Archive for October 19th, 2006
छुट्टियों का चांद
ईद के लिए यहां दो दिन मिलने वाली छुट्टियों मे हम चंद दोस्त किराए की कारें ले कर शहर से दूर घूमने चले जाते हैं। इस बार हमारा रूम्मेट बिदप्पा (मैसूर से) ने एक सेकंड कार खरीद ली है, मगर वो हमेशा सिर्फ लडकियों को घुमाते रहता है। मैं ने उससे कह दिया इस बार ईद की छुट्टियों मे हमें अपनी कार मे घुमाने ले जाए शहर से कहीं दूर जहां शोर ना हो – वो बहुत मुश्किल से माना क्योंकि उसका प्लान दो दिन लडकियों के साथ मज़े करने का था। किराए की कारों से अच्छा है अपने दोस्त की कार हो और वो भी साथ हो तो घूमने मे बहुत मज़ा आता है।
वैसे शहर मे बहुत सारी घूमने की जगहें हैं मगर दिल और दिमाग को आराम के लिए शहर से दूर जाकर घूमना अच्छा है। यहां हम परदेसियों को वर्ष मे सिर्फ यही दो दिन मिलते हैं, वरना हर दिन वही साइकिल की तरह सुबह से शाम तक आँफिस फिर शाम को घर मे – वैसे सप्ताह मे एक दिन छुट्टी होती ही है जिसमे कपडे धोने और कुछ खरीदारी करने मे पूरा दिन लग जाता है। हमारे लिए ये दो दिन छुट्टी के गनीमत हैं, ऐसा महसूस होता है जैसे पूरे साल भर की थकान इन दो दिनों मे उतारली
यहां ईद मनाने के लिए चांद देखते हैं मगर ये हमारे लिए छुट्टियों का चांद है
दिवाली की मुबारकबाद
कल जब ये तीनों चिट्ठे गिरिराज जोशी, समीर जी और फुरसतिया जी को पढा तो कुछ भी समझ नही आया जैसे कोड वर्ड मे बात चीत हो रही है
अपना छोटा दिमाग है बडी बातें नहीं घुसतीं
सुबह दफ्तर मे कुछ काम करलेने के बाद नारद और चिट्ठाचर्चा को सलाम करता हूं जिसके बगैर जैसे पूरा दिन अधूरा है। मगर ये हिन्दी चिट्ठे जो ब्लॉगस्पाट पर हैं, मैं वो सब चिट्ठे पढ तो सकता हूं लेकिन मेरी मजबूरी है कि उन पर टिप्पणी लिख नही सकता सिर्फ वर्ड प्रेस डाट कॉम वाले चिट्ठों को टिप्पणी दे सकता हूं। जहां तक हो सका मैं ने बहुत सारे हिन्दी चिट्ठाकारों को दिवाली की मुबारकबाद दिया, फिर भी उन लोगों के लिए जिन का चिट्ठा ब्लॉगस्पाट पर है, मैं अपनी इस पोस्ट के से सभी हिन्दी चिट्ठाकारों को दिवाली की शुभकामनाएँ और मुबारकबाद पेश करता हूं।
16 comments October 19, 2006
