पाकिस्तान मे अंधेरा

September 25, 2006

अभी मुशर्रफ अमेरिका पहुंचे ही थे कि पाकिस्तान मे अंधेरा छा गया मानो जैसे मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति ही नही बल्कि उनके देश के रोशन चिराग भी हैं। कल रात जहां पाकिस्तान मे रमज़ान का पहला रोज़ा था, सभी पाकिस्तानियों ने अंधेरे की वजह से मुशर्रफ को लम्बी लम्बी गालियाँ देते हुए पहला रोज़ा पकडा। अंदर की बात ये है के अब पाकिस्तान को इमली चटाने के दिन करीब आए (शायद), अमेरिका ने हुकम दे दिया कि उसामा बिन लादिन की तलाश अब पाकिस्तान मे शुरू की जाए अगर वो ना भी मिले फिर भी तलाशे-जुसतजू जारी रखे ताकि इसी बहाने पाकिस्तान पर अमेरिका ने जो कुछ मेहरबानियाँ की थीं, अब वक्त आ चुका है कि पाकिस्तान से पाई पाई का हिसाब लें। और कल ही मुशर्रफ साहब ने न्यूयार्क मे अपना हेल्थ चैकअप भी करवा लिया - बताया जाता है कि वर्षों बाद उन्हों ने अपना ये चैकअप करवाया है। उधर थाईलैंड मे भी इस वक्त हालत कुछ वैसे ही है जैसे मुशर्रफ ने अपने देश मे कभी करवाया था। हमारी दुआ है कि खुदा ना करे थाईलैंड की हालत पाकिस्तान जैसी ना बने।

Entry Filed under: खबर पर नज़र. .

8 Comments Add your own

  • 1. meriduniya  |  September 25, 2006 at 1:11 pm

    कहते हैं ना “बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी”. पाकिस्तान का भी वही हाल होना हैं. दो पाटो के बीच पीस जाएगा.

  • 2. pankaj बेंगाणी  |  September 25, 2006 at 1:12 pm

    मुश जैसा नौंटकीबाज नही देखा… पर बन्दा अब तक पाकिस्तान को काबु किए हुए है…. जाने कब रूखशत होगा

  • 3. PRABHAT TANDON  |  September 26, 2006 at 12:03 pm

    ‘यह तो होप्ना ही था, एक मै और एक तू ,दोनो मिले इस तरह………’

  • 4. जगदीश भाटिया  |  September 26, 2006 at 1:13 pm

    उनको देख कर आजकल ये ख्याल आता है,
    बुझने से पहले जैसे दिया जोर से फड़फड़ाता है।
    ये गये तो कोई और इन जैसा आयेगा
    जैसा देश होगा वैसा ही नेता पायेगा।

  • 5. आशीष  |  September 27, 2006 at 3:25 am

    इतिहास गवाह है पाकिस्तान के किसी भी सैन्य शाशक का अंत दूखद ही रहा है।
    और लोकतांत्रीक ढन्ग से चुने गये शाशक हमेशा ही हटा दिये गये है।

    मुशर्रफ के दिन भर गये है, उनकी किताब उनके ताबूत मे आखरी कील साबित होगी। पाकिस्तान जैसे देश मे उसके शाशक का स्विकारना कि उसे अमरीका ने धमकी दी थी और वह झुक गया था, कोई सहन नही करेगा !

  • 6. अतुल  |  October 24, 2006 at 7:16 pm

    कुछ भी कहो मुशर्रफ के दिल में पाकिस्तान के लिये जो भावना है वैसी भावना हमारे किसी भी नेता के दिल में नहीं है :(

  • 7. मूषकर जी &hellip  |  November 5, 2006 at 5:14 pm

    [...] जवाब: ओये ! जब तुम्हारे घर में घंटों बिजली जाती है तो कोई कुछ नहीं कहता! बस एक आधा ब्लगर एक दो पोस्ट लिख देता है, हमरे यहां जब बिजली चली जती है तो तुम कहानियां बनाने लगते हो। [...]

  • 8. Shrish  |  November 7, 2006 at 10:58 am

    मैं अतुल जी से सहमत हूँ, जिस तरह मुशर्रफ पाकिस्तान के लिए कर रहे हैं, काश हमारे नेता भी भारत के लिए कुछ कर पाते।

    मुशर्रफ भारत के लिए विलेन सही पर पाकिस्तान के लिए हीरो ही है।

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