फिर रमज़ान आया

सितम्बर 23, 2006 at 9:21 पूर्वाह्न 11 टिप्पणिया

हर वर्ष दुबई मे शॉपिंग फेसटिवल मनाया जाता है और शारजाह मे रमज़ान का फेसटिवल मनाने की रिवायत है मानो मुखतलिफ फेसटिवलों को इस देश के सात राष्ट्रों ने आपस मे बांट रखा है। कोई भी फेसटिवल हो मकसद एक ही है पैसा कमाना और दबा कर कमाना।

आज रमज़ान का पहला दिन है, यहां पूरे शारजह शहर को दुल्हन की तरह सजा दिया, जगह जगह मेले भी लगे हैं और हर मेले मे वही चैनीज़ आइटम्स, कपडे, अनोखे सिगार, सिगरेट, झूले झमके वगैरह वगैरह। सुबह से शाम तक पूरे UAE मे खाने की दुकानों होटलों वगैरह सब बंद रहते हैं – सभी मुसलमानों को रोज़ा रखने का हुकम है और गैर मुस्लिम लोग सिर्फ अपने घर पर ही खा सकते हैं। रमज़ान का पूरा महीना होने तक अगर कोई रास्ते मे सडकों, पार्कों आदी जगहों मे कुछ खाया पिया तो उसे पुलिस पकड ले जाती है फिर जुर्माना भी मांगती है या फिर छोटी मोटी सज़ा भुगतनी पडेगी। गैर मुसलिम अगर फैमली वाला हो तो खैर मगर बैचलर्स लोग जिन्हें खाना पकाना नही आता और वोह लोग जो सिर्फ होटलों से खाते हैं, उन बेचारों को मुसलमानों की तरह शाम तक भूका रह कर होटलों के खुलने का इनतेज़ार करना पडेगा।

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11 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. PRABHAT TANDON  |  सितम्बर 23, 2006 को 10:15 पूर्वाह्न

    शुएब भाई,
    सबसे पहले तो रमजान मुबारक। खाने पीने का इन्तजाम कुछ कर लो, मै आप की मुसीबत समझ सकता हूँ, भूख ज्यादा ही लगती होगी इन दिनो।

  • 2. SHUAIB  |  सितम्बर 23, 2006 को 10:44 पूर्वाह्न

    सच कहते हो प्रभात भाई – इन दिनों भूक कुछ ज़यादा ही लगती है 😦

  • 3. संजय बेंगाणी  |  सितम्बर 23, 2006 को 11:18 पूर्वाह्न

    रमजान की मुबारकबाद. भुख की समस्या तो हैं, कुछ इंतजाम कर लो भाई. उसके बाद उत्सव हैं, मजे करो.
    आजसे यहाँ भी धुम हैं. गरबो की रौनक से राते रोशन होगी.

  • 4. pankaj बेंगाणी  |  सितम्बर 23, 2006 को 11:21 पूर्वाह्न

    यार ये नियम गलत हैं। होटल तो चालु रहने चाहिए… जो सचमुच मे रोजा रखना चाहेंगे वो थोडे ही खाने वाले हैं। पर दुसरे लोगों का तो ध्यान रखना चाहिए ना।

    जबरदस्ती काहे करते हैं….

    लेकिन बात वही कट्टरता की है… क्या करें? कोई ईलाज नहीं। अच्छा है मै दुबई नही रहता… मै तो भूखा नही रह सकता…

  • 5. मनीष  |  सितम्बर 23, 2006 को 1:30 अपराह्न

    रमजान के शुभारंभ की मुबारकबाद ! शाम को ही खाइए पर दबा कर खाइए ।

  • 6. राही  |  सितम्बर 23, 2006 को 7:01 अपराह्न

    शुऍब भाईजान,
    रमजान की मुबारकबादें.
    क्यों न आप भी इस कानुन के होने का फायदा उठायें और इसे भुखा रहने कि सजा मानने की बजाय पुण्य कमाने और उससे भी बड़ा शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने का मौका मानें. (मालुम है ऐसा कहना सिर्फ उपदेश देने वाली बात है, पर फिर भी …)

  • 7. rachanabajaj  |  सितम्बर 24, 2006 को 9:03 पूर्वाह्न

    ओह शुएब भाई, आपने ये जानकारी देकर हमारी चिन्ता को बढा दिया है!!

  • 8. आशीष  |  सितम्बर 25, 2006 को 3:49 पूर्वाह्न

    शुएब भाई ,रमजान की मुबारकबाद.

  • 9. faizan  |  सितम्बर 2, 2008 को 3:33 पूर्वाह्न

    Ramjaan barkut ka mahina hai. Es Mahine mai rahmat Barasti hai.
    Roza subko rakhne Chaiye.

  • 10. faizan  |  सितम्बर 2, 2008 को 3:38 पूर्वाह्न

    mery Aur se subke liye ramjaan ki mubarakbaat

  • 11. akhter  |  जुलाई 31, 2011 को 6:14 अपराह्न

    ye sab galat bat he koi hotel band nhi rehte bas aap khule huwe mahol me nhi kha skte ye to be rozdar pr bhi lagu hota he ki rozdar ki izzat kre pls logo me galatfhemi mat felao

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