मूंह मीठा करें

नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है 🙂

और हां ……. लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज मज़ेदार चर्चा चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है …….. लड्डू बाद मे खाना  – आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा

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नवम्बर 10, 2006 at 11:00 पूर्वाह्न 17 टिप्पणिया

ये खुदा है – 38

[  सद्दाम को मौत ]
 
उसामा बिन लादेन को घसीटते हुए थाना ले आए जब उसके कपडे उतारे तो थाना मे सब की चीखें निकल पडीं और डर के मारे कांप उठे। किसी इमारत की लिफ्ट मे ऊपर नीचे खेलते हुए उसामा के कपडों मे खुदा पकडा गया। दो दिन पहले खबरों मे बताया भी था कि न्यूयार्क के म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चोरी हो गए। पता नही क्यों, खुदा को भी शरारत सूझती है आखिर क्या ज़रूरत थी म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चुरा कर पहनने की? अब हालत ये है कि अगर उसको समझाएं तो गज़ब मे आकर कहीं भी भूकंप ला सकता है। आज खुदा की नींद हराम, सुबह चार बजे ही जगा दिया कि जनाज़ा मे जाना है, उठते ही बडे गज़बनाक अंदाज़ मे अंगडाई ली शायद ज़िनदगी मे पहली बार किसी की मृत्यु पर जाना है। दांत साफ करते हुए खुदा को खयाल आया कि कल रात डिनर पर अमेरिका ने पूछा थाः क्या आप अर्थी को कंधा देने का तजुर्बा रखते हैं? खुदा ने खिलखिलाते हुए जवाब दियाः हमें तो जनाज़ों मे जाने का तजुर्बा नही अलबत्ता जनाज़े के जुलूस को भी बारात की तरह इनजोए करते हैं। इस पर अमेरिका ने कहाः तब तो आपको रात भर प्रेक्टिस करलेनी चाहिए क्योंकि कल सुबह आपको एक महान हस्ती की अर्थी को कंधा देना है। दांत साफ करने बाद अभी तक नाश्ता नही मिला मगर सद्दाम का खत मिला जिसकी पहली लाइन मे ही खुदा को अमेरिकी चमचा लिखा, आगे लिखाः अपनी मौत की खबर सुन कर मैं ने खुदा पर दुबारा ईमान लाया मगर अब क्या फाइदा वो खुद अमेरिका के कब्ज़े मे है। सद्दाम का खुला खत पढ कर खुदा को बहुत रोना आया फिर सीधा वाइट हाऊस मे घुस आयाः किसी भी हाल मे हमें ईराक जाना है, वहां बेचारा सद्दाम को हमारी मदद की ज़रूरत आंपडी है। अमेरिका ने मना किया, इस वक्त आपका वहां जाना मुनासिब नही, पूरे ईराक मे दंगा फसाद और हर तरफ खून की नालियां बह रही हैं – खुदा ना करे अगर खुदा को कुछ हो जाए तो फिर विश्व को कौन चलाए। अमेरिका ने खुदा को समझायाः चुनाव सर पर हैं और ऐसे मौके पर सद्दाम को मौत की सज़ा सुनाना ज़रूरी था – एक ऐसा शक्स जो पच्चीस वर्षों तक अपनी ही जनता पर खुद को खुदा मनवाता रहा वो पेट्रोल की ताकत से पूरे गल्फ पर खुदा बने उडना चाहता था और जब हम ने उसका सारा पेट्रोल चूसा तो वो नीचे आगिरा। इसी दौरान ईराक से खुदा को फोन आने शुरू होएः अगर आप वाकई खुदा हैं तो कृपया अली की मज़ार को सौदी अरब मे शिफ्त करदें बडी मेहरबानी आपकी, यहां हम सुन्नी-शिया आपस मे एक दूसरे के लिए खून के प्यासे हैं। खुदा ने दिलासा दियाः जब वो ईराक आए तो एक साथ मिल बैठ कर मसला हल कर लेंगे। क्या खाख हल करेंगे? सेकडों वर्ष गुज़र चुके आज तक ये मसला हल नही हुआ कि कौन खुदा की औलाद है हद तो ये है कि खुदा खुद नही जानता कि वो किस का पैदा किया है? अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा – पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है। सद्दाम ने कभी सोचा तक नही कि खुदा को कभी मौत आए, इतना तो मालूम है कि विश्व पर अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे — जारी

बाकी फिर कभी

नवम्बर 6, 2006 at 2:47 अपराह्न 9 टिप्पणिया

ये खुदा है – 37

[ पाकिस्तान का पाकिस्तान पर हमला ]
 
बडा गज़ब हुआ, सुबह की चाय तो दूर दोपहर के खाने के लिए भी खुदा ने अपना दरवाज़ा नही खोला। ईद और दिपावली को गुज़रे एक सप्ताह हो गया मगर आज भी दरवाज़े के बाहर फकीरों का हजूम एक पर एक खडा है। खुदा से गरीबों का दुःख दर्द देखा नही जाता उसका दिल कमज़ोर है और ये बेचारे गरीब लोग आज भी यही समझते हैं कि खुदा के पास बहुत पैसा है हालांकि नोट छापने की मशीन तो इनसानों के पास है। जब से खुदा ज़मीन पर आया गरीब गरीब ही ठेहरा अमीर और ज़्यादा अमीर बन गया। खुदा को ना तो झोंपड़ों मे रात गुज़ारने का तजुर्बा है और ना ही लोकल ट्रेनों मे लटकने का। गरीब किसानों ने वर्षा के लिए जो दुआ मांगी थी और फिर पानी को ऐसा बरसाया कि पूरे के पूरे खेत ही उजड गए। गरीब की छत से टपकते पानी को भी इन्जोये करने का हुक्म दिया अगर बरदाश्त नही कर सकते तो किसी सिनेमा हाल जाकर नाइट शो देखने का फर्मान जारी कर दिया। गरीबों के पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी नही मगर सारे जहां का दर्द “स्टार पल्स” दे दिया। खुदा ने चिल्लाते हुए कहाः आखिर विश्व से कब खतम होगी ये गरीबी? जितने गरीबों को मारो उतने ही पैदा होते जा रहे हैं। अमेरिका ने खुदा से वादा भी किया था कि बहुत ज्लद पूरे विश्व को गरीबी से पाक कर दिया जाएगा और गरीबों को फकीरी मे बदलते उलटा वो खुद कंगाल होने को है। जब शाम को चौकीदारी से लौट कर अमेरिका वापस आया तो खुदा ने पूछाः टोटल कितने भिकारियों को मारा? सलूट देते हुए अमेरिका ने खुदा को जवाब दियाः सरकार, रात का समां था और अँधेरे मे यूं Pakistani tribesmen on Monday gather around bodies during a funeral ceremony in Khar, the main town in the Bajur district. Missiles fired by Pakistani helicopters destroyed a religious school on the Afghan border Monday that the military said was a front for an al-Qaeda training camp, killing 80 people. The army said those who died were militants, but furious villagers and religious leaders said the predawn missile barrage killed innocent students and teachers at the school, known as a madrassa. (STR, AFP, Getty)महसूस हुआ जैसे पांच सौ तो ज़रूर मार दिए हैं। खुदा ने अमेरिका को कान के नीचे दो बजाए और आज का अखबार दिखायाः सिर्फ 90 भिकारी मरे हैं और बाकी 410 को क्या ज़मीन खा गई? सर झुका कर अमेरिका ने कहाः हमारा टार्गेट तो पांच सौ के ऊपर था, हमारे हेलीकाप्टर से एक रोटी क्या गिरी सभी फकीर आपस मे लड पडे। अमेरिका की सफाई सुन कर खुदा ने उसे शाबाशी दी, चलो कम से कम आपस मे तो लडवा दिया जिस से खुदा का खर्च बचा – हर दिन पचास फकीर भी मरें कोई बात नही आपस मे लडवाना ज़रूरी है – जारी

बाकी फिर कभी

अक्टूबर 31, 2006 at 1:49 अपराह्न 15 टिप्पणिया

ये भारत है जनाब !!!

क्या अजीब देश है हमारा, यहां कभी त्योहार खतम होने का नाम ही नही लेते कभी दीपावली की खरीदारी तो कभी रमज़ान की गहमा गहमी, कभी दशहरा तो कभी दुर्ग पूजा। पिछले चंद महीनों मे त्योहारों का जैसे एक सिलसिला चल रहा है। पहले तो पूरे भारत मे दशहरा की धूम धाम थी और लोगों ने रावन को जला कर चैन का सांस लिया ही था कि दिपावली और रमज़ान की तैयारियाँ और शुरू होगई।

रात के बारह बजते ही जहां पूरी दुनिया सोजाती है लेकिन इस वक्त रमज़ान और दिपावली के मौके पर पूरे भारत मे सवेरा हो जाता है – लोगों की चहल पहल की वजह से बाज़ारों मे रौनक लग जाती है। इस बार दिपावली के साथ रमज़ान का भी समाँ था, पूरे बाज़ार खरीदारी के लिए खचाखच भरे हुए, भारत मे इन त्योहारों के मौके पर कौन हिन्दू और कौन मुसलमान पहचानना मुश्किल है क्योंकि सभी भारतीयों का एक-दूसरे के त्योहारों मे आना-जाना और मुबारकबादी देना ज़रूरी है और तो और एक-दूसरे के घरों मे खाना भी खाते हैं और ये नज़ारा चंद नेता लोगों से हज़म नही होता, जैसे ही त्योहारों का मौसम खतम हुआ फिर दंगा फसाद शुरू करवा देते हैं – वाह क्या कल्चर है हमारा!

भारत कोई ऐसा वैसा देश नही जहां हिन्दू-मुसलमानों के बीच सिर्फ दंगे ही होते हैं – भारत के हिन्दू और मुसलमान अपस मे लडते ज़रूर हैं मगर एक दूसरे के बगैर रह भी नही सकते। वैसे तो मैं सिर्फ नाम का मुसलमान हूं और हर दिन मुसलमानों मे उठता बैठता हूं लेकिन अपने देश के कल्चर को ही अपना धर्म और भारत को अपनी मां सम्मान मानता हूं। मैं ने हमेशा से हिन्दू को हिन्दू नहीं बल्कि अपना भाई माना है हालांकि दंगों के वक्त अपने हिन्दू भाईयों से मार भी खा चुका हूं। खैर दंगे फसाद के मौके पर कौन क्या है दिखाई नही देता और ये दंगा फसाद तो हमारे देश मे रोज़ का मामूल है, फसाद किसी भी टाइप का हो मगर भुगतने वाला कोई, पकडा जाने वाला कोई, मरने वाला कोई लेकिन फसाद मचाने वाला आज़ाद – नेता लोग को कौन पकडे? जबकि पकडने,  मारने और फसाद मचाने का आर्डर तो वही देते हैं।

यहां दुबई मे कहने को बहुत सारे दोस्त हैं मगर अपना जो सच्चा दोस्त है वो एक हिन्दू है, ज़रूरतों पर काम आने वाला, खुशी और दुःख मे साथ देने वाला हालांकि वो अभी तक मुझे मुसलमान ही समझता है फिर भी अपनी सच्ची दोस्ती निभाता है। हम पिछले चार वर्षों से साथ हैं लेकिन आज तक उस ने मुझ से ये नही पूछा कि दूसरे मुसलमानों की तरह तू नमाज़ क्यों नही पढता? जबकि मैं ने उस से पूछ डाला तू पूजा पाठ क्यों नही करता? उसने जवाब दियाः “हालांकि मेरे माता-पिता हिन्दू हैं और पूजा भी करते हैं लेकिन जब से मैं ने दुनिया देखा धर्म पर से विश्वास उठ गया। ये सारे लोग झूठे हैं जो सुबह शाम राम अल्लाह का नाम लेते हैं और छुप कर गलत काम भी करते हैं लेकिन मैं राम अल्लाह का नाम नही लेता सिर्फ अपने दिल की सुनता हूं जो बुरा लगे वो बुरा और जो अच्छा लगे वो अच्छा।” अपने इस दोस्त के विचार जान कर मुझे बहुत खुशी हुई, पहली बार मुझे अपने विचारों जैसा अपने ही देश का ये मित्र मिला, मैं ने अपनी किस्मत का शुक्र अदा किया। आज अपने देश मे ऐसे बहुत सारे नौजवान हैं जो अपने धर्म मे पाबंदियों की वजह से तंग आचुके वो खुल कर जीना चाहते हैं लेकिन अपने माता-पिता की इज़्ज़त के लिए आवाज़ नही उठाते। ऐसे आज़ाद विचार वाले भी अपने मां बाप से डरते हैं और उनकी इज़्ज़त करते हैं, ऐसा प्यारा परिवार भारत के अलावा और कहां मिलेगा? ये कैसा अजीब देश है हमारा, जैसा भी हो वो हमें प्यारा।

इस लेख मे कुछ खास बात नही है, लेकिन ये लेख अपने इस मित्र के नाम लिख रहा हूं जो चार वर्ष साथ रहने के बाद उसके विचारों को पहली बार जान कर मुझे सच्ची खुशी मिली।

अक्टूबर 27, 2006 at 5:57 पूर्वाह्न 22 टिप्पणिया

ये खुदा है – 36

 [ ईद का भाषण ]

 बिल गेट्स ने जब नया विस्टा दिखाया तो खुदा की समझ मे कुछ ना आया। आज न्यूयार्क शहर मे सब की नज़रें बुर्खा पोश नारियों पर टिकी रहीं, किसी ने अफवाह फैलादी कि खुदा बुर्खा पहन कर शहर मे घूम रहा है। शाम को सरकारी न्यूज़ चैनल पर अनाऊँस करवायाः अफ़वाहों पर ध्यान ना दें, खुदा बुर्खा मे नहीं बल्कि पनामा की एक बस मे पटाखे ले जाते हुए धमाका मचा दिया। दूसरे दिन ईद के मैदान मे खुदा ने अपना भाषण शुरू किया और वही पुरानी बातें दुहराने की कोशिश की जो मुल्ला साहिबान पहले बता चुके थे। ईदगाह से बाहर हज़ारों गरीब और फकीर लोग खुदा की एक झलक देखने के लिए G8 वालों से झगडा कर रहे थे वहीं परदे के पीछे अफगानी तालिबान डंडे ले कर खुदा के फरिश्तों को पीट रहे थे कि उस वक्त मदद को क्यों नही आए जब अमेरिका ने हम पर हमला किया था? तभी ईद के मैदान मे ज़बरदस्त हलचल मच गई जब खुदा ने अपने भाषण मे अचानक अमेरिका की तारीफ करडाली। जापान ने वाक आऊट किया तो इन्डोनेशिया भी गुस्से मे मैदान छोड बाहर निकल आया। खुदा के भाषण की बे हुर्मती, दोनों देशों को एक बार फिर भूकंप से हिलाडा। खुदा का गुस्सा देख उ.कोरिया ने तौबा करली और वादा किया कि आइंदा से सिर्फ छोटे पटाखे जलाएगा। खुदा ने अपना भाषण जारी रखाः भारत मे एक की बजाए दो ईदें अजीब बात है, चंद लोगों को आज चांद दिखाई दिया तो बाकीयों को कल दिखाई देता है जब्कि हम ने एक ही चांद बनाया था। सऔदी अरब ने खुदा का शुक्र अदा किया कि हमें चांद तो नज़र ना आया मगर ईद करडाली अब तो खुले आम दबाके खाएंगे क्योंकि बगैर चांद देखे रमज़ान की छुट्टी करडाली। मुशर्रफ भी खडे होकर कहने लगेः हम तो चांद देख कर ही ईद मनाएंगे अगर से वो वर्षों बाद भी दिखाई दे। फिर मुशर्रफ ने खुदा को दावत भी दिया कि ईद हमारे साथ पाकिस्तान मे मनाएं तो खुदा ने तौबा करली क्योंकि पाकिस्तान मे उसकी सिक्यूरिटी का कोई इनतेज़ाम ही नही और मुमकिन है खुदा को पाने के चक्कर मे शिया-सुन्नी झगडा कर बैठें। जब आखिर मे इबादत का वक्त आया तो अमेरिका ने बुलंद बांग अज़ाँ कहीः सारे जहां का मालिक खुदा है मगर वो अमेरिका के कब्ज़े मे है — जारी

बाकी फिर कभी

अक्टूबर 24, 2006 at 2:08 अपराह्न 9 टिप्पणिया

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