Archive for अगस्त, 2006

ये क्या बकवास है?

दुनिया भर की खबरें और हाल चाल को ध्यान मे रखते हुए “खुदा से मिलो” सिरीज़ लिखना शुरू किया और अपने लेख का करदार खुदा को बनाया – वोह इसलिए के खुदा किसी की जागीर नही – खुदा और भगवान दोनों एक नाम हैं – खुदा का शब्द इसलिए इस्तेमाल करता हूं के ये लेख पहले उर्दू मे लिखना शुरू किया था, अब हिन्दी मे भगवान कि बजाए खुदा का ही नाम इस्तेमाल करता हूं। एक खास बात ये है के धर्म से बेज़ारगी और वर्षों से मीडिया मे नौकरी का तजुर्बा की वजह से इन सिरीज़ मे और कडुवापन डालता हूं यानी सीधे शब्दों मे अपनी भडास निकालता हूं। और इन सिरीज़ मे ऐसी वैसी बातें कह जाता हूं के पढने वालों को बहुत कडुवी लगती हैं या फिर बहुत बडी बकवास लगती है। ये सिरीज़ सिर्फ अपना ज़ाती खयाल है ना के किसी को बुरा भला कहने के लिए – बस दुनिया भर की ताज़ा खबर देख कर जो समझ मे आता है उसे  इन सिरीज़ मे लिखता हूं और ये तो अपना ब्लॉग है अपने दिल की बात भी यहीं लिखनी है। इन लेखों मे खुदा को गाली लिखूं या उसकी मां बेहन एक करूं क्योंकि खुदा (भगवान) किसी एक का नही बल्कि वोह हर किसी का है – खास तौर पर इन सिरीज़ मे अपना अंदाज़ ऐसा है के दिल खोल कर अपनी भडास निकालता हूं।

खुदा से मिलो टाइटल और लेख हैरानी की बात है पर उसका मतलब ये नही के इन सिरीज़ मे खुदा का मतलब कोई आसमानी खुदा है? अपनी सिरीज़ मे उस शक्ति को खुदा बनाया है जो ताकतवर देशों के पीछे कारफरमा है। क्योंकि इस वकत अमेरिका सुपरपावर बनने की कोशिश मे है, बाकी देशों मे अपना सिक्का चलाना चाहता है – और ऐसे वकत खुदा दुनिया देखने आया और अमेरिका की रौनक देख कर उसीका हो गया और पीछे रह कर अमेरिका की हर मुमकिन मदद कर रहा है —– ये सिर्फ “खुदा से मिलो” सिरीज़ का खयाल है ना कि सच मुच ऐसा है। और लिखने का अंदाज़ ऐसा के पढने वाले अगर समझें तो हैरान हों और ना समझे तो परेशान हो कि ये क्या बकवास है? 🙂
सुन रहे हो अमिताभ त्रिपाठी जी

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अगस्त 31, 2006 at 2:25 अपराह्न 4 टिप्पणिया

इनसे मिलो – 30

ये ख़ुदा है

आज ख़ुदा नींद मे वनदे मातरम् बडबडाया तो अमेरिका की चीखें निकल पडीं, पिछले दो वर्षों से ख़ुदा हमारी अपनी क़ैद मे है और उसे अभी तक अमेरिका से बाहर जाने नही दिया। जापान ने अमेरिका को वारनिंग लिख भेजाः बस बहुत होगया, अब ख़ुदा को अमेरिका से बाहर निकलना ही होगा सारी दुनिया उसकी झलक देखने बेताब है – अगर अमेरिका ने ख़ुदा को आज़ाद नही किया तो वरना —- हम भी मुख़तलिफ किसम के ख़ुदा बना कर बेच देंगे। दूसरी तरफ राशिया, कोरिया और सिंगापुर ने भी जापान की हिमायत करदी, वोह दिन दूर नही जब हर देश का अपना ख़ुदा होगा। मगर अमेरिका की खुश-किस्मती सबसे बढिया खुदा उसकी अपनी क़ैद मे है, ख़ुद अमेरिका ने कहाः ख़ुदा का शुक्रिया के ख़ुदा हमारी क़ैद मे है। सबुह उठ कर ख़ुदा ने सबसे पहले अज़ाँ दीः ख़बरदार दुनिया वालों, जो अमेरिका को ताक़तवर नही मानता वोह हम मे नही – और लानत हो उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी पर उंगली उठाए। आज ख़ुदा ने अमेरिका से भारत यात्रा की इजाज़त चाही, अमेरिका ने मना करदियाः ख़ुदा का भारत यात्रा करना ख़तरनाक है क्योंकि वहां कोई एक धर्म नही बल्कि ऐसे वैसे लोगों का देश है के आपका एक बाल मिल जाए तो मज़ार बनादें, दूध से नेहला कर आपके सर पर नारियल तोड सकते हैं यहां तक के आपके कपडे फाड कर अक़ीदत से खाजएंगे फिर उसके बाद किसी तालाब मे डूबा कर आपको घुला देंगे। अच्छा है आप अमेरिका ही मे रहें, यहां धार्मिक लोग कम इनसान ज़्यादा हैं और यहां किसी किस्म का भेद भाव भी नही। इतना सुनकर ख़ुदा ख़ौफ के मारे भारत यात्रा का प्लान कैनसल करदिया और सरकारी न्यूज़ चैनल पर भारत को पैग़ाम भेजाः दुनिया के महान देश भारत को हमारा यानी ख़ुदा का सलाम, बडी तमन्ना थी भारत यात्रा की पर किसी वजह से टालना पडा। आज भारत मे वनदे मातरम् पर इतना हल्ला क्यों मचाया जारहा है, आख़िर क्या ज़रूरत थी एक से एक धर्मों को जनम देने की? किसी को वनदे मातरम् पढना पसंद है और किसी को नहीं ये अलग बात है – अगर आप अपने देश को खुश हाल और तरक्की दिलाना चाहते हो तो देश भक्त बनो देश के गीत गाओ और अगर कोई देश की शान मे गीत ना गाए तो समझो वोह इस देश का नही — जारी

बाकी फिर कभी

अगस्त 30, 2006 at 1:21 अपराह्न 9 टिप्पणिया

मुबारक हो जनाब

घर से निकलते वकत अम्मी ने बहुत समझाया के कुछ तो खाना पकाना सीखले, वहां जाकर क्या खाएगा? हम ने दो टोक जवाब दिया थाः वहां जाकर देखा जाएगा। अम्मी ने कहाः अंडा फिराई करना तो सीखले। हमारा जवाब थाः अभी जाने के वकत क्या किया सीखना पडेगा और ऊपर से टाइम भी बहुत कम है हमारे पास। अब यहां आए चार वर्ष होने को हैं, होटलों का खा खाके अदनान समी को भी पीछे छोड दिया – वैसे भी होटलों मे पकने वाले खानों से हर कोई वाकिफ है और हमेशा होटलों का खाने से अजीबवगरीब बीमारियाँ? वहां घर के खानों मे नकस निकालना और मस्ती करना, कितना भी अच्छा पका हो फिर भी मां को कोसना के क्या ऐसा पकाया है?। हर किसी को घर से दूर घर का खाना बहुत याद आता है। खैर हमने घर का खाने के लिए जो मस्ती की थी अब उसकी सज़ा भी भुगत रहे हैं। घर से दूर इतने वर्षों बाद आज पहली बार तीन अंडे बरबाद करने के बाद आखिरकार चौथा अंडा फिराई करने मे हम कामयाब रहे – मुबारक हो जनाब 🙂

अगस्त 25, 2006 at 6:05 पूर्वाह्न 12 टिप्पणिया

इनसे मिलो -29

ये खुदा है

खुदा खुद कनफ्यूज़ है के कौन जीता – हिज़बुल्ला या इज़राइल? जबकि खुदा ने जितना होसका अमेरिका की खातिर लेबनान मे तबाही मचाई और खुश भी था कि इसके बाद ईरान को भी नचाएगा। लेबनानीयों को बेली डांस करवाते खुदा ने खुद अपनी टांग तोडली, ठीक होने पर कुछ नया कारनामा कर दिखाने की उम्मीद है। आज अरब देशों के चेहरे खुशी से खिल उठे, खुदा की सिर्फ टांग टूटी तो हिज़बुल्लाह की कामयाबी समझ बैठे। जिस दिन से खुदा दुनिया मे आया तब से सिर्फ अमेरिका को ही सुन रहा है, उसे डर है कि अगर बाकी देशों मे जाए तो लोग उससे उसका धर्म पूछेंगे अगर वोह मुसलमान है तो हिन्दू क्यों नही अगर ईसाई निकला तो पंजाबी क्यों नही? खुदा खुद नही जानता कि उसका धर्म कौनसा है और वोह परेशान है के उसने सिर्फ इनसान बनाए थे और आज जब दुनिया देखने आया तो सभी इनसान ग्रुपों मे बट चुके हैं। जापान ने अमेरिका को वारनिंग भेजी के खुदा सबके लिए आया है, उसे आसमान से दुनिया मे आए दो वर्ष होने को आए मगर अभी तक अमेरिका से बाहर नही निकला – हम जापानी लोग अगर चाहें तो खुदा जैसे दो-चार खुदा और बना सकते हैं। भारत ने खुदा को सत्य देखने पर उकसाया कि किस तरह बुरे का अनजाम बुरा होता है। खुदा ने दहाडते होए फरमायाः हमने कब किसी का बुरा चाहा? अगर वही अफगानिस्तान के तालिबान को दिखा देते तो हमारे हमले से पहले ही हथियार डाल देते – जैसा के अमेरिका ने उसामा बिन लादिन को मोहरा दिखाया और आज तक वोह अमेरिका के लिए एक मोहरा का रोल निभा रहे हैं। टांग टूटने के बावजूद खुदा ने बहुत ही गज़बनाक अनदाज़ मे फरमायाः खुदा को खुदा की कसम – जो अमेरिका को नही मानता वोह हमारा नही, लानत है उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी को बुरा कहे – और हम ने अमेरिका मे रहना इस लिए पसंद फरमाया क्योंकि यहां हम सुरक्षित हैं — जारी

बाकी फिर कभी

अगस्त 17, 2006 at 7:29 अपराह्न टिप्पणी करे

भारत का उलटा तिरंगा

गलती किसकी?

आज भारत के स्वतंत्रता दिवस के शुभ मौके पर दुबई से छपने वाले अंग्रेज़ी अखबार Gulf News के SPECIAL REPORT (मेगज़ीन) के 20 वें पन्ने पर छपा Thomas Cook का ऐड देखें जिस पर भारत का तिरंगा उलटा छापा है। कॉपी अटाच की होई है

तसवीर यहां पर  अटाच की है

ये बात दिल्ली तक जाए। सब भारतियों से गुज़ारिश है के इसका चर्चा हर जगाह करें क्योंकि ये भारत की इज़्ज़त का सवाल है – एक इनटरनैशनाल शहर दुबई मे छपने वाला अखबार जिसमे सभी देश के लोग काम करते हैं और भारत के तिरंगे के साथ इतनी बडी गलती? ये हमसे बरदाश्त नही।

अगस्त 15, 2006 at 8:18 अपराह्न 6 टिप्पणिया

आज छुट्टी है?

सुबह सबेरे परेड ग्रऊँड पहुंचो, तिरंगा लहराव,
मन्त्रीयों का भाषन सुनो और तालियाँ बजाउ फिर मिठाई खाउ

 

आज सुबह सिर्फ दो घंटे आज़ादी का जशन मनाने के बाद बाकी पूरा दिन छुट्टी है
हम सब भारतीयों को 59 वीं आज़ादी की छुट्टी मुबारक

आज सुबह को सभी भारतीयों ने आज़ादी मिलने की खुशी मे अपने जोश और जज़बे का इज़हार देश भक्त गीतों से किया फिर सभी भारतीयों ने पूरी आज़ादी के साथ सुबह सुबह थंडी सांस ली क्योंकि आज छुट्टी का दिन है। और ऐसे भी लोग हैं जो आज का दिन सिर्फ छुट्टी समझ कर गुज़ार देते हैं। स्कूली बच्चों को याद दिलाया जाता है कि किस तरह शहीदों ने अपनी कुरबानियों से इस देश को आज़ाद करवाया, और इनही की वजा से आज हम आज़ादी के साथ सांस ले रहे हैं। बच्चे तो मान जाते हैं मगर आज भी चंद लोगों का रोना है कि ये कैसी आज़ादी है? कौन कहता है कि भारत आज़ाद देश है? ऐसे लोग और पचास साल बाद वैसे ही रोते नज़र आऐंगे कि भारत तो आज़ाद है मगर हम अभी तक गुलाम हैं। आज अगर भारत चीन और अमेरिका से दो कदम पीछे है तो सिर्फ उन लोगों की वजा से जो इसी देश का खाते हैं और दूसरे देशों का गाते हैं और तो और इतने बडे आज़ाद देश मे डरते हुए सांस लेते हैं। देखा जाए तो हर कोई सच्चा भारती अपने देश मे पूरी आज़ादी से सांस ले रहा है क्योंकि ये सिर्फ अपना देश ही नही बल्कि हमारी मां सम्मान देश है और अपनी मां की गोद मे बैठ कर पूरी आज़ादी से सांस लेने वाला किसी से डरता नही और वोह आराम से मज़े मे रहता है। अपनी किस्मत का शुक्र अदा करना चाहिए कि हम एक जन्नत जैसे देश मे पूरी पूरी आज़ादी से हैं। आज अखबारों मे खबरें पढ कर डर लगता है कि किस्मत मे अगर हमारा जनम किसी ऐसे वैसे देश मे होता तो —- ऊपर वाले ने हमारी किस्मत चमकादी जिसने हमें एक आज़ाद और खुशहाल देश का शहरी बनाया और बाकी दुनिया की नज़रों मे इज़्ज़त दी जिस पर फखर से कहने को दिल करता है हम हिन्दुस्तानी हैं।

अगस्त 15, 2006 at 7:09 पूर्वाह्न 3 टिप्पणिया

दूरदर्शन उर्दू

हर किसी का मकसद होता है कि वोह जिनदगी मे कुछ करे या कुछ बने। हमारे राष्ट्रपति जनाब अबदुल कलाम को देश की सेवा करना था और वोह अपने मकसद मे कामयाब रहे। मुझे बचपन से ग्राफिक का शौक था उसमें डिप्लोमा किया और आज सुबह शाम सिर्फ ग्राफिक पर काम करता हूं। इसके अलावा एक खावाहिश और भी है कि अगर मेरे पास रुपया हो तो खुद का उर्दू टीवी चैनल ब्राडकॉस्ट करना है – पता नहीं ये अपनी खवाहिश कब पूरी होगी। ये बहुत खुशी की बात है कि आज अखिरकार भारत सरकार ने उर्दू चैनल शुरू करने का बाकाईदा ऐलान करदिया। जब मैं बंगलौर मे नौकरी कर रहा था तो मेरे हैदराबादी बॉस को भी उर्दू चैनल ब्राडकास्ट करने की सोची और तभी मैं ने खुशी और जोश के साथ मल्टीमीडिया मे भी डिप्लोमा करलिया। मगर स्पॉनसरों मे झगडा होगया कि ये इसलामी चैनल बनेगा क्योंकि भारत मे एक भी इसलामी चैनल नही है, और चंद दूसरे इसपॉनसरों ने कहा कि नही ये सिर्फ उर्दू चैनल होगा – और फिर वोह चैनल तो शुरू ना हुवा मगर मैं ने अपना मल्टीमीडिया का डिप्लोमा कम्पलीट करलिया और दिल मे ठान ली के जब हमारे पास रूपया आजाए तो उर्दू टीवी चैनल का अपना खवाब ज़रूर पूरा करेंगे। इस से पहले कि हम अपना टीवी चैनल शुरू करते भारत सरकार हमसे आगे निकल गई 😉 अब तो हम सरकारी चैनल को ही अपना समझेंगे 🙂

अगस्त 14, 2006 at 11:23 पूर्वाह्न 5 टिप्पणिया

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