम भी टॉप के ब्लॉगर बन गए
अरे भाई पिछले तीन वर्षों से ब्लॉगिंग कर रहे हैं तो टॉप ब्लॉगर ही कहलाएंगे ना :p ये बात अलग है कि ब्लॉगिंग की ए बी सी डी नही मालूम मगर कुछ ना कुछ लिख कर पोस्ट तो करते हैं। तीन वर्ष पहले जब हमें ब्लॉग किया चीज़ पता ही नही था, तब हम साइबर केफे मे बैठ कर नेट की रंगीन दुनिया मे खोजाते थे और जब साइबर केफे वाला आकर कहता “और बैठना है आपको?” तब हम अपनी घडी देख कर कुर्सी से उछल पडते कि “अरे बापरे - पिछले चार घंटे से हम इन्टरनेट मे ऐसे खो गए कि वकत का पता ही नही और आए थे सिर्फ इ-मेल चेक करने और लिंक से लिंक मिलाते कहीं और निकल जाते। आआह —- वोह दिन और आज का दिन बहुत फरक है क्योंकि पहले हम नेट पर बेकार ही अनजानों से चैट करते थे या फिर रंगीन वैब साईट्स की रंगीनियों मे खोजाते थे। दोसतों की इ-मेल का जवाब लिखने के लिए फुरसत नही थी और अब लम्बी लम्बी पोस्ट लिखने मे चैम्पिन बन गए। अभी वाशिंग मशीन मे कपडे पडे हैं जिसे दुबारा घुमाने के लिए 8वीं फलोर (अपने फ्लैट) जाना था मगर हम तो अपनी बिलडिंग के करीब से गुज़रते हुए सीधा साइबर केफे पहुंच गए (ब्लॉगिंग का नशा) - दफतर मे हमारा बॉस इधर उधर निकल जाता है तब हम इन्टरनेट खोल लेते हैं मगर यहां हमारा नशा और भी बढ जाता है क्योंकि ब्लॉगर तो किया हम किसी का भी ब्लॉग खोल नही सकते तो हमारा ब्लॉग कैसे देखे? सिर्फ शाम के 7 बजने का इनतेज़ार रहता है और दफतर से सीधा साइबर केफे :D अच्छा किया जो इन्टरनेट पर ब्लॉगिंग का सिलसिला चालू हुवा वरना हम अभी तक इन्टरनेट की दूसरी रंगीनियों मे खोए रहते :P
Entry Filed under: टेक्नोलॉजी, दुबई. .
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1.
Ashish | July 27, 2006 at 4:34 pm
सही शोएब जी, जो बन्दा साईबर-कैफ़े से चिठ्ठाबाजी करे, उसकी लगन की तो दाद ही देनी चाहिये। मैं इस हिन्दी चिठ्ठाजगत मे नया हूँ, पर अब से आपका चिठ्ठा जरूर देखूँगा।
2.
अनूप शुक्ला | July 27, 2006 at 5:13 pm
तीन साल से ब्लागिंग का नशा जारी रखने की बधाई।
3.
shuaibi | July 27, 2006 at 5:16 pm
Ashishजीः धन्यवाद आपका, आते रहियगा - मैं इस वकत आप ही का चिट्ठा देख रहा हूं
अनुपजीः बधाई देने के लिए आपका धन्यवाद
4.
eshadow | July 27, 2006 at 6:48 pm
शोएब जी, आप तो हिंदी चिठ्ठाजगत के एक रत्न हैं, आप नही होते तो कुछ कमी रह जाती।
5.
आशीष | July 28, 2006 at 3:26 am
बढीया है लगे रहो !
6.
सागर चन्द नाहर | July 28, 2006 at 4:22 pm
सुहैब भाई,
मैं भी ईशैडोजी के कथन का समर्थन करता हुँ, वाकई आप इस चिठ्ठा जगत के रत्न हैं।
7.
SHUAIB | July 30, 2006 at 4:50 pm
आशीष जी और नाहर जीः आप दोनों की इज़्ज़त नवाज़िश क बहुत धन्यवाद
8.
Tarun | July 31, 2006 at 2:39 am
लगे रहो !
9.
विवेक रस्तोगी | July 31, 2006 at 7:50 am
वाह वाह आपने तो मन की बात कह डाली। बधाई हो ।