इनसे मिलो – 30

अगस्त 30, 2006 at 1:21 अपराह्न 9 टिप्पणिया

ये ख़ुदा है

आज ख़ुदा नींद मे वनदे मातरम् बडबडाया तो अमेरिका की चीखें निकल पडीं, पिछले दो वर्षों से ख़ुदा हमारी अपनी क़ैद मे है और उसे अभी तक अमेरिका से बाहर जाने नही दिया। जापान ने अमेरिका को वारनिंग लिख भेजाः बस बहुत होगया, अब ख़ुदा को अमेरिका से बाहर निकलना ही होगा सारी दुनिया उसकी झलक देखने बेताब है – अगर अमेरिका ने ख़ुदा को आज़ाद नही किया तो वरना —- हम भी मुख़तलिफ किसम के ख़ुदा बना कर बेच देंगे। दूसरी तरफ राशिया, कोरिया और सिंगापुर ने भी जापान की हिमायत करदी, वोह दिन दूर नही जब हर देश का अपना ख़ुदा होगा। मगर अमेरिका की खुश-किस्मती सबसे बढिया खुदा उसकी अपनी क़ैद मे है, ख़ुद अमेरिका ने कहाः ख़ुदा का शुक्रिया के ख़ुदा हमारी क़ैद मे है। सबुह उठ कर ख़ुदा ने सबसे पहले अज़ाँ दीः ख़बरदार दुनिया वालों, जो अमेरिका को ताक़तवर नही मानता वोह हम मे नही – और लानत हो उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी पर उंगली उठाए। आज ख़ुदा ने अमेरिका से भारत यात्रा की इजाज़त चाही, अमेरिका ने मना करदियाः ख़ुदा का भारत यात्रा करना ख़तरनाक है क्योंकि वहां कोई एक धर्म नही बल्कि ऐसे वैसे लोगों का देश है के आपका एक बाल मिल जाए तो मज़ार बनादें, दूध से नेहला कर आपके सर पर नारियल तोड सकते हैं यहां तक के आपके कपडे फाड कर अक़ीदत से खाजएंगे फिर उसके बाद किसी तालाब मे डूबा कर आपको घुला देंगे। अच्छा है आप अमेरिका ही मे रहें, यहां धार्मिक लोग कम इनसान ज़्यादा हैं और यहां किसी किस्म का भेद भाव भी नही। इतना सुनकर ख़ुदा ख़ौफ के मारे भारत यात्रा का प्लान कैनसल करदिया और सरकारी न्यूज़ चैनल पर भारत को पैग़ाम भेजाः दुनिया के महान देश भारत को हमारा यानी ख़ुदा का सलाम, बडी तमन्ना थी भारत यात्रा की पर किसी वजह से टालना पडा। आज भारत मे वनदे मातरम् पर इतना हल्ला क्यों मचाया जारहा है, आख़िर क्या ज़रूरत थी एक से एक धर्मों को जनम देने की? किसी को वनदे मातरम् पढना पसंद है और किसी को नहीं ये अलग बात है – अगर आप अपने देश को खुश हाल और तरक्की दिलाना चाहते हो तो देश भक्त बनो देश के गीत गाओ और अगर कोई देश की शान मे गीत ना गाए तो समझो वोह इस देश का नही — जारी

बाकी फिर कभी

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मुबारक हो जनाब ये क्या बकवास है?

9 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. रवि  |  अगस्त 30, 2006 को 1:44 अपराह्न

    बढ़िया 🙂

    आपके लिखने के लिए एक और मसाला है-

    http://www.indianexpress.com/story/11677.html

    इस पर भी कुछ लिखें, यह अनुरोध है.

  • 2. ई-छाया  |  अगस्त 30, 2006 को 7:20 अपराह्न

    बहुत खूब। उम्दा लिखा है जबाबेआली।

  • 3. समीर लाल  |  अगस्त 30, 2006 को 11:00 अपराह्न

    बहुत अच्छा लिखा है, शुऎब.

  • 4. संजय बेंगाणी  |  अगस्त 31, 2006 को 3:56 पूर्वाह्न

    पसन्द आया.
    सच में प्रेम और आदर जबरदस्ती तो पैदा किये नहीं जा सकते और बिना मन को वन्देमातरम गाना, न गाने बराबर हैं.

  • 5. मनीष  |  अगस्त 31, 2006 को 7:02 पूर्वाह्न

    अच्छी सोच है आपकी !

  • 6. शेखचिल्ली  |  अगस्त 31, 2006 को 7:42 पूर्वाह्न

    भारत में भाजपा और अर्जुन सिंह, दो ऎसे खाली दिमाग़वाले हैं जो शैतान के घर हैं और जिनका काम ही सिर्फ़ यही है कि देश को बांटने वाले विवाद पैदा करें। वर्ना लोगों को याद कैसे रहेगा कि इनका भी अस्तित्व है।

  • 7. जगदीश भाटिया  |  अगस्त 31, 2006 को 8:54 पूर्वाह्न

    क्या लिखा है शोहेब भाई, वाह.

  • 8. अमिताभ त्रिपाठी  |  अगस्त 31, 2006 को 11:23 पूर्वाह्न

    आपको तो अमेरिका ही चले जाना चाहिये. साहब ये बातें इसलिये कर पा रहे हैं कि आप भारत में हैं. यूरोप और अमेरिका में होते तो हवाई अड्डे के बाहर अलग लाइन बनाकर मुसलमान हो की कीमत चुका रहे होते.

  • 9. निधि  |  अगस्त 31, 2006 को 12:04 अपराह्न

    बहुत ख़ूब शोएब भाई!

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