मैं शहीद हों

फ़रवरी 19, 2006 at 8:56 पूर्वाह्न 11 टिप्पणिया

(एक नये मुजाहिद के नेक ख्यालात)

जी हां – मेरा नाम मुजाहिद और काम जिहाद करना है। मुझे अपने मज़हब से बे हद प्यार है और दूसरे मज़हबों से नफ़रत करता हों। अपने मज़हब पर मेरे मां बाप क़ुरबान, मेरी जवानी मेरी ज़िन्दगी सब कुछ क़ुरबान्। मुझे कुछ नही चाहिये, मरने के बाद जन्नत में सिर्फ़ एक झोंपडा मिल जाये तो काफ़ी है। मेरी सुबह जिहाद, शाम जिहाद, मेरा खाना पीना जिहाद और मेरा सोचना भी जिहाद है। हर पल जिहाद के लिये तैयार हों, अपने मज़हब कि क़ातिर मारने और मरने कि लिये कफ़न बांध कर खडा रहता हों।

अपने मां बाप का न फ़रमान बेटा हों उनके लाख मना करने के बावजूद भी जिहाद के रास्ते निकल पडा क्योंकि मुझे शहीद होना पसंद है। हमारे जिहाद ग्रुप में सब से चोटा मैं ही हों। बन्दुकें साफ़ करना चाय बनाना और बरतन साफ़ करना सब मेरा ही काम है। हम लोग शहर से दूर पहाडों में रहते हैं। हर दिन सबह उठ कर यही सोचता हों कि शायद आज हमारे जिहाद ग्रुप के लीडर मुझे जिहाद के लिये कहीं भेजेंगे, मेरे हाथों बम पठेंगे, मिन्टों में कई लोगों को मौत कि नींद सुला दोंगा। अगर मैं मर गया तो ग़म नहीं इस लिये कि मेरी मुक्ति हो चुकी होगी क्योंकि मैं शहीद हों।

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एलेक्ट्रानिक मज़हब मूंछ वालियां

11 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. Pratik  |  फ़रवरी 19, 2006 को 9:32 पूर्वाह्न

    शुएब भाई, आपने इस लेख के ज़रिए मज़हबी उन्‍माद का काफ़ी वास्‍तविक चित्रण किया है। ख़ास तौर पर युवा साम्प्रदायिक चरमपन्‍थ के शिकार जल्‍दी हो जाते हैं और अपने घर-परिवार के प्रति अपनी ज़िम्‍मेदारियों को भूल कर मज़हब की राजनीति करने वालों के चंगुल में फँस जाते हैं।

  • 2. Raviratlami  |  फ़रवरी 19, 2006 को 10:04 अपराह्न

    हाँ, ये मज़हब है – जब कोई किसी दूर देश में मेरे धार्मिक पुरूष का कार्टून बनाता है तो मैं अपने देश में अपने गली मोहल्ले में विरोध स्वरूप तोड़ फोड़ करता हूँ- अपने आसपास की चीजों का नुकसान पहुँचाता हूँ!

    हाँ, ये मजहब है.

    और मैं शहीद हूँ – जेहादी हूँ

  • 3. Raviratlami  |  फ़रवरी 19, 2006 को 10:33 अपराह्न

    जी हाँ, मैं मज़हबी हूँ ज़ेहादी हूँ.

    श्रवण बेलगोला में नंगे ईश्वर की पूजा-अर्चना करता हूँ, शिव लिंग की इबादत करता हूँ, मगर हुसैन बिना कपड़ों के ईश्वर को चित्रित करता है तो मैं तोड़फोड़ मचाता हूँ, उत्पात करता हूँ.

    मैं मज़हबी हूँ, ज़ेहादी हूँ

  • 4. Shantanu Shaligram  |  मार्च 22, 2006 को 5:54 पूर्वाह्न

    शुऐब,
    आप का चिठ््ठा विचार प्रवर्तक है। इस विचार से शांती अैार भाईचारे का युग पुन: प्रस्थापीत हो सकता है।
    भवदीय,
    शंतनु

  • 5. Shantanu Shaligram  |  मार्च 22, 2006 को 5:55 पूर्वाह्न

    This post has been removed by the author.

  • 6. wap  |  अक्टूबर 12, 2008 को 4:31 अपराह्न

    ye muslim nahi ho sakta ! koi islam ko badnam karne ke liye ye sab likha hai

  • 7. Saif Khan  |  नवम्बर 8, 2009 को 11:38 पूर्वाह्न

    islam me jehad teesri zarrori cheez ha aur main ALLAH se dua karta hu ki shoib bhai ki murad puri ho
    ameen sum ameen

  • 8. kdsingh  |  नवम्बर 18, 2009 को 4:52 पूर्वाह्न

    jehad al akbar karna chahiye………apne ghar valo ki care karna he pahla dhram h.unki baat mani nahi chale gaye paharo par…ye kya h

  • 9. sajis  |  मार्च 2, 2012 को 6:41 अपराह्न

    apane maa bap ka na farman kabhi jihadi nahi ho sakta ,jihad ke liye maa bap ki izazat zaruri hoti hai.

  • 10. andriyabeg  |  अक्टूबर 16, 2015 को 10:49 पूर्वाह्न

    oh ho, ye bichare log kitni galat fehmi ka shikar ho gye he, inka ye kufrana hal aag ke shole or ubalta huva pani inka intezar kar rha he, agar ye apni shetani mot ka hashr dekhle to ye sabke gulaam hojey or makhlokh ki khizmat me lag jaye.

  • 11. andriyabeg  |  अक्टूबर 16, 2015 को 11:04 पूर्वाह्न

    Islaam to Ruhani dil ki paki v narmi halimi sikhata he ye to inke pas nhi he..Islam ko shi tor se nhi samaj ne ki vja se ye insani mind nafs shetaan ban jata he or gusse ka shikar ho jata he nafrat ka shola ban jata he jo islaam ne haraam kiya he. ye ladna marna or mrna ye to ek mazhabi janoon he januni log to jahel or vaheshi janvar he inki shetani harkate inka hal duniya ko bta rhe he, shetani harkaten vale jaant ke haqdar nhi ho sakte.

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