टॉप ब्लॉगर

जुलाई 27, 2006 at 2:48 अपराह्न 9 टिप्पणिया

ब्लॉगिंग एक ऐसा नशा जैसे चंद लोगों को खाने के फोरन बाद सिगरेट पीना होता है और ब्लॉगर का नशा ऐसा कि अभी अपना लेख पोस्ट किया तो जल्दी से पन्ने को रि-फ्रेश कर के भी देख लिया कि शायद कोई टिप्पणी आगई हो :p चंद ब्लॉगर हमारी तरह भी होते हैं जो साइबर केफे जा कर पोस्ट करते हैं, आज पोस्ट किया तो अपने ब्लॉग का मुंह देखने के लिए दूसरे दिन का इनतेज़ार करना पडता है कि कब दफतर से छुटटी हो और साइबर केफे की तरफ डोड लगाएं 😉  

मानो आज हम भी टॉप के ब्लॉगर बन गए 🙂 अरे भाई पिछले तीन वर्षों से ब्लॉगिंग कर रहे हैं तो टॉप ब्लॉगर ही कहलाएंगे ना :p ये बात अलग है कि ब्लॉगिंग की ए बी सी डी नही मालूम मगर कुछ ना कुछ लिख कर पोस्ट तो करते हैं। तीन वर्ष पहले जब हमें ब्लॉग किया चीज़ पता ही नही था, तब हम साइबर केफे मे बैठ कर नेट की रंगीन दुनिया मे खोजाते थे और जब साइबर केफे वाला आकर कहता “और बैठना है आपको?” तब हम अपनी घडी देख कर कुर्सी से उछल पडते कि “अरे बापरे – पिछले चार घंटे से हम इन्टरनेट मे ऐसे खो गए कि वकत का पता ही नही और आए थे सिर्फ इ-मेल चेक करने और लिंक से लिंक मिलाते कहीं और निकल जाते। आआह —- वोह दिन और आज का दिन बहुत फरक है क्योंकि पहले हम नेट पर बेकार ही अनजानों से चैट करते थे या फिर रंगीन वैब साईट्स की रंगीनियों मे खोजाते थे। दोसतों की इ-मेल का जवाब लिखने के लिए फुरसत नही थी और अब लम्बी लम्बी पोस्ट लिखने मे चैम्पिन बन गए। अभी वाशिंग मशीन मे कपडे पडे हैं जिसे दुबारा घुमाने के लिए 8वीं फलोर (अपने फ्लैट) जाना था मगर हम तो अपनी बिलडिंग के करीब से गुज़रते हुए सीधा साइबर केफे पहुंच गए (ब्लॉगिंग का नशा) – दफतर मे हमारा बॉस इधर उधर निकल जाता है तब हम इन्टरनेट खोल लेते हैं मगर यहां हमारा नशा और भी बढ जाता है क्योंकि ब्लॉगर तो किया हम किसी का भी ब्लॉग खोल नही सकते तो हमारा ब्लॉग कैसे देखे? सिर्फ शाम के 7 बजने का इनतेज़ार रहता है और दफतर से सीधा साइबर केफे :D अच्छा किया जो इन्टरनेट पर ब्लॉगिंग का सिलसिला चालू हुवा वरना हम अभी तक इन्टरनेट की दूसरी रंगीनियों मे खोए रहते :P 😀 🙂

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Entry filed under: टेक्नोलॉजी, दुबई.

अब हम भी वर्डप्रेस पर ग्रीन चाय

9 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. Ashish  |  जुलाई 27, 2006 को 4:34 अपराह्न

    सही शोएब जी, जो बन्दा साईबर-कैफ़े से चिठ्ठाबाजी करे, उसकी लगन की तो दाद ही देनी चाहिये। मैं इस हिन्दी चिठ्ठाजगत मे नया हूँ, पर अब से आपका चिठ्ठा जरूर देखूँगा।

  • 2. अनूप शुक्ला  |  जुलाई 27, 2006 को 5:13 अपराह्न

    तीन साल से ब्लागिंग का नशा जारी रखने की बधाई।

  • 3. shuaibi  |  जुलाई 27, 2006 को 5:16 अपराह्न

    Ashishजीः धन्यवाद आपका, आते रहियगा – मैं इस वकत आप ही का चिट्ठा देख रहा हूं 🙂

    अनुपजीः बधाई देने के लिए आपका धन्यवाद 🙂

  • 4. eshadow  |  जुलाई 27, 2006 को 6:48 अपराह्न

    शोएब जी, आप तो हिंदी चिठ्ठाजगत के एक रत्न हैं, आप नही होते तो कुछ कमी रह जाती।

  • 5. आशीष  |  जुलाई 28, 2006 को 3:26 पूर्वाह्न

    बढीया है लगे रहो ! 🙂

  • 6. सागर चन्द नाहर  |  जुलाई 28, 2006 को 4:22 अपराह्न

    सुहैब भाई,
    मैं भी ईशैडोजी के कथन का समर्थन करता हुँ, वाकई आप इस चिठ्ठा जगत के रत्न हैं।

  • 7. SHUAIB  |  जुलाई 30, 2006 को 4:50 अपराह्न

    आशीष जी और नाहर जीः आप दोनों की इज़्ज़त नवाज़िश क बहुत धन्यवाद

  • 8. Tarun  |  जुलाई 31, 2006 को 2:39 पूर्वाह्न

    लगे रहो ! 🙂

  • 9. विवेक रस्तोगी  |  जुलाई 31, 2006 को 7:50 पूर्वाह्न

    वाह वाह आपने तो मन की बात कह डाली। बधाई हो ।

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