मूंह मीठा करें
November 10, 2006
नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है
और हां ……. लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज मज़ेदार चर्चा चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है …….. लड्डू बाद मे खाना – आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा
Entry Filed under: Hindi Animations, My Links, इनसे मिलो, खबर पर नज़र, टेक्नोलॉजी, टैम पास, तमाशा, तलाश, दुबई, बेंगलौर, ये ज़िनदगी. .
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1.
सागर चन्द&hellip | November 10, 2006 at 12:22 pm
मजा आ गया दुबई के लड्डु खाकर शुएब भाई। बहुत्मीठे है बिल्कुल आप ही की तरह।
2.
उन्मुक्त | November 10, 2006 at 4:53 pm
लार टपकने लगी।
3.
समीर लाल | November 11, 2006 at 1:21 am
अब लड्डू सेवन के बाद चर्चा का आनन्द और भी दूना हो गया. अब लगा कि परिवार में गंभीर चर्चा चल रही है.
4.
पंकज बेंग़&hellip | November 11, 2006 at 3:57 am
मूँह मे पानी आ गई भीडु .. ह्म्म्म्म्म्
5.
संजय बेंग&hellip | November 11, 2006 at 3:59 am
यार अगली बार गुलाब जामुन खिलाना, मुझे लड्डू थोड़े कम पसन्द है.
6.
SHUAIB | November 11, 2006 at 5:09 am
अरे यार दोस्तों ये लड्डू मेरी नई वैब साइट के लिए हैं – आप सबका धन्यवाद
7.
Amit | November 11, 2006 at 5:53 am
अरे सागर साहब, शुएब भाई ने कब कहा कि लड्डू दुबई के हैं?? दरअसल ईद पर किसी मित्र ने यहीं से भेजे थे, तो वो शुएब भाई अब खिला(दिखा) रहे हैं, अभी तक इसी कारण से बचा के रखे थे इसलिए ईद पर नहीं खिलाए!!
शुएब भाई, आपको नया ऑनलाईन घर मुबारक हो।
8.
SHUAIB | November 11, 2006 at 2:01 pm
आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद


@ अमीतजीः आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हैं
@ वाह संजय भाई वाह क्या याद दिलाया आपने भी कस्म से यार गुलाब जामुन खाये ज़माना होगया मुझे।
@ पंकज भाई शुक्र है कम से कम पानी तो आया
@ समीरजी, मुझे भी बहुत अच्छा लगा जब चिट्ठा चर्चा मे सब चर्चा कर रहे थे। आपका बहुत धन्यवाद।
@ उन्मुक्त भाई, ये सिर्फ राल टपकाने के लिए नही बल्कि अपनी नई वैबसाइट पर आने का न्युता भी है।
@ नाहर भाई, काहे माक करते हो यार ऐसे लड्डू दुबई मे नही मिलते।
9.
Amit | November 11, 2006 at 6:48 pm
लो कल्लो बात, शुएब बाबू आपको आज पता चला है?? यार हम तो अधिकतर मज़ाक ही करते हैं क्योंकि अपना मानना है कि मन का प्रसन्न रहना स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है!!
अब वो बात अलग है कि लोगों को कई बार हमारा मज़ाक मज़ाक नहीं लगता!!
10.
SHUAIB | November 12, 2006 at 2:44 pm
अमीत जीः
मुझे मालूम है आप किसी भी बात को बहुत अच्छी तरह बयां करते हैं और आपकी यही अदा मुझे पसंद है:)
11.
राज यादव | September 22, 2007 at 5:56 pm
सुहैब भाई ,सबसे पहले ,मुह मीठा कराने के लिए ,सुक्रिया ,स्वादिस्त मीठा था ..मजा आ गया ….अच्छे बिचार है …अच्छा लगा आपको पढना ….बधाई .हमारे ब्लोग पे भी आपका स्वागत है .
12.
maazlabib | April 18, 2008 at 3:47 am
शुएब भाई, तीन ब्लोग स्सिट्स घूम कर याहान तक पहुन्चा …….बहुत खुब दुबाई मे रह कर भी भारत मे रहने का अछ्छा तरीक़ा है ब्लोग लिख कर हम सब से बाते करना……..जारी रखो….
13.
Satish Saxena | July 13, 2008 at 2:52 pm
nayaa
नया आइडिया है, स्वागत करने खा, बधाई
14.
khetesh | September 5, 2008 at 9:03 am
must visit for hindi user:
हिन्दी इन्टरनेट (Hindi Internet):-
http://hi.wikipedia.org/wiki/हिन्दी_इन्टरनेट
15.
दिनेशराय &hellip | September 13, 2008 at 3:12 am
जन्मदिन मुबारक हो। लड़्डू की शक्ल अच्छी है पानी आ गया मुहँ में। भागता हूँ फ्रिज की तरफ।