दूरदर्शन उर्दू
हर किसी का मकसद होता है कि वोह जिनदगी मे कुछ करे या कुछ बने। हमारे राष्ट्रपति जनाब अबदुल कलाम को देश की सेवा करना था और वोह अपने मकसद मे कामयाब रहे। मुझे बचपन से ग्राफिक का शौक था उसमें डिप्लोमा किया और आज सुबह शाम सिर्फ ग्राफिक पर काम करता हूं। इसके अलावा एक खावाहिश और भी है कि अगर मेरे पास रुपया हो तो खुद का उर्दू टीवी चैनल ब्राडकॉस्ट करना है - पता नहीं ये अपनी खवाहिश कब पूरी होगी। ये बहुत खुशी की बात है कि आज अखिरकार भारत सरकार ने उर्दू चैनल शुरू करने का बाकाईदा ऐलान करदिया। जब मैं बंगलौर मे नौकरी कर रहा था तो मेरे हैदराबादी बॉस को भी उर्दू चैनल ब्राडकास्ट करने की सोची और तभी मैं ने खुशी और जोश के साथ मल्टीमीडिया मे भी डिप्लोमा करलिया। मगर स्पॉनसरों मे झगडा होगया कि ये इसलामी चैनल बनेगा क्योंकि भारत मे एक भी इसलामी चैनल नही है, और चंद दूसरे इसपॉनसरों ने कहा कि नही ये सिर्फ उर्दू चैनल होगा - और फिर वोह चैनल तो शुरू ना हुवा मगर मैं ने अपना मल्टीमीडिया का डिप्लोमा कम्पलीट करलिया और दिल मे ठान ली के जब हमारे पास रूपया आजाए तो उर्दू टीवी चैनल का अपना खवाब ज़रूर पूरा करेंगे। इस से पहले कि हम अपना टीवी चैनल शुरू करते भारत सरकार हमसे आगे निकल गई
अब तो हम सरकारी चैनल को ही अपना समझेंगे
5 comments August 14, 2006
