फिर रमज़ान आया
हर वर्ष दुबई मे शॉपिंग फेसटिवल मनाया जाता है और शारजाह मे रमज़ान का फेसटिवल मनाने की रिवायत है मानो मुखतलिफ फेसटिवलों को इस देश के सात राष्ट्रों ने आपस मे बांट रखा है। कोई भी फेसटिवल हो मकसद एक ही है पैसा कमाना और दबा कर कमाना।
आज रमज़ान का पहला दिन है, यहां पूरे शारजह शहर को दुल्हन की तरह सजा दिया, जगह जगह मेले भी लगे हैं और हर मेले मे वही चैनीज़ आइटम्स, कपडे, अनोखे सिगार, सिगरेट, झूले झमके वगैरह वगैरह। सुबह से शाम तक पूरे UAE मे खाने की दुकानों होटलों वगैरह सब बंद रहते हैं - सभी मुसलमानों को रोज़ा रखने का हुकम है और गैर मुस्लिम लोग सिर्फ अपने घर पर ही खा सकते हैं। रमज़ान का पूरा महीना होने तक अगर कोई रास्ते मे सडकों, पार्कों आदी जगहों मे कुछ खाया पिया तो उसे पुलिस पकड ले जाती है फिर जुर्माना भी मांगती है या फिर छोटी मोटी सज़ा भुगतनी पडेगी। गैर मुसलिम अगर फैमली वाला हो तो खैर मगर बैचलर्स लोग जिन्हें खाना पकाना नही आता और वोह लोग जो सिर्फ होटलों से खाते हैं, उन बेचारों को मुसलमानों की तरह शाम तक भूका रह कर होटलों के खुलने का इनतेज़ार करना पडेगा।
8 comments September 23, 2006
