पाकिस्तान मे अंधेरा

सितम्बर 25, 2006 at 8:12 पूर्वाह्न 11 टिप्पणिया

अभी मुशर्रफ अमेरिका पहुंचे ही थे कि पाकिस्तान मे अंधेरा छा गया मानो जैसे मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति ही नही बल्कि उनके देश के रोशन चिराग भी हैं। कल रात जहां पाकिस्तान मे रमज़ान का पहला रोज़ा था, सभी पाकिस्तानियों ने अंधेरे की वजह से मुशर्रफ को लम्बी लम्बी गालियाँ देते हुए पहला रोज़ा पकडा। अंदर की बात ये है के अब पाकिस्तान को इमली चटाने के दिन करीब आए (शायद), अमेरिका ने हुकम दे दिया कि उसामा बिन लादिन की तलाश अब पाकिस्तान मे शुरू की जाए अगर वो ना भी मिले फिर भी तलाशे-जुसतजू जारी रखे ताकि इसी बहाने पाकिस्तान पर अमेरिका ने जो कुछ मेहरबानियाँ की थीं, अब वक्त आ चुका है कि पाकिस्तान से पाई पाई का हिसाब लें। और कल ही मुशर्रफ साहब ने न्यूयार्क मे अपना हेल्थ चैकअप भी करवा लिया – बताया जाता है कि वर्षों बाद उन्हों ने अपना ये चैकअप करवाया है। उधर थाईलैंड मे भी इस वक्त हालत कुछ वैसे ही है जैसे मुशर्रफ ने अपने देश मे कभी करवाया था। हमारी दुआ है कि खुदा ना करे थाईलैंड की हालत पाकिस्तान जैसी ना बने।

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फिर रमज़ान आया ये खुदा है – 32

11 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. meriduniya  |  सितम्बर 25, 2006 को 1:11 अपराह्न

    कहते हैं ना “बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी”. पाकिस्तान का भी वही हाल होना हैं. दो पाटो के बीच पीस जाएगा.

  • 2. pankaj बेंगाणी  |  सितम्बर 25, 2006 को 1:12 अपराह्न

    मुश जैसा नौंटकीबाज नही देखा… पर बन्दा अब तक पाकिस्तान को काबु किए हुए है…. जाने कब रूखशत होगा

  • 3. PRABHAT TANDON  |  सितम्बर 26, 2006 को 12:03 अपराह्न

    ‘यह तो होप्ना ही था, एक मै और एक तू ,दोनो मिले इस तरह………’

  • 4. जगदीश भाटिया  |  सितम्बर 26, 2006 को 1:13 अपराह्न

    उनको देख कर आजकल ये ख्याल आता है,
    बुझने से पहले जैसे दिया जोर से फड़फड़ाता है।
    ये गये तो कोई और इन जैसा आयेगा
    जैसा देश होगा वैसा ही नेता पायेगा।

  • 5. आशीष  |  सितम्बर 27, 2006 को 3:25 पूर्वाह्न

    इतिहास गवाह है पाकिस्तान के किसी भी सैन्य शाशक का अंत दूखद ही रहा है।
    और लोकतांत्रीक ढन्ग से चुने गये शाशक हमेशा ही हटा दिये गये है।

    मुशर्रफ के दिन भर गये है, उनकी किताब उनके ताबूत मे आखरी कील साबित होगी। पाकिस्तान जैसे देश मे उसके शाशक का स्विकारना कि उसे अमरीका ने धमकी दी थी और वह झुक गया था, कोई सहन नही करेगा !

  • 6. अतुल  |  अक्टूबर 24, 2006 को 7:16 अपराह्न

    कुछ भी कहो मुशर्रफ के दिल में पाकिस्तान के लिये जो भावना है वैसी भावना हमारे किसी भी नेता के दिल में नहीं है 😦

  • 7. मूषकर जी का इंटरव्यू « आईना  |  नवम्बर 5, 2006 को 5:14 अपराह्न

    […] जवाब: ओये ! जब तुम्हारे घर में घंटों बिजली जाती है तो कोई कुछ नहीं कहता! बस एक आधा ब्लगर एक दो पोस्ट लिख देता है, हमरे यहां जब बिजली चली जती है तो तुम कहानियां बनाने लगते हो। […]

  • 8. Shrish  |  नवम्बर 7, 2006 को 10:58 पूर्वाह्न

    मैं अतुल जी से सहमत हूँ, जिस तरह मुशर्रफ पाकिस्तान के लिए कर रहे हैं, काश हमारे नेता भी भारत के लिए कुछ कर पाते।

    मुशर्रफ भारत के लिए विलेन सही पर पाकिस्तान के लिए हीरो ही है।

  • 9. मूषकर जी का इंटरव्यू | आईना हिंदी ब्लॉग  |  अगस्त 14, 2014 को 12:56 अपराह्न

    […] हमारे यहां जब बिजली चली जाती है तो तुम कहानियां बनाने लगते हो।सवाल: आपने अपनी किताब […]

  • […] हमारे यहां जब बिजली चली जाती है तो तुम कहानियां बनाने लगते हो।सवाल: आपने अपनी किताब […]

  • […] हमारे यहां जब बिजली चली जाती है तो तुम कहानियां बनाने लगते […]

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