ये खुदा है – 38

नवम्बर 6, 2006 at 2:47 अपराह्न 9 टिप्पणिया

[  सद्दाम को मौत ]
 
उसामा बिन लादेन को घसीटते हुए थाना ले आए जब उसके कपडे उतारे तो थाना मे सब की चीखें निकल पडीं और डर के मारे कांप उठे। किसी इमारत की लिफ्ट मे ऊपर नीचे खेलते हुए उसामा के कपडों मे खुदा पकडा गया। दो दिन पहले खबरों मे बताया भी था कि न्यूयार्क के म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चोरी हो गए। पता नही क्यों, खुदा को भी शरारत सूझती है आखिर क्या ज़रूरत थी म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चुरा कर पहनने की? अब हालत ये है कि अगर उसको समझाएं तो गज़ब मे आकर कहीं भी भूकंप ला सकता है। आज खुदा की नींद हराम, सुबह चार बजे ही जगा दिया कि जनाज़ा मे जाना है, उठते ही बडे गज़बनाक अंदाज़ मे अंगडाई ली शायद ज़िनदगी मे पहली बार किसी की मृत्यु पर जाना है। दांत साफ करते हुए खुदा को खयाल आया कि कल रात डिनर पर अमेरिका ने पूछा थाः क्या आप अर्थी को कंधा देने का तजुर्बा रखते हैं? खुदा ने खिलखिलाते हुए जवाब दियाः हमें तो जनाज़ों मे जाने का तजुर्बा नही अलबत्ता जनाज़े के जुलूस को भी बारात की तरह इनजोए करते हैं। इस पर अमेरिका ने कहाः तब तो आपको रात भर प्रेक्टिस करलेनी चाहिए क्योंकि कल सुबह आपको एक महान हस्ती की अर्थी को कंधा देना है। दांत साफ करने बाद अभी तक नाश्ता नही मिला मगर सद्दाम का खत मिला जिसकी पहली लाइन मे ही खुदा को अमेरिकी चमचा लिखा, आगे लिखाः अपनी मौत की खबर सुन कर मैं ने खुदा पर दुबारा ईमान लाया मगर अब क्या फाइदा वो खुद अमेरिका के कब्ज़े मे है। सद्दाम का खुला खत पढ कर खुदा को बहुत रोना आया फिर सीधा वाइट हाऊस मे घुस आयाः किसी भी हाल मे हमें ईराक जाना है, वहां बेचारा सद्दाम को हमारी मदद की ज़रूरत आंपडी है। अमेरिका ने मना किया, इस वक्त आपका वहां जाना मुनासिब नही, पूरे ईराक मे दंगा फसाद और हर तरफ खून की नालियां बह रही हैं – खुदा ना करे अगर खुदा को कुछ हो जाए तो फिर विश्व को कौन चलाए। अमेरिका ने खुदा को समझायाः चुनाव सर पर हैं और ऐसे मौके पर सद्दाम को मौत की सज़ा सुनाना ज़रूरी था – एक ऐसा शक्स जो पच्चीस वर्षों तक अपनी ही जनता पर खुद को खुदा मनवाता रहा वो पेट्रोल की ताकत से पूरे गल्फ पर खुदा बने उडना चाहता था और जब हम ने उसका सारा पेट्रोल चूसा तो वो नीचे आगिरा। इसी दौरान ईराक से खुदा को फोन आने शुरू होएः अगर आप वाकई खुदा हैं तो कृपया अली की मज़ार को सौदी अरब मे शिफ्त करदें बडी मेहरबानी आपकी, यहां हम सुन्नी-शिया आपस मे एक दूसरे के लिए खून के प्यासे हैं। खुदा ने दिलासा दियाः जब वो ईराक आए तो एक साथ मिल बैठ कर मसला हल कर लेंगे। क्या खाख हल करेंगे? सेकडों वर्ष गुज़र चुके आज तक ये मसला हल नही हुआ कि कौन खुदा की औलाद है हद तो ये है कि खुदा खुद नही जानता कि वो किस का पैदा किया है? अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा – पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है। सद्दाम ने कभी सोचा तक नही कि खुदा को कभी मौत आए, इतना तो मालूम है कि विश्व पर अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे — जारी

बाकी फिर कभी

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ये खुदा है – 37 मूंह मीठा करें

9 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. bhuvnesh  |  नवम्बर 6, 2006 को 9:20 अपराह्न

    ईराक की स्थिति पर अच्छा लेख लिखा है
    पर सद्धाम का चित्र ठीक से लगा दें तो पूरा पढ़ने में आये

  • 2. संजय बेंगाणी  |  नवम्बर 7, 2006 को 4:02 पूर्वाह्न

    बहुत खुब शुएब और यह तो बहुत ही सटीक कहा है “अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे”
    निचे वाली तस्वीर हटा देना वह लिखे हुए के उपर आ रही है, इसलिए पुरा नहीं पढ़ पा रहे.

  • 3. SHUAIB  |  नवम्बर 7, 2006 को 6:08 पूर्वाह्न

    शुक्रिया bhuvnesh भाई और संजय भाई
    मैं ने नीचे वाला सद्दाम का फोटो निकाल दिया।
    आप दोनों का धन्यवाद 🙂

  • 4. प्रियंकर  |  नवम्बर 7, 2006 को 10:21 पूर्वाह्न

    शुएब भाई !
    एक खुदा को दुनिया से भेजने की बहुत जल्दी थी दूसरे खुदा को . दूसरे को अपनी खुदाई जो बचानी थी .पर उसे भी एक दिन ऐसे ही जाना होगा दोनो हाथ पसार कर . यह अहसास अगर पहले से हो जाए तो शायद आदमी खुदा बनने से डरे .

  • 5. इदन्नम्म  |  नवम्बर 7, 2006 को 11:43 पूर्वाह्न

    बहुत बढिया शुएब भाई!

  • 6. समीर लाल  |  नवम्बर 7, 2006 को 2:36 अपराह्न

    आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा – पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है।

    वाह, शुएब भाई, बहुत सही. कलम का पैनापन दिन ब दिन बढ़ता जा रहा हि, बधाई.

  • 7. PRABHAT TANDON  |  नवम्बर 7, 2006 को 5:11 अपराह्न

    बहुत ऊँची बात कह दी शुएब तुमने, “अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। “

  • 8. Tarun  |  नवम्बर 8, 2006 को 1:47 पूर्वाह्न

    शुएब तुम्हारे ‘ये खुदा है’ के नामः
    मौत के डर से शायद खुदा ने खुद को छुपा रखा है।
    कहें कुछ लोग चलो मर जायें, जिंदगी में क्या रखा है।।

  • 9. दिनेशराय द्विवेदी  |  सितम्बर 13, 2008 को 3:02 पूर्वाह्न

    हमें तो इस बात की बड़ी मायूसी है कि अब तक हम कहाँ थे जो ये ब्लाग न देखा। आज देखा तो समझो ईद का चांद देखा।

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