26 वर्ष पूरे हुए
आज पहली बार कहना पड रहा है कि अब मुझे भी ज़िन्दगी के 27 वर्षों का तजुर्बा है
और ऐसे खुशी के मौके पर अपने एक फज़ूल मित्र ने हमारे सर पर दो सफेद बाल ढूंड कर साबित करदिया के ये हमारे बुढापे की ओर पहला कदम है
खैर - अपने बुढापे की ओर बढते कदम का अफसोस नही, हर किसी को एक ना एक दिन बूढा होना ही है मगर खुशी की बात तो ये है कि अब सीना तान कर दुनिया से कहना है “हम भी ज़माने के 27 वर्ष देख चुके हैं”
रात बारह बजते ही हमेशा की तरह भारत और पोलैंड से sms की भरमार शेर व शायरी, लम्बी उम्र की दुआऐं उसके अलावा ई-मेल से ई-कार्डस् वगैरह। सवए हमारे बाकी बहुत से लोगों को खुशी हुई के हम 27 वर्ष के हो गए - अपने को कुछ ज़्यदा खुशी नही हुई क्योंकि पिछले वर्ष जो बहुत से काम करने थे वोह पूरे नही किए, उन कामों मे अपनी छोटी बेहन की शादी भी करवानी थी। खैर - पिछले वर्ष जो कुछ नही हुवा उसे अब जल्दी जल्दी निपटाना होगा (यानी अपना रात दिन एक बनाना है)
पिछले चार वर्षों से यहीं अपनी उम्र बढाई की रस्म (बर्थडे पार्टी) मनाई जा रही है - इस बार भी एक बढिया केक बनवा कर अपने फ्लैट मे अपने चंद मित्रों के बीच ज़ोरदार तालियों के साथ केक काट दिया
खुद कमरा सजाया, टेबुल कुर्सियों का इनतेज़ाम किया - अपनों से बिछडने का बहुत अफसोस हो रहा था - वोह भी क्या दिन थे के हमारे जन्मदिन के रोज़ अपनी दोनों बेहनें पूरे घर को सजाति संवर्ती और उस दिन अम्मी मेरे पसंद के सभी मज़ेदार खाने बनाते थे और फिर शाम को सब मिल कर मेरे केक लाने का इनतेज़ार करते
आज जब दोपहर को अम्मी से फोन पर बात हुई तो वोह भी उन दिनों को याद करके खूब रोई।
19 comments September 12, 2006
