ग्रीन चाय

July 30, 2006

हम भारती चाय के शौकीन हैं ही मगर चाय ऐसी जिस मे दूध, चीनी और इलाईची हो जिसे हम स्पेशल चाय कहते हैं। यहां अरब देशों मे लोग बगैर दूध की चाय पीते हैं यानी काली चाय । हम भारतियों को देख कर कुछ अरबी लोग दूध वाली चाय भी पी जाते हैं। यूरोप से हमारी एक मित्र ने चेटिंग पर बताया कि उनके यहां पोलैंड मे लोग ग्रीन टी (हरी पत्ती) पीना पसंद करते हैं। हमारी मित्र ज़ोशिय खुद कहती है कि ग्रीन टी पीने से सहत अच्छी बनी रहती है और उससे मोटापा भी नही आता। उसी के मशवरे पर हम ने भी सुपर मार्केट से लिपटन का ग्रीन टी उठा लाया और आज पूरा एक महीना बीत गया हमने सिर्फ एक टी बेग यूज़ की —- इतनी कडुवा कि मैं बता नही सकता, मगर वो कहती है सहत के लिए बहुत अच्छा है — ऐसी चाय उसी को मुबारक।

Entry Filed under: ये ज़िनदगी. .

6 Comments Add your own

  • 1. जीतू  |  July 31, 2006 at 4:44 am

    शोएब भाई, काहे अपनी आदतें दूसरों को देखकर बदलते हो।कभी अरबियों ने आपके मसालेदार खाने को देखकर अपने खाने मे बदलाव किया? नही ना।

    रही बात ग्रीन टी की, तो दादा, थोड़ा टेस्ट डेवलप करना पड़ता है, दूसरे ग्रीन टी, को थोड़ा सा ठन्डा (गुनगुना) पीयोगे तो कडु़वाहट कम होगी। ज्यादा दिक्कत हो रही है तो पुदीने के साथा या किसी और फ़्लेवर के साथ ग्रीन टी खरीदो, थोड़ा बेहतर लगेगा।

    हमको भी तरह तरह की चाय का शौंक है, चाहे आयरिश ब्रेकफ़ास्ट हो, या अर्ल ग्रे, या ग्रीन टी, मुझे समान रुप से पसन्द है।कभी श्रीलंका की दिलमाह टी पी है, मुझे उसके सभी फ्लेवर पसन्द आते है।

  • 2. pratyaksha26  |  July 31, 2006 at 9:42 am

    चाय पर बहस लंबी चल सकती है. मुझे तो पत्ती वाली चाय पसंद है, लोपचू या फिर फ्लावरी ऑरेंज पीको. बडे ज़माने पहले पी हुई और आजतक ज़ुबान पर ताज़ा ‘रुंगली रुंग्लिओट अब तक याद है.
    चाय कम पीती हूँ पर एक कप चाय सुबह की सही फ्लेवर वाली मिल जाय तो फिर क्या बात

  • 3. मनीष  |  July 31, 2006 at 2:57 pm

    चाय का शौकीन , तो मैं नहीं पर flavour वाली leaf tea पीना पसंद है। वैसे जीतू की सलाह मानिये शोएब भाई !

  • 4. drprabhatlkw  |  July 31, 2006 at 7:25 pm

    [हमारी मित्र ज़ोशिय खुद कहती है कि ग्रीन टी पीने से सहत अच्छी बनी रहती है और उससे मोटापा भी नही आता। ]
    तो एक बात तो पक्की है शुएब कि तुम मोटापा कम करने के लिये यह सब जोर आजमाइश कर रहे हो.

  • 5. eshadow  |  July 31, 2006 at 7:48 pm

    शोएब भैया, हमारे इधर भी ये हरी चाय लोगबाग बहुत शौक से पीते हैं।
    एक बार मैने भी टेस्ट की थी, वल्लाह, हमारी काली चाय ही भली।
    काले लोगों की काली चाय। हा हा हा।

  • 6. shekhchilli  |  August 2, 2006 at 9:08 am

    शोएब भाई, वह चाय ही क्या जिसमें दूध और इलायची डाल कर खौलाया न गया हो। हम मुंबइया लोग “कटिंग चाय” के शौकीन होते हैं। सड़क किनारे स्टोव पर खौलती चाय का छोटा सा ग्लास जो ताज़गी देता है वो ये काली चाय पीने वाले क्या जानें। इसीलिये तो हमारे ठिकाने का नाम भी “गरम चाय” है :)

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