Posts filed under 'टैम पास'

मूंह मीठा करें

नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है :)

और हां ……. लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज मज़ेदार चर्चा चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है …….. लड्डू बाद मे खाना  - आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा

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12 comments November 10, 2006

मां, भूक लगी है

ये शब्द सुनते ही मां की ममता तडप उठती है वो किचन की ओर डोडती है और कोशिश करती है कि जल्दी से उसके लाडले के लिए खाना गरम करे। हम जब स्कूल से वापस घर आते हैं किताबें एक तरफ डाल कर आराम से सोफे पर बैठ कर चिल्लाते हैं “मां भूक लगी है जल्दी से खाना दे” मां झट से खडी होजाती है भले वो बीमार हो, और प्यार से कहती है “हाथ मुंह धोले बेटा अभी खाना लगाती हूं।”

यहां परदेस में मां बहुत याद आती है और साथ में अपना बचपन भी।

बरसात में भीगो तो डांटना फिर तोलिये से हमारा सर पोंछना, सुबह सवेरे हमें जगाना ज़िद करो तो कमबल खींच लेना। बीमारी में ज़बरदसती हमारे मुंह में दवाई ठोसना और आधी रात को उठ कर हमारी कमबल सीधी करना। जल्दी जल्दी नाश्ता बनाए साथ ही पलट कर बाथ रूम में हमारी पीठ पर साबुन भी मलदे। स्कूल से घर देर से लोटें तो दरवाज़े पर हमारी राह देखते परेशान खडी रहना। शरारत पर पिटाई करना और अच्छे काम करो तो हमारे सर पर प्यार से हाथ फेरना। पिता पिटाई करे तो मां हमें सीने से लगा लेती है और जब वो खुद हमें पीटती है गुस्सा थनडा होने पर दुबारा हमें सीने से लगा लेती है। पिता गुस्से में आकर औलाद को घर से निकाल दे पर मां अपने बच्चों की खुशी के लिए खुद घर छोड देती है। बाप के कतल के एलज़ाम में कानून बेटे को सज़ा देता है पर मां अपना सुहाग उजाडने वाले बेटे को माफ करदेती है। उसके बच्चों का सुख अपना सुख, उसके बच्चों का दर्द अपना दर्द, उसके बच्चों की परेशानी अपनी परेशानी और खुद अपना दुख भुलाने के लिए कोने बैठ कर रोती है। वो अपने बच्चों को खाना खिलाने तक चैन से नहीं बैठती, लोग कहते हैं मां भगवान का रूप है लेकिन मैं कहता हूं मां ही भगवान है।


5 comments June 6, 2006

लककी नम्बर

हमारी कम्पनी हर दो महीने में एक बार फैशन शो करवाती है क्योंकि इसके बहुत सारे बरान्ड्स हैं जिसकी पबलिसिटी करवाना इसका फर्ज़ है और हम तो परदे के पीछे काम करने वाले लोग हैं।
एक बार मुझे कुछ सामान लेकर परदे के पीछे पहुंचना था थोडी सी देर हो गई तो अपनी कम्पनी से एक एन्ट्री पास उठालिया क्योंकि फैशन शो फाई स्टार होटल में था। ऐसे फैशन शोज़ पर दूसरी बहुत सारी कम्पनियाँ स्पॉनसर्स भी होती हैं। फैशन शो के हाल में घुसने से पहले मैं ने अपना पास दिखाया तो मुझे एक परची दी के अपना नाम, पता और फोन नम्बर भरती करके इस बक्से में डाल दो, तो मैं ने वैसा ही किया।

सिर्फ फैशन शो के हॉल में ही नहीं बल्कि परदे के पीछे भी एक कयामत मची हुई रहती है जहां पर मॉडल्स को इशतेहारों के साथ सजाना पडता है जिसके लिए अलग लोग होते हैं यानी हमारी कम्पनी के ऊंचे पोस्ट वाले वगेरा। रात साढे बारह बजे फैशन शो कतम हुवा और फिर लककी नम्बर्स का ऐलान हुवा, एक एक परची खोल कर नाम पुकारा और तोहफे बांटे। और ऐसा भी वकत आया जब मेरा नाम स्टेज पर पुकारा जाने लगा, दुनिया में मेरे नाम वाला मैं अकेला तो नहीं शुऐब अखतर भी तो है। दुबारा नाम के साथ जब मेरा मोबाईल नम्बर भी पुकारा तो मेरे होश उढ गऐ क्योंकि वहां तोहफे बांटने वाला कोई और नहीं हमारा ही बॉस था। तोहफे तो बाहर से आने वालों यानी विज़ीटर्स लोगों के लिए थे जो इस फैशन शो पर कुछ ना कुछ खर्च भी किया था। चंद शरीर मित्रों ने मुझे पकड कर स्टेज पर ला छोडा जहां माईक पर मेरा नाम अब तक तीन बार लिया जाचुका था। बॉस ने मुझे देखा और दांत पीसते होवे तोहफा मेरे हाथों पर ज़ोर से रखा और अपनी गरदन हिलाई जैसे कह रहे हों “देखलूंगा” फिर पूरे हॉल में ज़बरदस्त तालियों की आवाज़ गूँजी।

इस बात को ज़माना हुवा, मैं ने अपने बॉस को एक बार बताया भी था कि मुझे ये हरगिज़ यकीन नहीं था कि परची लिख कर डालने पर मेरा ही नाम लककी साबित होगा। और आज जब भी बॉस मुझे अपने केबिन में बुलाता है कुछ काम देने के लिए तो मेरी तरफ देखते हुवे अपने दांत ज़रूर पीसता है।


6 comments May 30, 2006

डरना फालतू है

हर दिन ईरान को आंख मारते हुवे अमेरिका लगातार सवाब पा रहा है जबकि वो अच्छी तरह जानता है कहीं कहीं आंख मारने पर मुँह की खाने के साथ जूते भी खाने पडते हैं।

पिछले चंद दिनों में तूफाना कि वजा से चैना की चीखें निकल पडीं अब वो खुश है कि इस वकत तूफाना भारत की ओर बढ रहा है।

सैरिया के राष्टरपति बशर अल आसद पिछले छः माह से ज़मीन पर अपना माथा टिकाए पडे हैं और खुदा को याद करने कि बजाए अमेरिका को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं, वो समझाने लगे के अमेरिका से जान छूटी जबकि वो अच्छी तरह जानते हैं कि ईरान से वापसी पर अमेरिका सैरिया भी आ सकता है।

उधर लिबया के चिकने राष्टरपति जनरल गदाफी जान चुके हैं कि अमेरिका कि गुलामी के बगेर कोई चारा नहीं। फिलहाल वो रात दिन अमेरिका की इबादत में लगे हैं क्योंकि पिछले पंद्रह वर्षों से अमेरिका ने इन्हें नाकों चने चबवाए थे और आज अमेरिका के आगे घुटने टिकाने के बाद उन्हें महसूस हुवा कि वो सांस ले सकते हैं।

ईधर पडोसी खुददार नेता जनरल मुशर्रफ बार बार अपनी घडी देखते हुवे खिडकियों से खुदा को तलाश कर रहे हैं जबकि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि खुदा इस वकत अमेरिका का मेहमान है। दूसरी तरफ दोनों भाई-बहन मियाँ नवाज़ शरीफ और बेनज़ीर भट्टू पाकिस्तान पहुंच रहे हैं ताकि मुशर्रफ का आख़िरी कार्यक्रम अपनी आंखों से देख सकें।

अमेरिकी ऊंट यानी अफगान के राष्टरपति हामिद कर्जदार अपने बिछडे भाईयों से मिलने रोते हुवे दुबाई पहुंचे इस उम्मीद के साथ के अफगानी सदा सुहागन रह सकें। अते ही अपने अरब भाईयों के कन्धे पर सर रख कर खूब रोया और बताया कि किस तरह अमेरिका को पूजने पर आज अफगान पल फूल रहा है। अरब भाईयों ने दिलासा दिया के अमेरिका को सिर्फ तुम नहीं हम भी पूजते हैं और इसमें कौनसी शर्म की बात है और कौन नहीं चाहता कि वो खुल कर सांस ले? अरब भाईयों ने वादा भी किया के अब पहले से ज़्यादा अफगान को दान भेजेंगे और साथ में लगान भी हासिल करेंगे। मौका पाकर अफगानी के राष्टरपति ने भारत की शिकायत कर डाली वो वादे बहुत करता है पर ज़्यादा कुछ नहीं भेजता।

ईसाइ बिरादरी का Davinci Code पर गुस्सा फिल्म बनाने वालों को बडा अजीब लगा, अपने ही लोग काटने को आते हैं। भाई नया ज़माना है और अभी कब तक पुराने किस्सों को याद करते रहोगे। कम से कम फिल्मों को तो मनोरंजन की तरह देख लो भले इसमें ईसा, खुदा और शिव तीनों एक साथ हों।

बॉलीवुड की खूबसूरत बला ऐश्वर्या राय पहले से मशहूर थीं पर अब क्या वजा है कि अपनी मौत की झूठी खबर फैला कर और ज़्यादा मशहूरी चाहती हैं। भले ये झूठी खबर किसी और ने फैलाई हो पर फैदा तो ऐश को ही हुवा। मौत की झूठी खबर सुनते ही उनके चाहने वाले दीवानों ने चैन से सांस लिया इस उम्मीद से कि उनकी जगह कोई दूसरी खूबसूरत बला आएगी।

राम गोपाल वर्मा जो सबको ज़बरदस्ती डराने निकले थे, अब शायद वो दुबारा डराने और खौफ ज़्दा करने की कोशिश न कर सकें। माना कि डरना मना है में थोडा डराने कि कोशिश की पर अब उनकी नई फिल्म डरना ज़रूरी है ने साबित कर दिया कि “डरना फालतू है”।


3 comments May 26, 2006

ज़रूरत है एक पत्नी की

नाम मुजीब, उम्र 32 और थोडा सा टक्ला। यहां अपने प्रोडक्शन डिपार्टमंट में इसका पोस्ट आँफिस बोई है फिलहाल Tie और Jeans प्रोडक्शन में शामिल हो गया, तनखा उवर टाईम मिला कर 25 हज़ार इनडियन लेता है, दिल का बहुत अच्छा है पर हमेशा चिड चिड करता रहता है। ये हे तो बहुत ही कनजूस पर इससे दूसरों का दर्द केखा नहीं जाता अगर कोई कर्ज़ पूछे तो आंख मूंद कर दस-पंद्रह हज़ार यों ही दे देता है और अगर कुछ ज़यादा रहम आजाए तो पांच हज़ार तक दान देने को तैयार है। पांच वर्ष तक वो सौदी अरब में नौकरी किया और पिछले तीन वर्षों से यहां दुबाई में अपने ही कम्पनी में नौकरी कर रहा है। सौदी अरब की कमाई से बेंगलौर में अपना एक मकान भी बनवालिया और बहुत ही मुशकिलों से अपनी बहनों की शादियाँ भी करवादी। इसको भारत से यहां बहुत सारे रिश्ते आए पता नहीं इस ने रिजेक्ट किए या वहां से रिजेक्ट हुवे पर वो अपनी शादी को लेकर हमेशा परेशान रहता है और ऊपर से ढलती उम्र। कहता है अगर इस वर्ष में शादी नहीं होई तो वो दुबाई के किसी कोठे पर चला जाएगा क्योंकि अब बरदाश्त नहीं करसकता। वो यहां कम्पनी के हर एक डिपार्टमंट्स में जाकर खुजली करता है मैनेजरों को भी छेडता है सुबह-शाम सबको छेडता है पर जब कोई उसे छेडे या उसका मज़ाक उडाए तो उससे बरदाश्त नहीं होता और दो दिन तक किसी से बात नहीं करता फिर तीसरे दिन नरमल हो कर सबसे मिलजाता है। वो हर हफ्ते अपने बहुत सारे फोटो खिंचवा कर भारत में अपनी बहनों को भेजता है कि उसके लिए कोई लडकी देखें। उसकी बहनें भी बेचारियाँ ढूंड ढुंड कर अब तक दो दर्जन लडकियों के फोटो और उनके प्रोफाईल भेजे और आज तक वही सिलसिला चल रहा है। मुजीब चिडचिडा है, कनजूस है, हर दिन सबसे हंसी-मज़ाक और लडाई झगडा करता है पर वो दिल का बहुत अच्छा इनसान है जिसकी मैं गारन्टी देता हूं। है कोई लडकी जो मुजीब को अपना कर उसे सुधारे? धन्यवाद
(दहेज लेना और देना पाप है)


6 comments May 23, 2006

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