Archive for सितम्बर, 2006

पाकिस्तान मे अंधेरा

अभी मुशर्रफ अमेरिका पहुंचे ही थे कि पाकिस्तान मे अंधेरा छा गया मानो जैसे मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति ही नही बल्कि उनके देश के रोशन चिराग भी हैं। कल रात जहां पाकिस्तान मे रमज़ान का पहला रोज़ा था, सभी पाकिस्तानियों ने अंधेरे की वजह से मुशर्रफ को लम्बी लम्बी गालियाँ देते हुए पहला रोज़ा पकडा। अंदर की बात ये है के अब पाकिस्तान को इमली चटाने के दिन करीब आए (शायद), अमेरिका ने हुकम दे दिया कि उसामा बिन लादिन की तलाश अब पाकिस्तान मे शुरू की जाए अगर वो ना भी मिले फिर भी तलाशे-जुसतजू जारी रखे ताकि इसी बहाने पाकिस्तान पर अमेरिका ने जो कुछ मेहरबानियाँ की थीं, अब वक्त आ चुका है कि पाकिस्तान से पाई पाई का हिसाब लें। और कल ही मुशर्रफ साहब ने न्यूयार्क मे अपना हेल्थ चैकअप भी करवा लिया – बताया जाता है कि वर्षों बाद उन्हों ने अपना ये चैकअप करवाया है। उधर थाईलैंड मे भी इस वक्त हालत कुछ वैसे ही है जैसे मुशर्रफ ने अपने देश मे कभी करवाया था। हमारी दुआ है कि खुदा ना करे थाईलैंड की हालत पाकिस्तान जैसी ना बने।

सितम्बर 25, 2006 at 8:12 पूर्वाह्न 11 टिप्पणिया

फिर रमज़ान आया

हर वर्ष दुबई मे शॉपिंग फेसटिवल मनाया जाता है और शारजाह मे रमज़ान का फेसटिवल मनाने की रिवायत है मानो मुखतलिफ फेसटिवलों को इस देश के सात राष्ट्रों ने आपस मे बांट रखा है। कोई भी फेसटिवल हो मकसद एक ही है पैसा कमाना और दबा कर कमाना।

आज रमज़ान का पहला दिन है, यहां पूरे शारजह शहर को दुल्हन की तरह सजा दिया, जगह जगह मेले भी लगे हैं और हर मेले मे वही चैनीज़ आइटम्स, कपडे, अनोखे सिगार, सिगरेट, झूले झमके वगैरह वगैरह। सुबह से शाम तक पूरे UAE मे खाने की दुकानों होटलों वगैरह सब बंद रहते हैं – सभी मुसलमानों को रोज़ा रखने का हुकम है और गैर मुस्लिम लोग सिर्फ अपने घर पर ही खा सकते हैं। रमज़ान का पूरा महीना होने तक अगर कोई रास्ते मे सडकों, पार्कों आदी जगहों मे कुछ खाया पिया तो उसे पुलिस पकड ले जाती है फिर जुर्माना भी मांगती है या फिर छोटी मोटी सज़ा भुगतनी पडेगी। गैर मुसलिम अगर फैमली वाला हो तो खैर मगर बैचलर्स लोग जिन्हें खाना पकाना नही आता और वोह लोग जो सिर्फ होटलों से खाते हैं, उन बेचारों को मुसलमानों की तरह शाम तक भूका रह कर होटलों के खुलने का इनतेज़ार करना पडेगा।

सितम्बर 23, 2006 at 9:21 पूर्वाह्न 11 टिप्पणिया

26 वर्ष पूरे हुए

आज पहली बार कहना पड रहा है कि अब मुझे भी ज़िन्दगी के 27 वर्षों का तजुर्बा है 🙂 और ऐसे खुशी के मौके पर अपने एक फज़ूल मित्र ने हमारे सर पर दो सफेद बाल ढूंड कर साबित करदिया के ये हमारे बुढापे की ओर पहला कदम है 😦 खैर – अपने बुढापे की ओर बढते कदम का अफसोस नही, हर किसी को एक ना एक दिन बूढा होना ही है मगर खुशी की बात तो ये है कि अब सीना तान कर दुनिया से कहना है “हम भी ज़माने के 27 वर्ष देख चुके हैं” 🙂

रात बारह बजते ही हमेशा की तरह भारत और पोलैंड से sms की भरमार शेर व शायरी, लम्बी उम्र की दुआऐं उसके अलावा ई-मेल से ई-कार्डस् वगैरह। सवए हमारे बाकी बहुत से लोगों को खुशी हुई के हम 27 वर्ष के हो गए – अपने को कुछ ज़्यदा खुशी नही हुई क्योंकि पिछले वर्ष जो बहुत से काम करने थे वोह पूरे नही किए, उन कामों मे अपनी छोटी बेहन की शादी भी करवानी थी। खैर – पिछले वर्ष जो कुछ नही हुवा उसे अब जल्दी जल्दी निपटाना होगा (यानी अपना रात दिन एक बनाना है)

पिछले चार वर्षों से यहीं अपनी उम्र बढाई की रस्म (बर्थडे पार्टी) मनाई जा रही है – इस बार भी एक बढिया केक बनवा कर अपने फ्लैट मे अपने चंद मित्रों के बीच ज़ोरदार तालियों के साथ केक काट दिया 🙂 खुद कमरा सजाया, टेबुल कुर्सियों का इनतेज़ाम किया – अपनों से बिछडने का बहुत अफसोस हो रहा था – वोह भी क्या दिन थे के हमारे जन्मदिन के रोज़ अपनी दोनों बेहनें पूरे घर को सजाति संवर्ती और उस दिन अम्मी मेरे पसंद के सभी मज़ेदार खाने बनाते थे और फिर शाम को सब मिल कर मेरे केक लाने का इनतेज़ार करते 🙂 आज जब दोपहर को अम्मी से फोन पर बात हुई तो वोह भी उन दिनों को याद करके खूब रोई।

सितम्बर 12, 2006 at 5:22 अपराह्न 19 टिप्पणिया

इनसे मिलो – 31

ये खुदा है

आज उसामा बिन लादिन ने अपना ताज़ा वीडियो डाइरेक्ट खुदा के नाम भेज दिया जिसमे वोह बंदूक पकडे अपनी रिवायती खबरदार उंगली को खुदा की तरफ नचाते हुए कहाः

सभी तारीफें अमेरिका के लिए जो निहायत ही गज़बनाक और दुनिया का चौकिदार है – पहले तो हम हर काम खुदा की तारीफ से शुरू करते थे, अब क्योंकि खुदा कि चाल चलन से साफ ज़ाहिर है के वोह भी अमेरिका का तरफदारी है – हम मुजाहिदीन सिर्फ इनतेज़ार ही करते रहे कि एक ना एक दिन खुदा हमारी मदद को ज़रूर आएग और वोह आया भी तो सीधा अमेरिका मे उतरा। वाह क्या खाख ज़िन्दगी पाई हमने? सोचा था अपने नेक कर्मों की वजह से खुदा खुश होकर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम देगा मगर वोह खुद जन्नत छोड यहां अमेरिका मे आ बसा – अफगान, ईराक, चैच्निया मे इनतेज़ार करते ही रहे कि खुदा बचाने ज़रूर आएग मगर खुदा ने अपनी औकात दिखलादी के वोह भी अमेरिका के आगे कुछ नहीं। ए दुनिया के दाता, ज़रा ये तो बता आखिर ये कैसा सिस्टम है तेरा? हम तेरी खातिर मरते-मारते हैं, दुनिया भर मे आतंक मचाते हैं ताकि जन्नत मे एक छोटा सा झोंपडा मिल जाए मगर तूने हमसे पूरे काम लिए फिर दुनिया ही मे खाख चटादी? हमारी समझ मे नही आ रहा कि हम किस के लिए काम कर रहे हैं? अब तू ही बता दे आखिर हमें कौनसा धर्म अपनाना होगा ताकि दूसरों की तरह हम भी सर उठाकर जिएं। माता पिता के वरसे मे जो धर्म मिला, मज़हबी पढाई हम पर फर्ज़ हुई और जब पढलिया तो ज़हन ऐस बन गया कि दूसरे धर्मों के लिए नफरत जगाली, लिबास तबदील किया, गले मे खुजली के बावजूद छाती तक डाढी छोडी फिर जन्नत मे सबसे ऊँचा मुकाम पाने के लिए जिहाद का पेशा अपना लिया इसके बावजूद आज भी हम दुनिया भर मे बेइज़्ज़त ठेहरे? दुनिया के सभी देश एक होकर हमें नाकों चने चबवा रहे हैं। हम तसव्वुर करते ही रहे कि खुदा की मदद करीब है मगर हमेशा मूंह की खानी पडी। दुनिया भर मे हमारे मुजाहिदीन को चुन चुन कर कुत्तों की तरह मारा जा रहा है। उन मरने वाले मुजाहिदीन को शहीद कहते हुए भी शर्म आती है क्योंकि उनके चेहरे पहचानने लायक भी नही छोडते। शहीदों को जन्नत नसीब है मगर खुदा खुद अमेरिका मे ऐश कर रहा है। किस्से कहानियों मे हमेशा जिहाद की विजय लिखा है और हमने जहां कहीं भी जिहाद किया हमेशा मुंह की खानी पडी। काश खुदा भी एक मुजाहिद होता, क्योंकि एक मुजाहिद ही दूसरे मुजाहिद का दर्द समझता है। हम इस वकत बहुत ही कनफ्युज़न का शिकार हैं, पहले तो अपने आप को बहुत बडा मुजाहिद समझा, चंद लोगों ने हौसला क्या बढाया कि खुद को वलीयों मे तस्वुर कर बैठे – हमें क्या मालूम था कि दुनिया वाले हमारे इस पवित्र पेशे को आतंकावी समझते हैं? कुछ समझ नही आरा कि आखिर हमारी ज़िन्दगी का मकसद क्या है? (उसामा के आंसू निकल पडे) हमे इनसानियत के पवित्र मुकाम से निकाल कर मज़हब मे फैंक दिया फिर हमने ऐसा कौनसा गुनाह किया कि जिहादी ग्रुह का लीडर बना दिया जहां रुसवाई, शर्मिन्दगी के बाद फिर आखिर मे बहुत बुरी मौत है – जब हमें मुजाहिद बना ही दिया तो फिर जानवर बनने मे देर नही – काश आप हमें जानवर ही बना देते या फिर इनसानों मे पैदा ही ना करते तो आज अपनी ऐसी बुरी हालत ना होती। (उसामा ने रुमाल से अपने आंसू पुंछे और खुदा की तरफ घूरते हुए कहा) इस वीडियो कैसेट के ज़रिए आज इकरार करता हूं, जिहादी नौकरी छोड कर क्म्प्यूटर इन्जीनियर बनना चाहता हूं और अपनी बाकी ज़िन्दगी इनसानों की तरह जीना चाहता हूं।

सितम्बर 9, 2006 at 12:47 अपराह्न 1 टिप्पणी

मुस्लमानों ने कहाः

“वनदे मातरम्” के सौ साल पूरे होने पर कल चंदीगढ (पंजाब) के चंद मुस्लमानों ने बीच सडक पे आकर वनदे मातरम् का गीत गाया

(ये तसवीर हैदराबाद के उर्दू अखबार ऐतिमाद मे आज छपी है)

नोटः ये अखबार इन्टरनेट पर गिफ फॉरमेट मे पबलिश होता है, पता नही वोह तसवीर अब तक रहेगी या नही।

सितम्बर 7, 2006 at 7:42 पूर्वाह्न 12 टिप्पणिया

Hindi Icons – भाग १

मुझे बचपन से ग्राफिक का शौक है, अब जब इन्टरनेट की हिन्दी दुनिया मे आया हूं तो कुछ कमाल करना चाहता हूं 🙂 ये नीचे जो गिफ तसवीरें हैं, इन्हें Corel R.A.V.E (Beta) पर बनाया है – अब ये आप हिन्दी दोस्तों पर है कि इसे पसंद करें तो आगे और भी बेहतरीन हिन्दी अनीमेटद आईकोन्स बनाऊँगा, वैसे ये पहला भाग है यानी एक तजरुबा 🙂

             

              

 

             

सितम्बर 4, 2006 at 6:39 अपराह्न 21 टिप्पणिया

आतंकवादी स्कूल

कश्मीर-इन्फोर्मेशन डाट कॉम से ये चित्र मिला

सितम्बर 2, 2006 at 6:21 पूर्वाह्न 3 टिप्पणिया

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