Posts filed under 'दुबई'

मूंह मीठा करें

नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है :)

और हां ……. लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज मज़ेदार चर्चा चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है …….. लड्डू बाद मे खाना  - आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा

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12 comments November 10, 2006

ये भारत है जनाब !!!

क्या अजीब देश है हमारा, यहां कभी त्योहार खतम होने का नाम ही नही लेते कभी दीपावली की खरीदारी तो कभी रमज़ान की गहमा गहमी, कभी दशहरा तो कभी दुर्ग पूजा। पिछले चंद महीनों मे त्योहारों का जैसे एक सिलसिला चल रहा है। पहले तो पूरे भारत मे दशहरा की धूम धाम थी और लोगों ने रावन को जला कर चैन का सांस लिया ही था कि दिपावली और रमज़ान की तैयारियाँ और शुरू होगई।

रात के बारह बजते ही जहां पूरी दुनिया सोजाती है लेकिन इस वक्त रमज़ान और दिपावली के मौके पर पूरे भारत मे सवेरा हो जाता है - लोगों की चहल पहल की वजह से बाज़ारों मे रौनक लग जाती है। इस बार दिपावली के साथ रमज़ान का भी समाँ था, पूरे बाज़ार खरीदारी के लिए खचाखच भरे हुए, भारत मे इन त्योहारों के मौके पर कौन हिन्दू और कौन मुसलमान पहचानना मुश्किल है क्योंकि सभी भारतीयों का एक-दूसरे के त्योहारों मे आना-जाना और मुबारकबादी देना ज़रूरी है और तो और एक-दूसरे के घरों मे खाना भी खाते हैं और ये नज़ारा चंद नेता लोगों से हज़म नही होता, जैसे ही त्योहारों का मौसम खतम हुआ फिर दंगा फसाद शुरू करवा देते हैं - वाह क्या कल्चर है हमारा!

भारत कोई ऐसा वैसा देश नही जहां हिन्दू-मुसलमानों के बीच सिर्फ दंगे ही होते हैं - भारत के हिन्दू और मुसलमान अपस मे लडते ज़रूर हैं मगर एक दूसरे के बगैर रह भी नही सकते। वैसे तो मैं सिर्फ नाम का मुसलमान हूं और हर दिन मुसलमानों मे उठता बैठता हूं लेकिन अपने देश के कल्चर को ही अपना धर्म और भारत को अपनी मां सम्मान मानता हूं। मैं ने हमेशा से हिन्दू को हिन्दू नहीं बल्कि अपना भाई माना है हालांकि दंगों के वक्त अपने हिन्दू भाईयों से मार भी खा चुका हूं। खैर दंगे फसाद के मौके पर कौन क्या है दिखाई नही देता और ये दंगा फसाद तो हमारे देश मे रोज़ का मामूल है, फसाद किसी भी टाइप का हो मगर भुगतने वाला कोई, पकडा जाने वाला कोई, मरने वाला कोई लेकिन फसाद मचाने वाला आज़ाद - नेता लोग को कौन पकडे? जबकि पकडने,  मारने और फसाद मचाने का आर्डर तो वही देते हैं।

यहां दुबई मे कहने को बहुत सारे दोस्त हैं मगर अपना जो सच्चा दोस्त है वो एक हिन्दू है, ज़रूरतों पर काम आने वाला, खुशी और दुःख मे साथ देने वाला हालांकि वो अभी तक मुझे मुसलमान ही समझता है फिर भी अपनी सच्ची दोस्ती निभाता है। हम पिछले चार वर्षों से साथ हैं लेकिन आज तक उस ने मुझ से ये नही पूछा कि दूसरे मुसलमानों की तरह तू नमाज़ क्यों नही पढता? जबकि मैं ने उस से पूछ डाला तू पूजा पाठ क्यों नही करता? उसने जवाब दियाः “हालांकि मेरे माता-पिता हिन्दू हैं और पूजा भी करते हैं लेकिन जब से मैं ने दुनिया देखा धर्म पर से विश्वास उठ गया। ये सारे लोग झूठे हैं जो सुबह शाम राम अल्लाह का नाम लेते हैं और छुप कर गलत काम भी करते हैं लेकिन मैं राम अल्लाह का नाम नही लेता सिर्फ अपने दिल की सुनता हूं जो बुरा लगे वो बुरा और जो अच्छा लगे वो अच्छा।” अपने इस दोस्त के विचार जान कर मुझे बहुत खुशी हुई, पहली बार मुझे अपने विचारों जैसा अपने ही देश का ये मित्र मिला, मैं ने अपनी किस्मत का शुक्र अदा किया। आज अपने देश मे ऐसे बहुत सारे नौजवान हैं जो अपने धर्म मे पाबंदियों की वजह से तंग आचुके वो खुल कर जीना चाहते हैं लेकिन अपने माता-पिता की इज़्ज़त के लिए आवाज़ नही उठाते। ऐसे आज़ाद विचार वाले भी अपने मां बाप से डरते हैं और उनकी इज़्ज़त करते हैं, ऐसा प्यारा परिवार भारत के अलावा और कहां मिलेगा? ये कैसा अजीब देश है हमारा, जैसा भी हो वो हमें प्यारा।

इस लेख मे कुछ खास बात नही है, लेकिन ये लेख अपने इस मित्र के नाम लिख रहा हूं जो चार वर्ष साथ रहने के बाद उसके विचारों को पहली बार जान कर मुझे सच्ची खुशी मिली।


21 comments October 27, 2006

दिन मे प्लेन गिनना

हमारी छत के ऊपर बिलकुल करीब से हर 3 मिनट पर हर देश का हवाई जहाज़ उतरता है वो इस लिए के एरपोर्ट बिलकुल पास मे है। और हर पांचवें प्लेन की आवाज़ इतनी भयानक होती है जैसे ये अपने घर पर ही उतरे गा। कल शाम को बाहर कहीं जाने के लिए गेट खोला ही था कि नज़रों के बिलकुल सामने ऐर-इन्डिया कान फाडते हुए आया। पहले तो एक पल के लिए दिल मे खुशी की लहर दौड़ पडी क्योंकि विदेश मे अपने देश का हवाई जहाज़ आंखों के सामने था - जब वो बहुत ही नीचे यानी अपने सर पर ज़ोरदार आवाज़ से आया तो लगा कि ये अपने सर पर यकीनन गिरने ही वाला है। दिन भर यहां से दर्जनों प्लेन उतरते हैं और एक ही तरीके से सीधा उतर हैं मगर ये हमारा  ऐर-इन्डिया कुछ ज़्यादा ही नीचे से उतरा - फिर खयाल आया आखिर अपने ही देश का प्लेन है, कैसे भी उतरे उसकी मर्ज़ी और शायद उसके पाइलट सरदारजी होंगे जो सबसे अलग ही उतर रहे थे।

पिछले सप्ताह हम सब लोग शारजाह छोड दुबई चले आए - हर दिन शारजाह से दुबई आते-जाते थक चुके थे। हमारी कम्पनी ने हम लोगों का Accommodation जो पिछले चार वर्षों से खूबसूरत शहर शारजाह मे था अब दुबई मे शिफ्ट कर दिया और वो भी शहर से दूर ऐरपोर्ट के पीछे जहां बस और टैक्सी भी नही, एकदम बडी बडी सडकें, दूर दूर तक होटल और खने पीने की दुकानें तक नही - हर तरफ बडे बडे आलिशान Villas यहां सब अमीर लोग रहते हैं और इनके बीच मे हम बेचारों को डाल दिया। ना साइबर केफे है ना रेस्टुरंट। हमारे एक मित्र जो अपनी फेम्ली के साथ शारजाह ही मे रहते हैं, उन्हों ने मुझ से मज़ाक मे पूछाः जब वहां कुछ नही तो शाम को आफिस से आकर घर पर क्या करते हो? मैं ने जवाब दियाः हवाई जहाज़ गिनते हैं, कौनसे देश का कितवां प्लेन है।


12 comments October 11, 2006

फिर रमज़ान आया

हर वर्ष दुबई मे शॉपिंग फेसटिवल मनाया जाता है और शारजाह मे रमज़ान का फेसटिवल मनाने की रिवायत है मानो मुखतलिफ फेसटिवलों को इस देश के सात राष्ट्रों ने आपस मे बांट रखा है। कोई भी फेसटिवल हो मकसद एक ही है पैसा कमाना और दबा कर कमाना।

आज रमज़ान का पहला दिन है, यहां पूरे शारजह शहर को दुल्हन की तरह सजा दिया, जगह जगह मेले भी लगे हैं और हर मेले मे वही चैनीज़ आइटम्स, कपडे, अनोखे सिगार, सिगरेट, झूले झमके वगैरह वगैरह। सुबह से शाम तक पूरे UAE मे खाने की दुकानों होटलों वगैरह सब बंद रहते हैं - सभी मुसलमानों को रोज़ा रखने का हुकम है और गैर मुस्लिम लोग सिर्फ अपने घर पर ही खा सकते हैं। रमज़ान का पूरा महीना होने तक अगर कोई रास्ते मे सडकों, पार्कों आदी जगहों मे कुछ खाया पिया तो उसे पुलिस पकड ले जाती है फिर जुर्माना भी मांगती है या फिर छोटी मोटी सज़ा भुगतनी पडेगी। गैर मुसलिम अगर फैमली वाला हो तो खैर मगर बैचलर्स लोग जिन्हें खाना पकाना नही आता और वोह लोग जो सिर्फ होटलों से खाते हैं, उन बेचारों को मुसलमानों की तरह शाम तक भूका रह कर होटलों के खुलने का इनतेज़ार करना पडेगा।


8 comments September 23, 2006

भारत का उलटा तिरंगा

गलती किसकी?

आज भारत के स्वतंत्रता दिवस के शुभ मौके पर दुबई से छपने वाले अंग्रेज़ी अखबार Gulf News के SPECIAL REPORT (मेगज़ीन) के 20 वें पन्ने पर छपा Thomas Cook का ऐड देखें जिस पर भारत का तिरंगा उलटा छापा है। कॉपी अटाच की होई है

तसवीर यहां पर  अटाच की है

ये बात दिल्ली तक जाए। सब भारतियों से गुज़ारिश है के इसका चर्चा हर जगाह करें क्योंकि ये भारत की इज़्ज़त का सवाल है - एक इनटरनैशनाल शहर दुबई मे छपने वाला अखबार जिसमे सभी देश के लोग काम करते हैं और भारत के तिरंगे के साथ इतनी बडी गलती? ये हमसे बरदाश्त नही।


6 comments August 15, 2006

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