मूंह मीठा करें

नवम्बर 10, 2006 at 11:00 पूर्वाह्न 17 टिप्पणिया

नीचे तसवीर पर किल्क करना लड्डू खाने जैसा है 🙂

और हां ……. लड्डू खाने के बाद चिट्ठाचर्चा चलें वहां आज मज़ेदार चर्चा चल रही है, बहुत दिनों की खामोशी के बाद सबको एक साथ एक जगह बोलते हुए अच्छा लग रहा है …….. लड्डू बाद मे खाना  – आइये आइये चलते हैं चिट्ठाचर्चा

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ये खुदा है – 38

17 टिप्पणियाँ Add your own

  • 1. सागर चन्द नाहर  |  नवम्बर 10, 2006 को 12:22 अपराह्न

    मजा आ गया दुबई के लड्डु खाकर शुएब भाई। बहुत्मीठे है बिल्कुल आप ही की तरह। 🙂

  • 2. उन्मुक्त  |  नवम्बर 10, 2006 को 4:53 अपराह्न

    लार टपकने लगी।

  • 3. समीर लाल  |  नवम्बर 11, 2006 को 1:21 पूर्वाह्न

    अब लड्डू सेवन के बाद चर्चा का आनन्द और भी दूना हो गया. अब लगा कि परिवार में गंभीर चर्चा चल रही है.

  • 4. पंकज बेंग़ाणी  |  नवम्बर 11, 2006 को 3:57 पूर्वाह्न

    मूँह मे पानी आ गई भीडु .. ह्म्म्म्म्म्

  • 5. संजय बेंगाणी  |  नवम्बर 11, 2006 को 3:59 पूर्वाह्न

    यार अगली बार गुलाब जामुन खिलाना, मुझे लड्डू थोड़े कम पसन्द है. 🙂

  • 6. SHUAIB  |  नवम्बर 11, 2006 को 5:09 पूर्वाह्न

    अरे यार दोस्तों ये लड्डू मेरी नई वैब साइट के लिए हैं – आप सबका धन्यवाद

  • 7. Amit  |  नवम्बर 11, 2006 को 5:53 पूर्वाह्न

    मजा आ गया दुबई के लड्डु खाकर शुएब भाई।

    अरे सागर साहब, शुएब भाई ने कब कहा कि लड्डू दुबई के हैं?? दरअसल ईद पर किसी मित्र ने यहीं से भेजे थे, तो वो शुएब भाई अब खिला(दिखा) रहे हैं, अभी तक इसी कारण से बचा के रखे थे इसलिए ईद पर नहीं खिलाए!! 😉 😀

    शुएब भाई, आपको नया ऑनलाईन घर मुबारक हो। 🙂

  • 8. SHUAIB  |  नवम्बर 11, 2006 को 2:01 अपराह्न

    आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद
    @ अमीतजीः आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हैं 🙂 😉
    @ वाह संजय भाई वाह क्या याद दिलाया आपने भी कस्म से यार गुलाब जामुन खाये ज़माना होगया मुझे।
    @ पंकज भाई शुक्र है कम से कम पानी तो आया 😉
    @ समीरजी, मुझे भी बहुत अच्छा लगा जब चिट्ठा चर्चा मे सब चर्चा कर रहे थे। आपका बहुत धन्यवाद।
    @ उन्मुक्त भाई, ये सिर्फ राल टपकाने के लिए नही बल्कि अपनी नई वैबसाइट पर आने का न्युता भी है।
    @ नाहर भाई, काहे माक करते हो यार ऐसे लड्डू दुबई मे नही मिलते।

  • 9. Amit  |  नवम्बर 11, 2006 को 6:48 अपराह्न

    अमीतजीः आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हैं

    लो कल्लो बात, शुएब बाबू आपको आज पता चला है?? यार हम तो अधिकतर मज़ाक ही करते हैं क्योंकि अपना मानना है कि मन का प्रसन्न रहना स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है!! 😀 अब वो बात अलग है कि लोगों को कई बार हमारा मज़ाक मज़ाक नहीं लगता!! 😉 😛

  • 10. SHUAIB  |  नवम्बर 12, 2006 को 2:44 अपराह्न

    अमीत जीः
    मुझे मालूम है आप किसी भी बात को बहुत अच्छी तरह बयां करते हैं और आपकी यही अदा मुझे पसंद है:)

  • 11. राज यादव  |  सितम्बर 22, 2007 को 5:56 अपराह्न

    सुहैब भाई ,सबसे पहले ,मुह मीठा कराने के लिए ,सुक्रिया ,स्वादिस्त मीठा था ..मजा आ गया ….अच्छे बिचार है …अच्छा लगा आपको पढना ….बधाई .हमारे ब्लोग पे भी आपका स्वागत है .

  • 12. maazlabib  |  अप्रैल 18, 2008 को 3:47 पूर्वाह्न

    शुएब भाई, तीन ब्लोग स्सिट्स घूम कर याहान तक पहुन्चा …….बहुत खुब दुबाई मे रह कर भी भारत मे रहने का अछ्छा तरीक़ा है ब्लोग लिख कर हम सब से बाते करना……..जारी रखो….

  • 13. Satish Saxena  |  जुलाई 13, 2008 को 2:52 अपराह्न

    nayaa

    नया आइडिया है, स्वागत करने खा, बधाई

  • 14. khetesh  |  सितम्बर 5, 2008 को 9:03 पूर्वाह्न

    must visit for hindi user:
    हिन्दी इन्टरनेट (Hindi Internet):-
    http://hi.wikipedia.org/wiki/हिन्दी_इन्टरनेट

  • 15. दिनेशराय द्विवेदी  |  सितम्बर 13, 2008 को 3:12 पूर्वाह्न

    जन्मदिन मुबारक हो। लड़्डू की शक्ल अच्छी है पानी आ गया मुहँ में। भागता हूँ फ्रिज की तरफ।

  • 16. पंडित जी पहुँच गए ब्लॉगर धाम में | ई-पण्डित  |  दिसम्बर 12, 2009 को 1:02 पूर्वाह्न

    […] जाना पहचाना लगा। दरअसल वो शुएब भाई के गृहप्रवेश के वक्त के बचे थे। जल्दी में उन्हीं को […]

  • 17. armidamcintyre6584  |  अप्रैल 8, 2016 को 11:26 अपराह्न

    zorra mi tambien necesitar un pivote pasional, xq he muerto en japan,nu00a0puede ke sonria para las fotos, pero feliz no soy, hay ke emprender l Click http://d2.ae/hool090715

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