अलविदा

सितम्बर 1, 2006 at 10:43 पूर्वाह्न 5 टिप्पणिया

आज से दस वर्ष पहले जहां मैं नौकरी कर रहा था, PageMaker सॉफ्टवेयर को कॉपी करने के लिए तकरीबन बीस बार फ्लॉपी मे कॉपी करना पडा – तब जाकर पूरा एक सॉफ्टवेयर कॉपी करने मे काम्याबी हुई ;(

उस वकत खयाल आया काश अपने पास कुछ ऐसी चीज़ हो के एक ही बार मे पूरा सॉफ्टवेयर कॉपी होजाए 🙂 तभी बाज़ार मे CD आगई और अपनी मुराद पूरी हुई। अब अपने पास क्म्प्यूटर फाईलों का खज़ाना ऐसा है के CD बनाते इतनी CD’s होगई संभालना मुश्किल हो गया। फिर दिल मे खयाल आया काश कुछ ऐसी छोटी डिब्बिया मिल जाए जिसमे अपना तमाम कम्प्यूटर खज़ाना समा जाए। आआह 🙂 ये दिन भी आगया, बहुत खुशी हुई के USB ड्राइव आगई जिससे अपना सीडी खज़ाना को उठा कर कोने मे रख दिया। सबसे पहले Dhs. 160 (1,920 रूपये) मे 128MB वाला USB ड्राइव खरीदा जो मेरे कुछ काम का नहीं क्योंकि अपनी PSD और CDR फॉर्मेट वाली एक ग्राफिक फाइल का साइज़ ही 50MB के ऊपर होता है। पिछले वर्ष फिर मैने Dhs. 290 (3,480 रूपये) मे 1GB वाला USB ड्राइव खरीदा (जो इस वकत खराब है और सर्विस को भेज दिया) ये 1GB का युएसबी भी पूरी तरह फुल है अब मुझे 5GB वाला ड्राइव खरीदना पडेगा जिसके सिवा दूसरा कोई चारा नही ;(

अब तो मोबाईल के लिए भी एक से दो जीबी के MMC कार्ड बाज़ार मे आगए। वाह क्या ज़माना है – वोह KB की फाईलों को फ्लॉपी मे कॉपी करना और आज GB को USB मे ठूंसना 🙂
सीडी और फ्लापी को अलविदा

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Entry filed under: टेक्नोलॉजी.

ये क्या बकवास है? आतंकवादी स्कूल

5 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. समीर लाल  |  सितम्बर 1, 2006 को 12:11 अपराह्न

    बहुत तेजी से इस क्षेत्र मे विकास हो रहा है. आज जो विषय विचार मे भी नही होते, वो कल बज़ार मे दिखने लगते हैं.

  • 2. संजय बेंगाणी  |  सितम्बर 1, 2006 को 1:18 अपराह्न

    सचमुच में डेटा लाना लेजाना कितना आसान हो गया हैं. मेमोरी कार्ड को देख कर तो आश्चर्य होता हैं, इतना डेटा इसमें ठूंसते कैसे हैं?

  • 3. सागर चन्द नाहर  |  सितम्बर 1, 2006 को 4:14 अपराह्न

    सुहैब भाई
    कृपया इस तरह के खतरनाक शीर्षक (Tital) ना रखा करें, इस शब्द से डर लगता है, कि अब सुहैब भाई को क्या हुआ कि अलविदा कह रहे हैं।

    कुछ दिन ठहरिये आप को यह चिप भी बड़ी लगने लगेगी।:)

  • 4. राजीव  |  सितम्बर 1, 2006 को 6:20 अपराह्न

    सही कहा आपने नाहर जी, जी हाँ ऐसे शीर्षक तो बड़े डरावने लगते हैं। आपने भी ऐसे ही डरा दिया था हमें और रही चिप के आकार की बात तो शायद आपका मतलब है – थोड़े ही दिनों में यह चिप भी आकार में बड़ी और क्षमता में छोटी लगने लगे ।

  • 5. Amit  |  सितम्बर 2, 2006 को 11:19 पूर्वाह्न

    अजी क्या बात करते हो शुएब साहब, यह तो कुछ भी नहीं!! कभी कंप्यूटर में 2-3GB की हार्डडिस्क लगती थी और वही बड़ी लगती थी, फ़िर वह छोटी लगने लगी तो 20GB और फ़िर 40GB की आई। आज हाल यह है कि मुझे अपनी 160GB की USB HDD भी छोटी लगती है। अब तो मैं उस 1TB वाले मेमोरी क्यूब का इंतज़ार कर रहा हूँ जो कि आने वाले समय में जल्द ही बाज़ार में आएगा!! 😉

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