एक नई खबर चाहिए

August 12, 2006

कोकाकोला और पेप्सी ये दोनों कम्यनियाँ पूरी दुनिया को पिला रही हैं मगर मजाल है जो किसी ने उन्हें कुछ पिलाया हो? यहां तक कि देसी थंब्सअप भी उन्ही के हाथों की पी जारही है। चंद साल पहले कुछ मुसलिम देशों मे “मक्का कोला” बनाया गया और खूब चर्चा भी हुई कि उन अमेरिकन ड्रिंक्स की कमर तोडें। आज मक्का कोला कम्पनी खतम होते नज़र आती है, उसके ब्रांच्स सऔदी आरबिया, कुवैत, इमारात तक फैले हुए थे मगर अफसोस पेप्सी और कोकाकोला कम्पनियों ने मक्का कोला को कही भी टिकने नही दिया। “मक्का” मुसलमानों के लिए पवित्र शहर है, और सॉफ्ट ड्रिंक का नाम भी मक्का इस लिए रखा गया कि मुसलमान ये ड्रिंक पीकर उन अमेरिकन सॉफ्ट ड्रिंक्स का बैन करे। आज मक्का कोला कम्पनी वाले बैठ कर खुद कोकाकोला और पेप्सी पी रहे हैं।

हमारे भारत मे अजीबवगरीब तमाशे होते रहते हैं, और जनता ऐसी कि हर नई खबर का चर्चा खुद करते नही थकती, न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर भी आम जनता से पूछ कर खबरें बताते हैं और आखिर मे कहते हैं जैसे ये खुद खबर दे रहे हों –> केमरा मेन शुऐब के साथ दिल्ली से जितेन्द्र चौधरी कल तक चैनल के लिए। ये महान देश की महान जनता है जो सबकी खबर रखती है, अभी देखना चंद दिनों बाद शायद दोनों कम्पनियां अपने सॉफ्ट ड्रिंक्स की कीमतें कम करेंगी और हर कोई प्पसी और कोका पीते नज़र आऐंगे तब कोई और नई खबर की चर्चा चलेगी।

हम पे एक लतीफा याद आयाः
जब भारत यात्रा पर गए थे, घर के करीब दुकान से 12 रूपये देकर एक कोकाकोला का बोतल खरीदा और निकल पडे।
दुकानदार की आवाज़ आईः औईईई — कहां चले? बोतल – बोतल।
हमने जवाब दियाः हां – वोह तो है और पैसे भी अदा किए और अब किया?
दुकानदार और वहां खडे लोग हम पर हैरान कि 12 रूपये मे कोकाकोला के साथ बोतल भी ले जारहा है – कहां से आया ये?
अचानक हमे शर्मिंदगी का अहसास हुवा – अरररे ये दुबई नही हमारा भारत है। वहां दुबई मे तो एक दिरहम (12 रूपये) मे कोकाकोला के साथ कांच का बोतल भी फ्री है। और हमारे देश मे कोका पीने के बाद बोतल लिए बगैर दुकानदार जाने नही देता :D

Entry Filed under: खबर पर नज़र. .

6 Comments Add your own

  • 1. समीर लाल  |  August 13, 2006 at 2:07 am

    :)

  • 2. संजय बेंग&hellip  |  August 13, 2006 at 5:57 am

    पेट-जार की बोतलो में भी यह काला पानी उपलब्ध हैं. जिसे मजे से घर ले जा सकते हैं और बादमें बोतल को पुनः अन्य पेय भरने के लिए उपयोग में भी ला सकते हैं.
    आम के आम- गुठलीयों के दाम.

  • 3. जगदीश  |  August 14, 2006 at 11:03 am

    आपकी उर्दू चैनल वाली पोस्ट खुल नहीं रही और न ही टिप्पणी कर पा रहे हैं, कृप्या Slug बदल लें।

  • 4. SHUAIB  |  August 14, 2006 at 11:27 am

    जगदीश जी धन्यवाद आपका – ठीक करदिया है :)

  • 5. संजय बेंग&hellip  |  August 14, 2006 at 11:42 am

    नहीं हुआ हैं ठीक….

  • 6. SHUAIB  |  August 14, 2006 at 12:30 pm

    संजय बेंगाणी जी धन्यवाद – अजी अब तो ठीक ही है जी :) हम पहले से अनाडी हैं – ठीक (नही) को दुबारा ठीक कर दिया :)

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