इनसे मिलो – 22

जुलाई 15, 2006 at 9:49 पूर्वाह्न 2 टिप्पणिया

ये खुदा है

सददाम अदालत मे खडे बड बडाने लगेः जब हम ईराक के राष्ट्रपति थे इज़राईल हमारे सामने एक चूहे की तरह था और आज हम पिंजरे मे तो वोह शेर बन गया। खुदा ने सददाम की बात सुनी तो उन्हें तसल्ली दीः ऐसी हालत मे बहकी बहकी बातें ना करे, अमेरिका ने अब तक आपको जो ज़िनदा रखा उस पर शुक्र करें। सीरिया से पता नही किस को शरारत सूझी, मिज़ाईल पर उसामा का फोटो लगाया और सीधा इज़राईल पर ठोका। मिज़ाईल तो फटा नही मगर उसामा की फोटो के नीचे अंग्रेज़ी मे लिखा थाः “I am in Syria, Catch me if you can” खुदा को गुस्सा तो बहुत आया पर किया करे? कहां कहां अपनी नज़र रखे? ईरान, ईराक, अफगान – अभी फिलिस्तीन को एक थप्पड लगाया तो पलट कर लेबनान को दिन मे सितारे दिखा दिए। खुदा सिर्फ उन्ही लोगों को पसंद करता है जो अमेरिका पर ईमान रखते हैं वोरना पाकिस्तान को नज़रे रेहमत से देखना खुदा को बिलकुल पसंद नहीं। मुशर्रफ हमेशा से कहते आरहे हैं कि मैं वरदी नही उतारूँगा, मगर उन्हें किया मालूम कि उनकी किस्मत मे कफन भी नही है, खुद पाकिस्तानी लोग हर दिन दुआ कर रहे हैं कि खुदा करे ज़ालिम मुशर्रफ को कफन भी नसीब न हो। सभी देशों की तरह आज भारत भी लेबनान के लिए अपनी तरफ से अफसोस भेजा। दूसरी तरफ सीरिया के राष्ट्रपति बषर अल असद ने अब बाथरूम भी अपने बेड के नीचे बनालिया है और उनका बेड कहां है खुदा को भी नही मालूम। लेबनान पर अचानक ईज़राईल की तोपबाज़ी से अमेरिका ने ये कहते होवे अपना मुंह छुपा लिया कि ये सब खुदा ने किया है जिसमे हमारा कोई हाथ नही, हमने तो बस खुदा से इतनी फ़रियाद की थी कि बेचारा इज़राईल इस वकत मुसीबत मे है उसकी मदद करे। खुदा तो खुदा है, वो जब चाहे किसी के भी कान खींच सकता है उधर फिलिस्तीन को आंख मार कर सुला दिया कि तुम्हें बाद मे देखेंगे क्योंकि अब लेबनान को जगाना है। — जारी

बाकी फिर कभी

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इनसे मिलो – 12 कैसे करूँ शादी?

2 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. Ravi Kamdar  |  जुलाई 16, 2006 को 5:03 पूर्वाह्न

    इसमे तो एसा है ना की जो कोशिश करता है और अपने हक के लिये बोलता है, लड सकता है, उसकी तूती बोलती है। कमज़ोर लोग सिर्फ अपने और दूसरो के हक और न्याय अन्याय की बाते ही करते रहते है। कोइ भी देख लो। ओसामा बिन लादेन ने भी फाइट करके अपने होने का सबूत दे दिया। सद्दाम बिना लडॆ पकडा गया और अब पागल हो गया है। मुझे हमेशा से मुकाबला करने वाले लोग पसंद है चाहे वो मेरे कट्टर शत्रु ही क्यो ना हो। अछ्छी सिरीज़ चालु की है आपने। अगले लेख की प्रतिक्षा रहेगी।

  • 2. Pankaj Bengani  |  जुलाई 16, 2006 को 9:46 अपराह्न

    सही लिखते हो.

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