छुट्टियों का चांद

अक्टूबर 19, 2006 at 5:58 पूर्वाह्न 16 टिप्पणिया

ईद के लिए यहां दो दिन मिलने वाली छुट्टियों मे हम चंद दोस्त किराए की कारें ले कर शहर से दूर घूमने चले जाते हैं। इस बार हमारा रूम्मेट बिदप्पा (मैसूर से) ने एक सेकंड कार खरीद ली है, मगर वो हमेशा सिर्फ लडकियों को घुमाते रहता है। मैं ने उससे कह दिया इस बार ईद की छुट्टियों मे हमें अपनी कार मे घुमाने ले जाए शहर से कहीं दूर जहां शोर ना हो – वो बहुत मुश्किल से माना क्योंकि उसका प्लान दो दिन लडकियों के साथ मज़े करने का था। किराए की कारों से अच्छा है अपने दोस्त की कार हो और वो भी साथ हो तो घूमने मे बहुत मज़ा आता है।

वैसे शहर मे बहुत सारी घूमने की जगहें हैं मगर दिल और दिमाग को आराम के लिए शहर से दूर जाकर घूमना अच्छा है। यहां हम परदेसियों को वर्ष मे सिर्फ यही दो दिन मिलते हैं, वरना हर दिन वही साइकिल की तरह सुबह से शाम तक आँफिस फिर शाम को घर मे – वैसे सप्ताह मे एक दिन छुट्टी होती ही है जिसमे कपडे धोने और कुछ खरीदारी करने मे पूरा दिन लग जाता है। हमारे लिए ये दो दिन छुट्टी के गनीमत हैं, ऐसा महसूस होता है जैसे पूरे साल भर की थकान इन दो दिनों मे उतारली 🙂 यहां ईद मनाने के लिए चांद देखते हैं मगर ये हमारे लिए छुट्टियों का चांद है 🙂

दिवाली की मुबारकबाद
कल जब ये तीनों चिट्ठे गिरिराज जोशी, समीर जी और फुरसतिया जी को पढा तो कुछ भी समझ नही आया जैसे कोड वर्ड मे बात चीत हो रही है 😉 अपना छोटा दिमाग है बडी बातें नहीं घुसतीं 😉 सुबह दफ्तर मे कुछ काम करलेने के बाद नारद और चिट्ठाचर्चा को सलाम करता हूं जिसके बगैर जैसे पूरा दिन अधूरा है। मगर ये हिन्दी चिट्ठे जो ब्लॉगस्पाट पर हैं, मैं वो सब चिट्ठे पढ तो सकता हूं लेकिन मेरी मजबूरी है कि उन पर टिप्पणी लिख नही सकता सिर्फ वर्ड प्रेस डाट कॉम वाले चिट्ठों को टिप्पणी दे सकता हूं। जहां तक हो सका मैं ने बहुत सारे हिन्दी चिट्ठाकारों को दिवाली की मुबारकबाद दिया, फिर भी उन लोगों के लिए जिन का चिट्ठा ब्लॉगस्पाट पर है, मैं अपनी इस पोस्ट के से सभी हिन्दी चिट्ठाकारों को दिवाली की शुभकामनाएँ और मुबारकबाद पेश करता हूं।

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Entry filed under: ये ज़िनदगी.

ये खुदा है – 35 ये खुदा है – 36

16 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. प्रतीक पाण्डे  |  अक्टूबर 19, 2006 को 7:55 पूर्वाह्न

    शुऐब भाई, आपको भी दीपावली और ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। उम्मीद है कि आपका दोस्त ज़्यादा ग़मगीन नहीं होगा 😉

  • 2. pratyaksha  |  अक्टूबर 19, 2006 को 8:07 पूर्वाह्न

    ईद मुबारक और शुभ दीपावली

  • 3. जगदीश भाटिया  |  अक्टूबर 19, 2006 को 8:09 पूर्वाह्न

    शुएब भाई, आपको भी दिवाली और ईद की हार्दिक शुभकामनाएं। आप की छुट्टीयां और त्योहार मजे से बीतें और लौट कर विस्तार से हमें भी बतायें कहां घूमे।

    समीर जी, अनूप जी और कविराज के किस्से को हम भी समझने की कोशिश कर रहे है, वैसे कोई कोई बातें ऎसी होती हैं जिनके बारे में कहा जाता है:
    “कुछ ना समझे खुदा करे कोई…….”

  • 4. premlatapandey  |  अक्टूबर 19, 2006 को 8:24 पूर्वाह्न

    ईद और दीपावली पर शुभकामनाएँ।

  • 5. अनुराग श्रीवास्तव  |  अक्टूबर 19, 2006 को 9:24 पूर्वाह्न

    शुऐब जी,

    त्योहारों पर लखनऊ बड़ा याद आता है। क्या महौल होगा इस वक्त वहां पर – नादान महल रोड पर सिवैयां लेने वालों का और पटाखे लेने वालों का ऐसा हुजूम उमड़ा होगा कि बाई गौड की कसम टोटल ट्रैफिकवा जाम हो गवा होगा।

    वहां होते तो लोग बाग सिवई खिलाते – यहाँ चीज़ केक खा कर मुंह मीठा कर लिया जएगा।

    दोनो पावन त्योहारों पर आपको शुभकामनायें।

  • 6. समीर लाल  |  अक्टूबर 19, 2006 को 11:00 पूर्वाह्न

    आपको भी ईद और दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनायें और शानदार अवकाश यात्रा के लिये शुभकामनायें.

  • 7. प्रियंकर  |  अक्टूबर 19, 2006 को 12:11 अपराह्न

    दीपावली और ईद की हार्दिक शुभकामनाएं-मुबारकबाद !

  • 8. अनूप शुक्ला  |  अक्टूबर 19, 2006 को 12:19 अपराह्न

    शुएब भाई, आपको भी मुबारकबाद. हमारा किस्सा कोताह यह था कि हम गये थे लखनऊ. समीरजी को टिका गये अपना काम. उन्होंने किया भी.कमेंट पब्लिश नहीं कर पाये क्योंकि एड्मिन राइट उनके पास नहीं थे. वे चिट्ठाडाक की मेल में आते हैं फिर उनको अप्रूव करना होता है. हम वही सब कर रहे थे.उधर से कविराज जोशी अपनी टिप्पणी का तकादा कर रहे थे. इधर माउस बहक रहा था. इसी सारे दुख का बयान किया गया है उस पोस्ट में और कोई खास बात नहीं. लेकिन मजाक करने के लिये यह भी अच्छा मजाक है कि उसे अपना मजाक समझाना पड़े.

  • 9. संजय बेंगाणी  |  अक्टूबर 19, 2006 को 1:54 अपराह्न

    लाले हमारी भी मुबारकबाद लेते जाओ. और खुब घुम फिर कर मौज करो. पुरे साल भर के लिए रिचार्ज हो जाओ. फिर हम हैं आप हैं और यह चिट्ठाजगत है.
    ईद मुबारक.

  • 10. प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह  |  अक्टूबर 19, 2006 को 2:51 अपराह्न

    दीपो की रौशनी से रौशन हो जग सारा,
    इस काम को करने का कर्तव्‍य है हमारा।

    आपको दीपावली पर्व की शुभ कामनाऐ

  • 11. उन्मुक्त  |  अक्टूबर 19, 2006 को 4:55 अपराह्न

    ईद मुबारक

  • 12. PRABHAT TANDON  |  अक्टूबर 19, 2006 को 5:37 अपराह्न

    शुएब भाई, दीपावली और ईद की बहुत-2 बधाई। लेकिन भाई , आप अपने दोस्त के कबाब मे हडडी क्यों बन रहे हो।
    और अनुराग जी,

    त्योहारों पर लखनऊ बड़ा याद आता है। क्या महौल होगा इस वक्त वहां पर – नादान महल रोड पर सिवैयां लेने वालों का और पटाखे लेने वालों का ऐसा हुजूम उमड़ा होगा कि बाई गौड की कसम टोटल ट्रैफिकवा जाम हो गवा होगा।

    लखनऊ वैसा ही है जैसा कि आप छोड के गये थे, हँ, अलबत्ता भीड और बढती जा रही है।

  • 13. इदन्नम्म  |  अक्टूबर 20, 2006 को 7:58 पूर्वाह्न

    दिवाली और ईद की हार्दिक बधाई।

  • 14. SHUAIB  |  अक्टूबर 20, 2006 को 9:35 पूर्वाह्न

    अनूपजीः
    किस्सा समझाने के लिए धन्यवाद, और ये जान कर अपने आप पर हंसी आई को वो सब मज़ाक था जो मुझे समझ ना आया 😉 🙂
    भाटिया जीः
    अपने ठीक ही कहा “कुछ ना समझो खुदा करे कोई…..” मगर अब खुदा क्या करे, अनूप जी किस्सा समझा दिया।
    अनुराग श्रिवास्तव जीः
    हां वाकई मे ये बात मानने की है कि लखनऊ मे हर त्योहार बहुत ज़बरदस्त पैमाने पर मनाया जाता है और बहुत ज़मानों से आज तक भी हर त्योहार का माहोल एक जैसा है। मगर पता नही यार यहां दुबई मे सिवैयां कहां मिलेंगी 😦 😉
    प्रभात भाईः
    यहां पर हर चीज़ बहुत महंगी है और खसूसन ईद और दूसरे त्योहारों पर हर चीज़ पर डबल पैसे मांगते हैं – तो इसी लिए बहुत ही सोच समझ कर अपने दोस्त को बकरा बनाया 😉 कार खरिदा है और वो हम दोस्तों के काम ना आए ये कैसी दोस्ती 😀
    इदन्नम्म भाई, PRABHAT TANDON भाई, उन्मुक्त साहब, प्रमेन्‍द्र प्रताप भाई, संजय बेंगाणी जी (भाई), अनूप शुक्ला जी, भाई प्रियंकर , जनाब, समीर लाल जी, अनुराग श्रीवास्तव साहब, आलिजनाब premlatapandey, श्रीमान जगदीश भाटिया, श्रीमति pratyaksha जी, और प्यारे प्रतीक पाण्डे आप सब का धन्यवाद और दीपावली के साथ ईद की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

  • 15. Raman Kaul  |  अक्टूबर 21, 2006 को 12:31 अपराह्न

    शुऐब, आप को ईद की, दीवाली की, और ख़ासकर सालाना छुट्टी की बहुत बहुत मुबारकबाद। यह समझ में नहीं आया कि आप ब्लागस्पॉट वाले चिट्ठों पर कमेंट क्यों नहीं कर पाते। आप का तो ब्लागस्पॉट पर भी खाता है, उस का इस्तेमाल क्यों नहीं करते?

  • 16. ziaqureshi  |  अक्टूबर 24, 2006 को 5:48 अपराह्न

    आपका ब्लाग रंगीन है मैंने उत्साह का रंग देख लिय़ा है

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