अभी मुशर्रफ अमेरिका पहुंचे ही थे कि पाकिस्तान मे अंधेरा छा गया मानो जैसे मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति ही नही बल्कि उनके देश के रोशन चिराग भी हैं। कल रात जहां पाकिस्तान मे रमज़ान का पहला रोज़ा था, सभी पाकिस्तानियों ने अंधेरे की वजह से मुशर्रफ को लम्बी लम्बी गालियाँ देते हुए पहला रोज़ा पकडा। अंदर की बात ये है के अब पाकिस्तान को इमली चटाने के दिन करीब आए (शायद), अमेरिका ने हुकम दे दिया कि उसामा बिन लादिन की तलाश अब पाकिस्तान मे शुरू की जाए अगर वो ना भी मिले फिर भी तलाशे-जुसतजू जारी रखे ताकि इसी बहाने पाकिस्तान पर अमेरिका ने जो कुछ मेहरबानियाँ की थीं, अब वक्त आ चुका है कि पाकिस्तान से पाई पाई का हिसाब लें। और कल ही मुशर्रफ साहब ने न्यूयार्क मे अपना हेल्थ चैकअप भी करवा लिया - बताया जाता है कि वर्षों बाद उन्हों ने अपना ये चैकअप करवाया है। उधर थाईलैंड मे भी इस वक्त हालत कुछ वैसे ही है जैसे मुशर्रफ ने अपने देश मे कभी करवाया था। हमारी दुआ है कि खुदा ना करे थाईलैंड की हालत पाकिस्तान जैसी ना बने।
September 25, 2006
“वनदे मातरम्” के सौ साल पूरे होने पर कल चंदीगढ (पंजाब) के चंद मुस्लमानों ने बीच सडक पे आकर वनदे मातरम् का गीत गाया

(ये तसवीर हैदराबाद के उर्दू अखबार ऐतिमाद मे आज छपी है)
नोटः ये अखबार इन्टरनेट पर गिफ फॉरमेट मे पबलिश होता है, पता नही वोह तसवीर अब तक रहेगी या नही।
September 7, 2006
हर किसी का मकसद होता है कि वोह जिनदगी मे कुछ करे या कुछ बने। हमारे राष्ट्रपति जनाब अबदुल कलाम को देश की सेवा करना था और वोह अपने मकसद मे कामयाब रहे। मुझे बचपन से ग्राफिक का शौक था उसमें डिप्लोमा किया और आज सुबह शाम सिर्फ ग्राफिक पर काम करता हूं। इसके अलावा एक खावाहिश और भी है कि अगर मेरे पास रुपया हो तो खुद का उर्दू टीवी चैनल ब्राडकॉस्ट करना है - पता नहीं ये अपनी खवाहिश कब पूरी होगी। ये बहुत खुशी की बात है कि आज अखिरकार भारत सरकार ने उर्दू चैनल शुरू करने का बाकाईदा ऐलान करदिया। जब मैं बंगलौर मे नौकरी कर रहा था तो मेरे हैदराबादी बॉस को भी उर्दू चैनल ब्राडकास्ट करने की सोची और तभी मैं ने खुशी और जोश के साथ मल्टीमीडिया मे भी डिप्लोमा करलिया। मगर स्पॉनसरों मे झगडा होगया कि ये इसलामी चैनल बनेगा क्योंकि भारत मे एक भी इसलामी चैनल नही है, और चंद दूसरे इसपॉनसरों ने कहा कि नही ये सिर्फ उर्दू चैनल होगा - और फिर वोह चैनल तो शुरू ना हुवा मगर मैं ने अपना मल्टीमीडिया का डिप्लोमा कम्पलीट करलिया और दिल मे ठान ली के जब हमारे पास रूपया आजाए तो उर्दू टीवी चैनल का अपना खवाब ज़रूर पूरा करेंगे। इस से पहले कि हम अपना टीवी चैनल शुरू करते भारत सरकार हमसे आगे निकल गई
अब तो हम सरकारी चैनल को ही अपना समझेंगे
August 14, 2006