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अगस्त 8, 2006 at 8:18 पूर्वाह्न 6 टिप्पणिया

अखबार का नाम “रोज़नामा इनकिलाब मुंबई”

भाषाः उर्दू

बडी हेडलाईनः “इज़राईल पर हिज़बुल्लाह का कामयाबतरीन हमला”

छोटी हेडलाईनः “हिज़बुल्लाह के कामयाब हमले से तलअबिब झल्ला उठा”

हमारी टिप्पणीः

शायद मुसलमानों को खुश करने के लिए ऐसी सुरखी लिखी है – और क्यों ना लिखे अखबार मुसलमानों का और पढने वाले मुसलमान – ज़ाहिर सी बात है हिज़बुल्लाह दूसरों के लिए आतंकवादी और मुसलमानों के लिए मुजाहिद का मुकाम रखते हैं। मगर एक अखबार किया किसी की तरफदारी कर सकता है अखबार का काम होता है कि बगैर किसी की तरफदारी किए सिर्फ खबरें छापे ना कि किसी को खुश करने के लिए। चूंके ये अखबार इन्टरनेट पर गिफ फॉरमेट मे खबरें छापता है जिसकी वजा से उसकी खबरों का यहां लिंक नही दिया जासकता – अभी थोडे दिन पहले भी इसी अखबार की एक खबर पर हम चोंक पडे सुरखी थी “इज़राईल के हमले मे पांच फिलिस्तीनी शहीद” किया ये अखबार बता सकता है कि “शहीद” किसको कहते हैं? फिलिस्तीनियों ने ऐसा कौनसा कारनामा कर दिखाया कि उन्हें शहीद के अलकाब से नवाज़ें। जबकि इस्लाम मे शहीद उसको कहते हैं जो इस्लाम के लिए लडते हुवे मरे। मगर फिलिस्तीन और इज़राईल दोनों आपस मे पुराने दुश्मन एक-दूसरे को मारते हैं – यही अगर फिलिस्तीनी इज़राईलियों को मारे तो वोह सिर्फ मरे और इज़राईल फिलिसतीनियों को मारे तो वोह शहीद। किया ये फिलिसतीनी इस्लाम के लिए लड रहे हैं जिन्हें इस्लाम किया चिज़ पता ही नही।

इसी अखबार मे ऐसी बहुत सारी खबरें गुज़र चुकी हैं जो शायद सिर्फ मुसलमानों को खुश करने के लिए लिखा जाता है। हम ने भी ज़मानों से अखबारों मे काम किया है – अखबार किसी की तरफदारी नही कर सकता उसे बगैर जानिबदारी के खबरें छापना है। मेरा पूछना ये था कि कुछ खास लोगों के लिए खबरें छापे तो किया वोह अखबार है?

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Entry filed under: खबर पर नज़र, दुबई.

नई बातें – नई सोच पहला नशा

6 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. Anunad  |  अगस्त 8, 2006 को 10:10 पूर्वाह्न

    वाह भाई! सही कहा है, अखबार को समाचार देना चाहिए, किसी का खुलेआम पक्ष नहीं लेना चाहिये।

  • 2. Manish  |  अगस्त 8, 2006 को 12:27 अपराह्न

    सहमत हूँ आपके विचारों से !

  • 3. Laxmi N. Gupta  |  अगस्त 8, 2006 को 5:42 अपराह्न

    बिलकुल कायदे की बात कही है, आप ने।

  • 4. ई-छाया  |  अगस्त 8, 2006 को 7:09 अपराह्न

    सहमत हूं जनाबेआली

  • 5. pratyaksha26  |  अगस्त 9, 2006 को 4:16 पूर्वाह्न

    बिलकुल सही कहा

  • 6. SHUAIB  |  अगस्त 10, 2006 को 12:15 अपराह्न

    Anunad जी, Manish जी, गुप्ताजी और ई-छायाजी और . pratyaksha जी – आप सब का धन्यवाद 🙂

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