छुटटी पर

मार्च 17, 2006 at 5:41 पूर्वाह्न 2 टिप्पणिया

मैं एक महीने की छुटटी पर अपने घर बंगलौर जा रहा हूं। यहां सम्मर शुरू हो चुका है और यहां भारती इतने हैं कि बाकी लोग चार-पांच दिखाई देते हैं, यहां इनडियन स्कूलों में सम्मर की छुट्टियां शुरू होचुके और यहां पढने वाले बच्चे भारत में अपने नाना-नानी से मिलने एक महीना पहले ही हवाई जहाज़ की टिकटें बुक करवा चुके, पूरे १५ दिनों तक के लिये बंगलौर, मुम्बई और दिल्ली सभी हवाई जहाज़ फुल हैं। थोडी भाग दौड करने के बाद आखिर मुझे ऐर अराबिया का टिकट मिला। ऐप्रल १० को मुझे अपने घर पहुंचना है, घर से बार बार फोन आने लगे कि ये चाहिये वो चाहिये, अभी से मांगें शुरू करदीं। सबसे हां कहा मगर मैं तो वही ले जऊँगा जितनी मेरी हैसियत है। चंद लोग दुबई को जन्नत समझते हैं कि यहां पैसों की बारिश होती है। यहां लोग मुम्बई कि तरह रात दिन पसीना बहाते हैं तब जाकर थोडे पैसे मिलते हैं।

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Entry filed under: टैम पास.

उसामा से एक मुलाकात मैं मुसलमान क्यों नहीं

2 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. Sanjay Bengani  |  मार्च 17, 2006 को 7:46 पूर्वाह्न

    भई मैं भी यही सोच रहा था कि वहां तो बस कुआं खोदो और तेल के रूप में डोलर खिंच लो. हक़िकत तो आप ही बयान कर सकते हैं एक पोस्ट के रूप में, कभी इअस बारे में और लिखे.

  • 2. रमण कौल  |  मार्च 17, 2006 को 4:34 अपराह्न

    यह भी पढ़ें।

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