मुबारक हो जनाब

अगस्त 25, 2006 at 6:05 पूर्वाह्न 12 टिप्पणिया

घर से निकलते वकत अम्मी ने बहुत समझाया के कुछ तो खाना पकाना सीखले, वहां जाकर क्या खाएगा? हम ने दो टोक जवाब दिया थाः वहां जाकर देखा जाएगा। अम्मी ने कहाः अंडा फिराई करना तो सीखले। हमारा जवाब थाः अभी जाने के वकत क्या किया सीखना पडेगा और ऊपर से टाइम भी बहुत कम है हमारे पास। अब यहां आए चार वर्ष होने को हैं, होटलों का खा खाके अदनान समी को भी पीछे छोड दिया – वैसे भी होटलों मे पकने वाले खानों से हर कोई वाकिफ है और हमेशा होटलों का खाने से अजीबवगरीब बीमारियाँ? वहां घर के खानों मे नकस निकालना और मस्ती करना, कितना भी अच्छा पका हो फिर भी मां को कोसना के क्या ऐसा पकाया है?। हर किसी को घर से दूर घर का खाना बहुत याद आता है। खैर हमने घर का खाने के लिए जो मस्ती की थी अब उसकी सज़ा भी भुगत रहे हैं। घर से दूर इतने वर्षों बाद आज पहली बार तीन अंडे बरबाद करने के बाद आखिरकार चौथा अंडा फिराई करने मे हम कामयाब रहे – मुबारक हो जनाब 🙂

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इनसे मिलो -29 इनसे मिलो – 30

12 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. pratyaksha26  |  अगस्त 25, 2006 को 7:37 पूर्वाह्न

    अगली बार पहला अंडा ही फ्राई कर लेंगे । वाकई बधाई देने लायक काम किया है 😉

  • 2. जगदीश भटिया  |  अगस्त 25, 2006 को 9:44 पूर्वाह्न

    शोहेब भाई, एक बार खुद खाना बनाने की लत लग गई तो बाजार का भूल जायेंगे। वैसे भी पुरुष महिलाओं से ज्यादा स्वादिष्ट खाना बनते हैं हमेशा।

  • 3. संजय बेंगाणी  |  अगस्त 25, 2006 को 9:50 पूर्वाह्न

    जितना काम सिख सको उअतना अच्छा हैं, बस होने वाली बीवी को पता नहीं चलना चाहिए की आपको खाना पकाना भी आता हैं, वरना भाटीयाजी की सी हालत होगी और कहते फिरोगे,”महिलाओं से ज्यादा स्वादिष्ट खाना बनते हैं हमेशा।” 😉

  • 4. समीर लाल  |  अगस्त 25, 2006 को 12:26 अपराह्न

    बधाई हो, शुऎब भाई.
    अब स्तर बड़ाकर थोड़ा आमलेट वगेरह भी सीख लो.
    🙂

  • 5. प्रभात  |  अगस्त 25, 2006 को 12:33 अपराह्न

    तो शुएब तुम अब कबूल कर ही रहे हो कि तुम्हारी अदनान सानी से समानता है।

  • 6. Laxmi N. Gupta  |  अगस्त 25, 2006 को 1:38 अपराह्न

    मुबारक हो। चाय तो बना ही लेते होगे। मैंने बीवी के लिये पहिले दिन चाय बनाई थी, तब से आज तक बना रहा हूँ। संजय की बात गाँठ बाँध लो।

  • 7. आशीष  |  अगस्त 25, 2006 को 1:38 अपराह्न

    मुबारक हो….

  • 8. मनीष  |  अगस्त 25, 2006 को 1:40 अपराह्न

    बधाई हो भाई !

  • 9. ई-छाया  |  अगस्त 25, 2006 को 7:14 अपराह्न

    मैने पहले से ही सावधानी बरती, एकाध बार कचरा किया और आज तक पत्नी मुझे किचेन में न घुसने देने के लिये कटिबद्ध है।

  • 10. अनूप शुक्ला  |  अगस्त 26, 2006 को 1:49 पूर्वाह्न

    ये तो बड़ा कमाल का काम किया! बधाई!

  • 11. Sindhu  |  अगस्त 26, 2006 को 4:03 पूर्वाह्न

    बधाई। 🙂
    खाना बनाना बहुत आसान है भैया… एक विद्या जो ज़िन्दगी में काम आएगी। 🙂

  • 12. प्रेमलता पांडे  |  अगस्त 29, 2006 को 3:16 अपराह्न

    बहुत अच्छे!!!

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