दिन मे प्लेन गिनना

अक्टूबर 11, 2006 at 8:41 पूर्वाह्न 12 टिप्पणिया

हमारी छत के ऊपर बिलकुल करीब से हर 3 मिनट पर हर देश का हवाई जहाज़ उतरता है वो इस लिए के एरपोर्ट बिलकुल पास मे है। और हर पांचवें प्लेन की आवाज़ इतनी भयानक होती है जैसे ये अपने घर पर ही उतरे गा। कल शाम को बाहर कहीं जाने के लिए गेट खोला ही था कि नज़रों के बिलकुल सामने ऐर-इन्डिया कान फाडते हुए आया। पहले तो एक पल के लिए दिल मे खुशी की लहर दौड़ पडी क्योंकि विदेश मे अपने देश का हवाई जहाज़ आंखों के सामने था – जब वो बहुत ही नीचे यानी अपने सर पर ज़ोरदार आवाज़ से आया तो लगा कि ये अपने सर पर यकीनन गिरने ही वाला है। दिन भर यहां से दर्जनों प्लेन उतरते हैं और एक ही तरीके से सीधा उतर हैं मगर ये हमारा  ऐर-इन्डिया कुछ ज़्यादा ही नीचे से उतरा – फिर खयाल आया आखिर अपने ही देश का प्लेन है, कैसे भी उतरे उसकी मर्ज़ी और शायद उसके पाइलट सरदारजी होंगे जो सबसे अलग ही उतर रहे थे।

पिछले सप्ताह हम सब लोग शारजाह छोड दुबई चले आए – हर दिन शारजाह से दुबई आते-जाते थक चुके थे। हमारी कम्पनी ने हम लोगों का Accommodation जो पिछले चार वर्षों से खूबसूरत शहर शारजाह मे था अब दुबई मे शिफ्ट कर दिया और वो भी शहर से दूर ऐरपोर्ट के पीछे जहां बस और टैक्सी भी नही, एकदम बडी बडी सडकें, दूर दूर तक होटल और खने पीने की दुकानें तक नही – हर तरफ बडे बडे आलिशान Villas यहां सब अमीर लोग रहते हैं और इनके बीच मे हम बेचारों को डाल दिया। ना साइबर केफे है ना रेस्टुरंट। हमारे एक मित्र जो अपनी फेम्ली के साथ शारजाह ही मे रहते हैं, उन्हों ने मुझ से मज़ाक मे पूछाः जब वहां कुछ नही तो शाम को आफिस से आकर घर पर क्या करते हो? मैं ने जवाब दियाः हवाई जहाज़ गिनते हैं, कौनसे देश का कितवां प्लेन है।

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ये खुदा है – 33 ये खुदा है – 34

12 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. इदन्नम्म  |  अक्टूबर 11, 2006 को 9:43 पूर्वाह्न

    गिनते रहो शुएब भाई, टोटल करके हमें भी बता देना।

  • 2. SHUAIB  |  अक्टूबर 11, 2006 को 9:58 पूर्वाह्न

    अरे यार तुम मज़ाक कर रहे हो या सच मुच टोटल करके बताना है।

  • 3. pankaj बेंगाणी  |  अक्टूबर 11, 2006 को 11:18 पूर्वाह्न

    भाई मेरी सहानुभुति….. क्या उपाय पापी पेट क्या क्या करवाता है

  • 4. PRABHAT TANDON  |  अक्टूबर 11, 2006 को 12:23 अपराह्न

    अरे शुएब , शुक्र करो खुदा का कि प्लेन गिन रहे हो , तारे नहीं,। अगर तारे गिनते तो क्या हालत होती।

  • 5. सागर चन्द नाहर  |  अक्टूबर 11, 2006 को 12:52 अपराह्न

    किस्मत वाले हो शुऐब भाई कि प्लेन गिन रहे हो वरना लोग तो मक्खियाँ गिना करते हैं।

  • 6. आशीष  |  अक्टूबर 11, 2006 को 1:12 अपराह्न

    शुयेब भाई, प्लेन गिनना बढिया तरिका है, अगले हफ्ते जब बोर हो जाओगे तब स्टैण्डिग वाले यात्री गिनना शुरू कर देना।

    ध्यान रहे एअर होस्टेस को आंख नही मारना, उसे दिखायी नही देगा !

  • 7. समीर लाल  |  अक्टूबर 11, 2006 को 1:28 अपराह्न

    सही है, और कुछ नहीं तो गिनती में तो महारत हासिल कर ही लोगे. 🙂
    एक लिस्ट भी बना लो, कौन से देश के कितने आये, उससे भी समय अच्छा कटेगा.

  • 8. समीर लाल  |  अक्टूबर 11, 2006 को 1:29 अपराह्न

    सही है, और कुछ नहीं तो गिनती में तो महारत हासिल हो ही जायेगी. 🙂
    एक लिस्ट भी बना लो, कौन से देश के कितने आये, उससे भी समय अच्छा कटेगा.

  • 9. संजय बेंगाणी  |  अक्टूबर 11, 2006 को 2:15 अपराह्न

    भैये प्लेन गिनो या तारे पर पास में साइबर कैफे नहीं हैं तो अपना चिट्ठा-विट्ठा का कामकाज तो बाधित नहीं होगा ना. यह ज्यादा जरूरी हैं. 😉

  • 10. नितिन बागला  |  अक्टूबर 11, 2006 को 3:04 अपराह्न

    मैं क्या कहूँ…यही कहूँगा…
    दुनिया में कितना गम है…मेरा गम कितना कम है
    😉

  • 11. राकेश खंडेलवाल  |  अक्टूबर 12, 2006 को 12:53 पूर्वाह्न

    अब जुमेरा बीच इतनी दूर तो नहीं
    और बुर्ज अल अरब भी है वहीं कहीं
    शुक्र, शारजाह से गये नहीं अजमान
    तीन से आगे वरन गिनती बढ़े नहीं

  • 12. SHUAIB  |  अक्टूबर 12, 2006 को 5:33 पूर्वाह्न

    @राकेश जीः
    जुमेरा पास होते भी वहां जाने को टाइम नहीं
    हां शुक्र है शारजाह से अजमान हम गए नहीं 🙂
    पहले तो ट्राफिक मे फंसने की हमें आदत नहीं
    अब ट्राफिक मे फंसने के सिवा दूसरा चारा नहीं

    शारजाह से जुमेरा दस दिर्हम मे चले जाते थे
    अब अपने घर से जुमेरा ५० दिर्हम से कम नहीं 😦

    @ नितिन बागला जी
    हमारे गम मे शरीक होने के लिए आपका धन्यवाद।

    @ संजय बेंगाणी
    अरे यार कल रात बहुत दूर तक पैदल चलने के बाद एक साइबर केफे मिला जहां एक घंटा इन्टरनेट के Dhs. 7 हैं, मतलब 87.50 भारती 😦

    @ समीर लाल
    समीर जी सलाह देने का शुक्रिया 🙂 अब टाइम पास के लिए मैं ने दुबारा अपने कमप्यूटर पर html और Java पर हाथ साफ कर रहा हूं।

    @ आशीष आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हैं 😉 भाई, यहां अपने घर से स्टैण्डिग वाले यात्री और एअर होस्टेस दिखाई नही देते – और रही बात आंख मारने की, अरे यार आंख मारने के लिए यहां चिडया और कव्वा तक नही है 😦

    @ सागर चन्द नाहर
    ठीक कहते हो भाई के मैं किसमत वाला हूं – कम से कम प्लेनों की गिनती कर रहा हूं 😉

    @ PRABHAT TANDON
    भाई आप ठीक कहते हो कम से कम प्लेन गिन रहा हूं और भला आज तक किसी ने तारे गिने हैं।

    @ pankaj बेंगाणी
    भाई आपकी बात तो बिलकुल सच्ची है – मगर आपकी टिप्पणी पढ कर लगा की मुझे तपाने के लिए वैसा लिखा है 😉

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