पहला नशा
हम तो अपनी जगह खडे थे मगर आस-पास की सभी चीज़े घूम रही थीं। फिर लगा कि पैर भी डगमगाने लगे और धडाम से ज़मीन पर गिर पडे। यार दोसतों ने सहारा दिया और सोफे पर बिठाया। अजीब बेचैनी, पानी पीने को भी मन नही कर रहा, कोई सीधा बात करे तो उसे डांट कर कहते कि ज़बान संभाल के बात करो। फिर महसूस किया कि कुछ तो गड बड है हम शरीफ आदमी हैं और अचानक ऐसे अजीब दौरे परेशानी की बात है, इस से पहले कि हमारी आंख लग जाए – हम ने अपने फ़्लैट शारजाह जाने के लिए दुबारा खडे हुए तो दोसतों ने मना किया कि ऐसी हालत मे ना जऊ कल सवेरे चले जाना। इस हालत मे भी हमे याद आया कि कल शुक्रवार है और हमें कल एक घंटा पहले ड्यूटी पर जाना है यानी सुबह आठ बजे दोसतों को बताए बगैर हम फ़्लैट से बाहर निकले, लिफ्ट मे घुसते ही नीचे बैठ गए, कुछ देर बाद याद आया कि ग्रऊँड फलोर का बटन दबाया ही नही - बिलडिंग से बाहर निकल कर चौराहे पर लगी बडी सी घडी को डगमगाती आंखों से देखा तो रात के दो बज रहे थे। टैक्सी को इशारा किया तो कमबख्त हमें देखे बगैर निकल गया। ज़्यादा देर तक खडे रहने की हिम्मत ना रही, बैठने के लिए आस-पास नज़र दौडाई तो करीब ही एक टैक्सी खडी नज़र आई (हां वोह टैक्सी ही थी) ड्राईवर की इजाज़त के बगैर टैक्सी का दरवाज़ा ज़ोर से खोल कर अंदर बैठ गए तो ड्राईवर ने हमें गुस्से से घूरा और हमने हुकम दिया कि शहारजाह चलो। ड्राईवर हमारी हालत देख कर समझ गया कि कौन ऐसों के मूंह लगे। इसके बाद पता नही हम दुबई से किस तरह अपने फ़्लैट शहारजाह पहुंचे?
दुबई मे हमारे एक मित्र का जनम दिन था, पार्टी शार्टी का ऐलान किया। सब एक ही कम्पनी के थे और यहां UAE मे हम बेचलर्स को कभी कभी ही ऐसा मौका मिलता है कि सब मिल कर खुशी मनाएं वरना यहां किसी को भी अपने काम से हट कर फुरसत नही। और जब जनम दिन की पार्टी मे आने वाले सब एक ही कम्पनी के यार दोसत हों तो ज़बरदस्त हंगामा है। सबको मालूम है कि हम शरीफ आदमी पानी और जूस के सिवा कुछ नही पीते मगर कुछ शरीर मित्रों ने हमे औरेंज जूस मे वोडका मिला कर पिला दिया और ये दो दिन बाद पता चला जब सब दोस्त हमें देख कर हंस रहे थे।
12 comments August 10, 2006
