ज़िनदगी मे पहली बार ज़िनदा शार्क देखने का मौका मिला, जो खुले समुद्र से भटक कर कॉरनिश मे घुस आई। पानी के ऊपर मटकती होई मोटी टगडी मज़बूत शार्क को देखने के लिए लोग उमड पडे। बाद मे दुबई म्युनिसिपैलिटी के बहादुर बंग्लादेशी मुछेरों ने शार्क को हांकते होवे वापस खुले समुद्र की तरफ भगा दिया। जब शाम को नेट केफे पहुंचे तो जनाब को अचानक शार्क पर रिसर्च करने का शौक जागा और बहुत सी वेब साईट्स से चंद आंकडे अपने ब्लॉग के लिए खींच लिऐ:






July 21, 2006
ध्यान रहे यहां इस चिट्ठे पर एक नई किस्तें शुरू की जारही है, इस सिरीज़ की चंद किस्तें इस चिट्ठे पर पोस्ट भी हो चुकी हैं जो कि सिर्फ एक आज़माईश थी कि हिन्दी मे पढने वाले इसे समझेंगे या नहीं? खैर यहां बताना अब ज़रूरी है कि इन सिरीज़ के अब तक 24 किस्तें उर्दू मे पोस्ट हो चुकी हैं जिसे पढने वाले चंद समझदार लोगों ने वाह वाह की और इन लेख को बिलकुल सही कहा मगर जो ना समझा वोह भडक उठा उसकी आत्मा कांप उठी क्योंकि इस सिरीज़ के हीरो का नाम खुदा है, जी हां घबराने वाली बात नहीं क्योंकि खुदा तो खुदा है चाहे उसे भगवान कहे शिव कहे या फिर जीसस आखिर वोह है तो दुनिया का मालिक जिसने ये जहां बनाया फिर हम इनसानों को भी बनाया मगर इन इनसानों मे ऐसे भी लोग हैं जो खुदा बनने की कोशिश कर रहे हैं, सारी दुनिया मे अमन के नाम पर दनदनाते घूम रहे हैं और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं। यहां इन सिरीज़ मे खुदा का नाम उस आदमी को दिया है जो ताकतवर देशों के पीछे रिमोट कन्ट्रोल पकडे बैठा है और खुद को खुदा समझ कर पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है हर देश के काम मे अपनी टांग अडाता है। इन सिरीज़ को इस अन्दाज़ मे लिखा जाएगा जैसे आजकल के हालात हैं जैसे खबरों पर टिप्पणी - हर नई खबर पर ये सिरीज़ किस्तों मे पोस्ट होती रहेगी और इसे टिप्पणी देने की ज़रूरत नहीं क्योंकि ये खुद एक धमाकेदार टिप्पणी है।
इस लेख को लिखने वाले ने अभी तक ढंग से पूरी तरह हिन्दी शब्द नही सीखे और कोशिश कर रहा है कि जल्दी से शुध हिन्दी सीखले इसीलिए वोह हर एक के हिन्दी चिटठों मे झांकता रहता हैं और इसे दूसरों के लेख पढने की बहुत बुरी आदत है चाहे टिप्पणी दे या ना दे मगर बाकाईदा दूसरों के ब्लॉग पढता रहता है। तो शुरू होने वाला है हिन्दी-उर्दू मिक्स शब्दों मे एक नया अन्दाज़ “इनसे मिलो - ये खुदा है” किस्तों मे।
नोटः इन सिरीज़ का सिरियल नम्बर वहीं से शुरू होगा जहां तक उर्दू मे लिखा गया था, यानी उर्दू मे पोस्ट होने वाली किस्त का नम्बर 24 है तो हिन्दी मे भी इसी नम्बर से शूरू होगा क्योंकि ये लेख लिखने वाला हिन्दी-उर्दू सिरीज़ एक साथ लिखता है और कोशिश होगी कि उर्दू की पुरानी किस्तों का ट्रांसलेट किया जाए।
धन्यवाद
July 20, 2006
ये खुदा है
आज फिर ईराक मे चालीस इनसानों के सर काट दिये जिस पर खुदा ने शुक्रिया अदा करते होवे अमेरिका से फरमायाः अच्छा किया ईराकियों को आपस मे लडवा दिया वरना कब तक खुदा अपना अज़ाब खर्च करे!? दूसरी तरफ लेबनान मे धमाकों कि वजा से कल रात इनडोनेशिया मे आया भूकंप की आवाज़ खुदा को सुनाई नही दिया क्योंकि वो इस वकत तोप बाज़ी मे बहुत मसरूफ है – जारी
बाकी फिर कभी
July 18, 2006
अम्मी ने मेरे लिए एक लडकी का फोटो साथ मे उसका बयुडाटा भेजा, वोह 22 वर्ष की BA पास खूबसूरत लडकी है साथ मे पांच वकत की नमाज़ी भी और उसका पूरा खानदान माशा-अल्लाह पक्का इसलामी और दीनदार है उन्हें भी पांच वकत का नमाज़ी और पक्का लडका चाहिए। यहां मेरे चंद मुसलमान मित्रों के साथ इस बारे मे बात किया तो बताया कि लडकी मे कुछ बुराई तो नही सोच समझ कर हां कह दे। मैं ने लडकी के घर वालों को डैरेक्ट खत भेजा जिसमे शादी की शर्त रखी कि अगर शादी होगी तो कोर्ट मे होगी वोरना नहीं। लडकी वाले आग बगला होए और हमारे घर जाकर झगडा किया कि कैसी तरबियत दी है अपने बेटे को? आपका बेटा मुसलमान है या फिर कोई और?? भाई हम मुसलमान हैं शादी घर मे हो या मसजिद मे मगर निकाह ज़रूरी है और आपका बेटा कहता है कि वोह कोर्ट मे शादी करेगा छी छी —— किया लडकी को भगा के शादी करेगा या फिर लडकी लावारिस है?
उसके दूसरे दिन अम्मी ने मुझे फोन पर खूब सुनाई, तेरे विचार बताने की किया ज़रूरत थी? कितना अच्छा खानदान है ढूंडने से भी नही मिलता। अम्मी से बात करते होवे मेरी बोलती गुम होगई क्योंकि अब्बा भी वहीं थे। मैं ये बताना चाह रहा था कि अपनी होने वाली पार्टनर को अपने बारे मे सब कुछ सच सच बता देना चाहता हूं क्योंकि बाद मे वोह ना पछताए और मुझे गालियाँ दे कि पहले क्यों नही बताया। मैं खुल कर अपने विचार अपने घर वालों को बता नही सकता वोरना अब्बा खुद मेरी मौत का फत्वा निकाल देंगे और शाही इमाम दिल्ली से बेंगलौर तक मेरे खिलाफ जुलूस लेकर जनाज़ा के साथ पहुंच जाएगे।
अपने विचारों को शेर करने के लिए ये मेरा ब्लॉग काफी है और मेरी डाईरी यही ब्लॉग है, अपने ब्लॉग पर पूरी आज़ादी के साथ अपने विचार लिख सकता हूँ जो बोल नही सकता। भारत मेरा पहला धर्म है जहां मैं पैदा होवा और उसी देश के बनाए कानून के मुताबिक कोर्ट मे शादी करूँगा मगर ऐसी लडकी मिलेगी कहां?
July 17, 2006
ये खुदा है
सददाम अदालत मे खडे बड बडाने लगेः जब हम ईराक के राष्ट्रपति थे इज़राईल हमारे सामने एक चूहे की तरह था और आज हम पिंजरे मे तो वोह शेर बन गया।
खुदा ने सददाम की बात सुनी तो उन्हें तसल्ली दीः ऐसी हालत मे बहकी बहकी बातें ना करे, अमेरिका ने अब तक आपको जो ज़िनदा रखा उस पर शुक्र करें। सीरिया से पता नही किस को शरारत सूझी, मिज़ाईल पर उसामा का फोटो लगाया और सीधा इज़राईल पर ठोका। मिज़ाईल तो फटा नही मगर उसामा की फोटो के नीचे अंग्रेज़ी मे लिखा थाः “I am in Syria, Catch me if you can” खुदा को गुस्सा तो बहुत आया पर किया करे? कहां कहां अपनी नज़र रखे? ईरान, ईराक, अफगान - अभी फिलिस्तीन को एक थप्पड लगाया तो पलट कर लेबनान को दिन मे सितारे दिखा दिए। खुदा सिर्फ उन्ही लोगों को पसंद करता है जो अमेरिका पर ईमान रखते हैं वोरना पाकिस्तान को नज़रे रेहमत से देखना खुदा को बिलकुल पसंद नहीं। मुशर्रफ हमेशा से कहते आरहे हैं कि मैं वरदी नही उतारूँगा, मगर उन्हें किया मालूम कि उनकी किस्मत मे कफन भी नही है, खुद पाकिस्तानी लोग हर दिन दुआ कर रहे हैं कि खुदा करे ज़ालिम मुशर्रफ को कफन भी नसीब न हो। सभी देशों की तरह आज भारत भी लेबनान के लिए अपनी तरफ से अफसोस भेजा। दूसरी तरफ सीरिया के राष्ट्रपति बषर अल असद ने अब बाथरूम भी अपने बेड के नीचे बनालिया है और उनका बेड कहां है खुदा को भी नही मालूम। लेबनान पर अचानक ईज़राईल की तोपबाज़ी से अमेरिका ने ये कहते होवे अपना मुंह छुपा लिया कि ये सब खुदा ने किया है जिसमे हमारा कोई हाथ नही, हमने तो बस खुदा से इतनी फ़रियाद की थी कि बेचारा इज़राईल इस वकत मुसीबत मे है उसकी मदद करे। खुदा तो खुदा है, वो जब चाहे किसी के भी कान खींच सकता है उधर फिलिस्तीन को आंख मार कर सुला दिया कि तुम्हें बाद मे देखेंगे क्योंकि अब लेबनान को जगाना है। — जारी
बाकी फिर कभी
July 15, 2006