Posts filed under 'इनसे मिलो'

ये खुदा है - 34

[  9/11 जुनियर ]

 खुदा की नींद हराम, अपना बिस्तर छोड फोरन महल से बाहर चीखते हुए भागा। आसमान पर कान फाडते अमेरिकी सेना के लडाकू जहाज़, खुदा ने झिल्लाते हुए कहाः लानत है, हमारी नींद खराब करदी। वो तो शुक्र है अमेरिका ने खुदा को तसल्ली दीः A high-rise building burns after a small aircraft crashed into the building in New York, October 11, 2006. (Tressa Octave/Reuters) ये सब आप ही की सिक्यूरिटी के लिए आए हैं। थंडा पानी पीने के बाद खुदा ने फरमायाः समझ मे नही आता आखिर ये लडाकू जहाज़ कान क्यों फाडते हैं? हम भी जगह जगह भूकम्प और भूचाल लाते हैं मगर मजाल है जिस से कोई आवाज़ निकले। अगर किसी को डराना है तो उसके हाथ पैर तोड देते या फिर उसे जान से ही मार डालते जैसे हम भूकम्प भेज कर सेकडों को एक साथ मारते हैं मगर किसी के कान नही फाडते। अमेरिका ने खुदा के मुंह पर थंडा पानी मारते हुए कहाः अब बस भी करें जब देखो आप अपनी ही तारीफ करते रहते हो जबकि आज फिर किसी ने 9/11 की याद ताज़ा करदी। अब पता लगाने की कोई जरूरत नही ये घटना किस ने की, इस प्लेन को भी ज़रूर उसामा ने ही भेजा है। बातों बातों मे अमेरिका ने खुदा को शर्म भी दिलाईः इतने वर्ष होगए आज तक उसामा को पकड ना सके और बातें बाडी बाडी करते हो जब देखो भूकम्प से डराते हो और खुद नहाने के लिए इन्डोनेशिया के समुद्र मे डुबकी लगाते हो और ऊपर से हमारी बदनामी कि अमेरिका ने क्यों नही बताया खुदा यहां इनडोनेशिया के समुद्र मे डुबकी लगाने वाला है। अमेरिका ने खुदा को समझायाः दुनिया इतनी बडी है और समुद्र दुनिया से बडा है आपको क्या खुजली है हमेशा से नहाने के लिए इनडोनेशिया के किनारे छलांग मारते हो और वहां के बेचारों को हर वर्ष एक नए सुनामी से मुलाकात करवाते हो? सरे आम यूं शर्मिन्दा होना, खुदा को बहुत गुस्सा आया, अमेरिका को तपाने (परेशान) के लिए उत्तर कोरिया को ईशारा दे दिया — जारी

बाकी फिर कभी


8 comments October 12, 2006

ये खुदा है - 33

[उत्तर कोरिया का मौसम]

पता नही क्यों, आज शाम की चाय के बाद खुदा को पान खाने की सूझी और वैसे भी अमेरिका मे कानूनी तौर पर पान खाना जुर्म है। खुदा अपना चमत्कार दिखाने ही वाला था अचानक मुशर्रफ ने आगे बढ कर खुदा की खिदमत मे पान पेश किया। पान चबाते खुदा ने बडे अफसोस के साथ कहना शुरू कियाः अब छोटे देश भी अपनी ताकत आज़माना चाहते हैं, उत्तर कोरिया पर हमारी लानत है जो अमेरिका को तंग करने पर तुला है। अगर आज के बाद कोई न्युकल्यिर धमाके टेस्ट करने की कोशिश करे, खुदा अमेरिका के साथ है और खबरदार जो कोई अमेरिका को तंग करे तो उस के लिए खुदा हाफिज़। करीब खडे मुशर्रफ पर पिचकारी मारते हुए खुदा ने गुस्से मे कहाः अफगान और ईराक को सुधारते हम कंगाल हो चुके, लेबनान मे हिज़बुल्लाह को ललकार कर अपनी टांग तुडवाली - अब समझ मे नही आता कि अपना लंगडा नाच ईरान मे दिखाए या उत्तर कोरिया मे? फिर एक बार पान की पिचकारी को मुशर्रफ पर मारते हुए खुदा ने कहाः हम दिल्लगी ही दिल्लगी मे मुशर्रफ को नचाते रहे और वो नाचते हुए डिस्को डांसर बन गए। बायें तरफ खडे अफगान राष्ट्रपति हामिद कर्ज़दार को देखेते हुए खुदा ने मुस्कुरा कर कहाः

पान खाने के बाद अब हमें नाच देखने को मन कर रहा है, मुशर्रफ और हामिद कर्ज़दार से बिनती है के आप दोनों मिलकर भांगडा डालें और खुदा को खुश करें। मेंगलौर के ताज़ा दंगा-फसाद पर खुदा ने हँसते हुए फरमायाः अच्छा है कि हम भारत मे नही बल्कि अमेरिका मे रहते हैं, अगर भारत मे होते तो वहां के अजीब लोग हमें अकीदत से चबा डालते। तभी एक भारती ने खुदा के नाम खत लिखाः हमें आपकी कोई ज़रूरत नही क्यों के हमारे देश मे हर क़िस्म के भगवान हैं और हम भारती एक-दूसरे के भगवानों को चबाते रहते हैं  जो कि हमारे कल्चर का एक हिस्सा बन चुका है – जारी

बाकी फिर कभी


12 comments October 8, 2006

ये खुदा है - 32

सुबह जब खुदा की आंख खुली, सीधा भारत की ओर मुडा और कहाः बडे अजीब किस्म के लोग हैं, जबकि अफज़ल लटकने को तैयार है और दूसरी तरफ चंद लोग उसके लटकाने के खिलाफ पूरे आनंद के साथ आवाज़ लगा रहे हैं जैसे वो बच गया तो बडा नेता बनेगा अगर लटका ही दिया तो दूसरे अफज़लों को मौका मिलेगा। तभी अफज़ल की बेगम खुदा से इलतिजा कर बैठीः बडी मेहरबानी अगर अप मेरे अफज़ल की जगह ले लें वैसे भी खुदा को मौत नही आती - अगर उसे लटका दिया तो मैं दुनिया मे अकेली अपने बच्चे के साथ और अफज़ल जन्नत मे हूरों के साथ जो मुझे बरदाश्त नही। खुदा ने अपनी बात जारी रखीः हर इनसान की ज़िन्दगी और मौत खुदा के हाथ मे है मगर आतंकवादीयों से खुदा खुद खौफ खाता है, क्योंकि वो यकीनन हमारे स्वर्ग तक मिज़ाइल से निशाना बना सकता है। हम ने मुजाहिदीन से जन्नत का वादा किया, मगर वो बेचारे हमेशा से दुनिया ही मे बुरी मौत मारे जाते हैं। माना कि किसी ज़िनदा इनसान को फांसी पर लटकाना अच्छी बात नही, करना तो ये था आतंकवादीयों को देखते ही गोली मार देते तो आज अफज़ल को लटकाने की ज़रूरत ही ना पडती। सुबह नाश्ते के बाद दुआ की मेहफिल सजाई जिसमे खुदा ने थाईलैंड के लिए दुआए खैर मांगी और पूरी दुआ थाई सेना पर छोडी फिर कहाः उम्मीद है थाईलैंड मे पाकिस्तान जैसी हालत ना बने। पीछे से टोनी बलैयर ने भी अपने लिए दुआए खैर मांगी तो खुदा ने जवाब दियाः अब कोई फाइदा नही क्योंकि तुमहारे लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। “लगे रहो मुन्ना भाई” को तीसरी बार देखते हुए खुदा मज़े लूट रहा था ऐन गांधीग्री पुस्तकों की सीन पर अमेरिका ने खुदा के कान भरेः मुशर्रफ की नई किताब पर टैक्स लगाना ज़रूरी है जिसमे खयाली पलाऊ की खयाली तरकीबों के सिवा कुछ भी नही। दूसरी तरफ इसाई साधू पोप बेंडिक्ट ने अपने हालिया लेक्चर पर नाराज़ मुसलिम नेताओं से खुलेआम मुलाकात पर खुल कर कहाः   इस मे नाराज़्गी कैसी? हम सब खयालों पर ईमान रखने वाले हैं, एक धर्म दूसरे धर्म के बारे मे जो खयाल रखता है वही खयाल को हम अपने लेक्चर मे ज़ुबानी कह गए गए। अप मुसलमान लोग हम ईसाई खयालों से सहमित नही तो हम कौनसा मुसलिम धर्म से सहमित रहें? बात खयाली है उसे खयालों मे ही रहने दें मगर यूं सडकों पर निकल आना, नारे बाज़ी करना ये सब अच्छी बात नही जिस से हमारे विचार आप मुस्लमानों के बारे मे और पक्का हो जाते हैं। पोप ने नारज़ मुसलमानों को दावत भी दीः आओ हम सब मिल कर अपने विचारों का सम्मेलन करलें, उम्मीद है हम सबके विचार जूठ साबित हों जिसका कोई सबूत भी नही - फिर आखिर मे हम सब मिलकर नए विचारों को जनम देंगे ताकि आने वाली पीढी को पूराने विचारों से पाक रखा जाए। जब लगे रहो मुन्ना भाई खतम हुई, खुदा ने फिर से चौथी बार देखने की ठानी तो अमेरिका ने याद दिलायाः मेहफिल लग चुकी है और लोग बाग अप के इनतेज़ार मे ऊंघ रहे हैं। मजलिस पहुंच कर खुदा ने दुपहर का भाषण पढना शुरू किया, अचानक पता नही खुदा को क्या सूझी पूरा भाषण घांधीग्री पर सुना दिया — जारी

बाकी फिर कभी


8 comments October 6, 2006

इनसे मिलो - 31

ये खुदा है

आज उसामा बिन लादिन ने अपना ताज़ा वीडियो डाइरेक्ट खुदा के नाम भेज दिया जिसमे वोह बंदूक पकडे अपनी रिवायती खबरदार उंगली को खुदा की तरफ नचाते हुए कहाः

सभी तारीफें अमेरिका के लिए जो निहायत ही गज़बनाक और दुनिया का चौकिदार है - पहले तो हम हर काम खुदा की तारीफ से शुरू करते थे, अब क्योंकि खुदा कि चाल चलन से साफ ज़ाहिर है के वोह भी अमेरिका का तरफदारी है - हम मुजाहिदीन सिर्फ इनतेज़ार ही करते रहे कि एक ना एक दिन खुदा हमारी मदद को ज़रूर आएग और वोह आया भी तो सीधा अमेरिका मे उतरा। वाह क्या खाख ज़िन्दगी पाई हमने? सोचा था अपने नेक कर्मों की वजह से खुदा खुश होकर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम देगा मगर वोह खुद जन्नत छोड यहां अमेरिका मे आ बसा - अफगान, ईराक, चैच्निया मे इनतेज़ार करते ही रहे कि खुदा बचाने ज़रूर आएग मगर खुदा ने अपनी औकात दिखलादी के वोह भी अमेरिका के आगे कुछ नहीं। ए दुनिया के दाता, ज़रा ये तो बता आखिर ये कैसा सिस्टम है तेरा? हम तेरी खातिर मरते-मारते हैं, दुनिया भर मे आतंक मचाते हैं ताकि जन्नत मे एक छोटा सा झोंपडा मिल जाए मगर तूने हमसे पूरे काम लिए फिर दुनिया ही मे खाख चटादी? हमारी समझ मे नही आ रहा कि हम किस के लिए काम कर रहे हैं? अब तू ही बता दे आखिर हमें कौनसा धर्म अपनाना होगा ताकि दूसरों की तरह हम भी सर उठाकर जिएं। माता पिता के वरसे मे जो धर्म मिला, मज़हबी पढाई हम पर फर्ज़ हुई और जब पढलिया तो ज़हन ऐस बन गया कि दूसरे धर्मों के लिए नफरत जगाली, लिबास तबदील किया, गले मे खुजली के बावजूद छाती तक डाढी छोडी फिर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम पाने के लिए जिहाद का पेशा अपना लिया इसके बावजूद आज भी हम दुनिया भर मे बेइज़्ज़त ठेहरे? दुनिया के सभी देश एक होकर हमें नाकों चने चबवा रहे हैं। हम तसव्वुर करते ही रहे कि खुदा की मदद करीब है मगर हमेशा मूंह की खानी पडी। दुनिया भर मे हमारे मुजाहिदीन को चुन चुन कर कुत्तों की तरह मारा जा रहा है। उन मरने वाले मुजाहिदीन को शहीद कहते हुए भी शर्म आती है क्योंकि उनके चेहरे पहचानने लायक भी नही छोडते। शहीदों को जन्नत नसीब है मगर खुदा खुद अमेरिका मे ऐश कर रहा है। किस्से कहानियों मे हमेशा जिहाद की विजय लिखा है और हमने जहां कहीं भी जिहाद किया हमेशा मुंह की खानी पडी। काश खुदा भी एक मुजाहिद होता, क्योंकि एक मुजाहिद ही दूसरे मुजाहिद का दर्द समझता है। हम इस वकत बहुत ही कनफ्युज़न का शिकार हैं, पहले तो अपने आप को बहुत बडा मुजाहिद समझा, चंद लोगों ने हौसला क्या बढाया कि खुद को वलीयों मे तस्वुर कर बैठे - हमें क्या मालूम था कि दुनिया वाले हमारे इस पवित्र पेशे को आतंकावी समझते हैं? कुछ समझ नही आरा कि आखिर हमारी ज़िन्दगी का मकसद क्या है? (उसामा के आंसू निकल पडे) हमे इनसानियत के पवित्र मुकाम से निकाल कर मज़हब मे फैंक दिया फिर हमने ऐसा कौनसा गुनाह किया कि जिहादी ग्रुह का लीडर बना दिया जहां रुसवाई, शर्मिन्दगी के बाद फिर आखिर मे बहुत बुरी मौत है - जब हमें मुजाहिद बना ही दिया तो फिर जानवर बनने मे देर नही - काश आप हमें जानवर ही बना देते या फिर इनसानों मे पैदा ही ना करते तो आज अपनी ऐसी बुरी हालत ना होती। (उसामा ने रुमाल से अपने आंसू पुंछे और खुदा की तरफ घूरते हुए कहा) इस वीडियो कैसेट के ज़रिए आज इकरार करता हूं, जिहादी नौकरी छोड कर क्म्प्यूटर इन्जीनियर बनना चाहता हूं और अपनी बाकी ज़िन्दगी इनसानों की तरह जीना चाहता हूं।


1 comment September 9, 2006

ये क्या बकवास है?

दुनिया भर की खबरें और हाल चाल को ध्यान मे रखते हुए “खुदा से मिलो” सिरीज़ लिखना शुरू किया और अपने लेख का करदार खुदा को बनाया - वोह इसलिए के खुदा किसी की जागीर नही - खुदा और भगवान दोनों एक नाम हैं - खुदा का शब्द इसलिए इस्तेमाल करता हूं के ये लेख पहले उर्दू मे लिखना शुरू किया था, अब हिन्दी मे भगवान कि बजाए खुदा का ही नाम इस्तेमाल करता हूं। एक खास बात ये है के धर्म से बेज़ारगी और वर्षों से मीडिया मे नौकरी का तजुर्बा की वजह से इन सिरीज़ मे और कडुवापन डालता हूं यानी सीधे शब्दों मे अपनी भडास निकालता हूं। और इन सिरीज़ मे ऐसी वैसी बातें कह जाता हूं के पढने वालों को बहुत कडुवी लगती हैं या फिर बहुत बडी बकवास लगती है। ये सिरीज़ सिर्फ अपना ज़ाती खयाल है ना के किसी को बुरा भला कहने के लिए - बस दुनिया भर की ताज़ा खबर देख कर जो समझ मे आता है उसे  इन सिरीज़ मे लिखता हूं और ये तो अपना ब्लॉग है अपने दिल की बात भी यहीं लिखनी है। इन लेखों मे खुदा को गाली लिखूं या उसकी मां बेहन एक करूं क्योंकि खुदा (भगवान) किसी एक का नही बल्कि वोह हर किसी का है - खास तौर पर इन सिरीज़ मे अपना अंदाज़ ऐसा है के दिल खोल कर अपनी भडास निकालता हूं।

खुदा से मिलो टाइटल और लेख हैरानी की बात है पर उसका मतलब ये नही के इन सिरीज़ मे खुदा का मतलब कोई आसमानी खुदा है? अपनी सिरीज़ मे उस शक्ति को खुदा बनाया है जो ताकतवर देशों के पीछे कारफरमा है। क्योंकि इस वकत अमेरिका सुपरपावर बनने की कोशिश मे है, बाकी देशों मे अपना सिक्का चलाना चाहता है - और ऐसे वकत खुदा दुनिया देखने आया और अमेरिका की रौनक देख कर उसीका हो गया और पीछे रह कर अमेरिका की हर मुमकिन मदद कर रहा है —– ये सिर्फ “खुदा से मिलो” सिरीज़ का खयाल है ना कि सच मुच ऐसा है। और लिखने का अंदाज़ ऐसा के पढने वाले अगर समझें तो हैरान हों और ना समझे तो परेशान हो कि ये क्या बकवास है? :)
सुन रहे हो अमिताभ त्रिपाठी जी


4 comments August 31, 2006

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